00:00सांख्ययोग के अनुसार जब पुरुष जबरदस्ती प्रकृत्त के साथ संसर्ग कर लेता है
00:06दोनों ही पक्षविक्रित हो जाते हैं
00:08इंद्रियां अपनी प्राकृतिक सहज गतिक हो देती हैं
00:12जैसे नदियां खराब हो जाती है
00:13पुरुष आप है और नदी क्या है प्रकृति है आप नदी के साथ बलात संसर करोगे तो नदी भी खराब हो जाएगी और आप भी दुख पाओगे
00:23ये जो मिलन है ये दोनों के लिए ये अच्छा नहीं है उसको उसकी जगह रहने तो तुम अपनी जगह रहो इसी में दोनों की भलाई है तुम मुक्त हो जाओगे वो खुबसूरत हो जाएगी तुम मुक्त हो जाओगे और वहां सौंदर्य निखराएगा पुरुष की शेष
00:53हम में तुम में कोई द्वेश नहीं है
00:55हम तुम एक सम्मान का और प्रेम का रिष्टा रखते हैं
01:00और प्रेम हमारा यही है
01:01तुम अपना काम देखो, हम अपना काम देखे
01:04आप जब मुक्त होते हो
01:07सिर्फ तब आपका सब कुछ सुन्दर हो जाता है
01:11सिर्फ तब