00:00सोफ्ट्वेयर में जब मैं अपनी पहली नौकरी में गया था, वो मेरे लिए बड़ी विवश्टा के वर्ष थे
00:07जो मुझे चाहिए था उसको पाना मेरे हाथ में नहीं था
00:13और जो मुझे मिला हुआ था उसको मुझे चाहिए नहीं था
00:16कितने बजे आना है ओफिस, ये कोई और तया करता था, मैं रात का खिलाडी, वो कहें नौ बजे आ जाओ सुबह, खेर पहुँच जाता था, कॉफी पी-पी कर किसी तरह से जगा रहता था
00:35मेरा काम का तरीका कि जो जल्दी से जल्दी हो सकता है, उसको एक जटके में निप्टा दो, उसके बाद अपना समय अपना है, काम पूरा कर दिया, तो मैं ऑफिस में ही बैठ करके उन्हीं के सिस्टम पर शायरी करता था
00:53क्योंकि मैं जितनी आपको आज की कोडिंग करा नहीं है, मैंने कर दी, अब मैं वहाँ से उठके लाइब्रेरियम बैठना चाहता हूँ
01:05मेरा बॉस उसको खुजली हो जाए, कि ये नया नया फ्रेशर ये सीट पर क्यों नहीं है, तो आधे घंटे में राभेरी में हूँ नहीं क्यों सुंगता सुंगता पहुंच जाए, तो ले आए कि वापर सिस्टम पर बैठो, उन्हीं के सिस्टम पर शायरी है और उन्हीं के
01:35उस ही में लिखाता है कि हजार दायरों में बांद लो तुम जिंदगी मेरी, मैं बस एक दायरा अपना चाहता हूँ, और उस दायरे के लिए तो मरने को भी तयार हूँ, वहां तुम्हें खुसने नहीं दूगा, यही मैं आप से चाहता हूँ, दोड़ा दीजी अपनी गा�