Skip to playerSkip to main content
Bangladesh Defence Alliance Shift: दक्षिण एशिया की राजनीति में बड़ा मोड़ आता दिख रहा है। Hindustan Times Analysis और India Today Report के अनुसार, बांग्लादेश ने पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच बने नए रक्षा व आर्थिक फ्रेमवर्क में शामिल होने के सकारात्मक संकेत दिए हैं।

हाल ही में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने Makkah Joint Defence Agreement पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे नाटो (NATO) की तर्ज पर सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था माना जा रहा है। बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने साफ किया है कि ढाका 'Bangladesh First' नीति के तहत अपने राष्ट्रीय हित और वैश्विक आर्थिक हालातों को देखते हुए फैसला लेगा।

हालांकि बांग्लादेश ने अभी किसी सैन्य ब्लॉक में औपचारिक शामिल होने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस्लामाबाद और अंकारा के साथ उसकी बढ़ती नजदीकी नई दिल्ली के लिए सुरक्षा और कूटनीतिक दृष्टिकोण से बड़ी चुनौती खड़ी कर सकती है। Drishti IAS Analysis के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से लेकर हिंद महासागर के रणनीतिक संतुलन पर इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है।

About the Story:
Amid shifting geopolitical dynamics in South Asia, Bangladesh has expressed a positive approach toward potentially joining an economic or defense framework with Saudi Arabia, Pakistan, and Türkiye. Following the recent signing of the Makkah Joint Defence Agreement between Riyadh, Islamabad, and Ankara, Dhaka's strategic orientation under its "Bangladesh First" policy is being closely monitored in New Delhi due to its critical location in the Bay of Bengal and maritime security implications.

#Bangladesh #MakkahPact #IndiaForeignPolicy #Geopolitics

~HT.410~PR.514~ED.106~GR.506~VG.HM~

Category

🗞
News
Transcript
00:12दक्षिन एश्या के राजनीती में इस वक्त एक ऐसा समीकरण बनता दिखाई दे रहा है जिस पर भारत की नजरे
00:18तिखना स्वाभाविक है
00:19एक तरफ भारत का पडोसी बांगलादेश और दूसरी तरफ पाकिस्तान, तुर्की और साउधी अरब के बीच तेजी से बढ़ता रणनीतिक
00:27सहयोग। सवाल सर्फ इतना नहीं है कि बांगलादेश किसके साथ खड़ा होगा।
00:31बड़ा सवाल ये है कि क्या दक्षिन एशिया और पश्चिम एशिया के बीच एक नया रणनीतिक नेटवर्क तयार हो रहा
00:38है क्योंकि 21 अगस्त को सामने आए बयान में बांगलादेश के विदेश मामलों के सलहकार हुमायू कबीर ने कहा कि
00:45धाका साउधी अरब, पाकिस्त
01:14अगस्त को मक्का में साउधी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने मक्का जॉइंट डिफेंस अग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किये।
01:30समझोते की सबसे एहम लाइन है, अगर इन तीन देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होता है, तो
01:36उसे तीनों पर हमला माना जाएगा। यही वज़ा है कि इसकी तुलना नेटों की सामुहिक सुरक्षा व्यवस्था से की जा
01:42रही है। हाला कि एक महत्वपूर्ण बात स
01:44समझना जरूरी है, यह समझोता अभी मेटों जैसा संस्थागत सैने गठ जोड नहीं है।
02:14अगर बांगलादेश भी किसी आर्थिक या रक्षा फ्रेमवर्क में इनके करीब आता है, तो इस समीकरन का भौगोलिक दायरा काफी
02:21बढ़ जाएगा। यही से भारत के लिए चिंता शुरू होती है। भारत और बांगलादेश के रिष्टे पहले ही कई मुद्धों
02:26पर सम
02:27अमवेदन शील दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में अगर धाका की रणनीतिक नस्दी की इसलामाबाद और अंकारा के साथ
02:33बढ़ती है तो नई दिल्ली के सामने सिर्फ कूटनीतिक चुनौती नहीं बलकि एक व्यापक रणनीतिक सवाल भी खड़ा हो सकता
02:39है। भारत की स�
02:41अमीन पर खिची सीमा तक सीमित नहीं है। बांगलादेश की भौगौलिक स्थिती बंगाल की खाड़ी के लिहाज से बेहद महत्वपूर
02:47है। समुद्री व्यापार, उर्जा आपूर्ती, बंदरगाह और हिंद महासागर की रणनीतिक गतिविध्यां इन सभी ने बांगल
03:07फ्रेमवर्क की बात की गई है। इसलिए ये कहना की कोई नया सैने गुड बन चुका है, फिलहाल अतिशयोकती होगी।
03:13बलकि बांगलादेश शायद अपने विकल बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यानि बांगलादेश फर्स्ट की नीती के तहत अलग-अलग
03:20शक्तियों क
03:35के तहत साउदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की पहले ही सामुहिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सेहमत हो चुके हैं।
03:42अब सबसे बढ़ा सवाल यही है, क्या बांगलादेश सिर्फ अपने आर्थिक और कूटनीतिक विकल बढ़ा रहा है या फिर वो
03:48धीरे
03:48एक नए रणनीतिक नेटवर्क का हिस्सा बनने की तयारी कर रहा है। अगर यह केवल व्यापार तक सीमित रहता है,
03:54तो कहानी अलग होगी। लेकिन अगर आर्थिक रिष्टों के बाद रक्षा सहयोग भी जुडता है, तो इसका असर ढाका और
03:59दिल्ली के रिष्टों से कह
04:00आगे जाएगा। बंगाल की खाड़ी से लेकर हिंद महासागर तक और इसलिए आने वाले समय में सिव बांगलादेश के अगले
04:07फैसले पर नहीं, बलकि भारत की कूटनीतिक रणनीती पर भी पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
Comments

Recommended