00:00मंगलम भगवाने विष्टनों, मंगलम गरुनद्धोजा, मंगलम पुंडरी काक्छो, मंगला यतनों हरी प्यारी मित्रों, जैश्याराम, जैमातादी मित्रों, आज आप से चर्चा
00:09करते हैं, अनन्त चतुरदशी का पामन पर्व कब मनाया जाएगा और क्या है पूजाबि�
00:16अनन्त चतुरदशी का पामन पर्व 25 सितंबर 2026 को अनन्त चतुरदशी का पामन पर्व मनाया जाएगा अनन्त चतुरदशी भारती चेतना
00:28का पर्व है जो केवल धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं बलकि जीवन के साश्वत, शिद्धानतों, धैर्य, निरंतरतां और संत
00:42जीवन उस्यों बताया गया है, अनन्त का सादिक अर्थ होता है, जिसका कोई अन्त नहीं हो, जो किसी सीमा में
00:52नहीं हो, जो समस्त प्रकार की सीमाओं से परे हो वह है अनन्त, अनन्त चतुरदशी का पामन पर्व 25 सितंबर
01:01दो हजार छब्विस को आने वाली चतुर्दसी तिथी स्रष्टी का पालन करता भगवाने विष्ट्णू के बिराठ स्वरूप को जोडता है
01:12और उसे ब्रह्मांड में संतुलन बनाए हुए रखते हैं वर्स दो हजार छब्विस में यह पामन अनंत चतुर्दसी का जो
01:20पू�
01:31ग्यारा बच करके 18 मिनट से चतुर्दसी तिथी प्रारंब होगी और चतुर्दसी तिथी की समाप्ती की अगर हम चर्चा करें
01:39तो 25 सितंबर 2026 को रात में ग्यारा बच करके 6 मिनट पर अनंत चतुर्दसी का जो पावन पर्व है
01:47यह पूण हो जाएगा चतुर्दसी पूण
01:53सुबह 6 बच करके 11 मिनट से रात्री में 11 बच करके 6 मिनट तक रहेगा यह दर्साता है कि
02:03इस्वर तक पहुँचने का मार्ग लचीला होता है इसलिए निरंतर जुक करके रहना चाहिए
02:10संतुलन का योग भगवानि विष्णू शांती और पालन करने के दे होता है और इनकी पूजा करने से सुक्र के
02:19दिन होती है तो शाधक के भावतिक और आध्यात्मिक जीवन के बीच में आदर सेतु का निर्मान करती है
02:28मानसिक शुद्धी चतुरदशी तिथी का सीधा प्रभाव मन की चंचलता को नियंतरित करने पर होता है यह वर्स अत्यनती ही
02:38विष्लेशन के लिए सर्वस्रेष्ट है और जहां अपने जीवन के अस्वंतुलन को पहचान करके अनन्त की क्रपा ठीक कर सकते
02:50हैं
02:51पौरानिक गहराईयों की गाथा का ऐसा भी वर्णन आता है कि इस महापर्व से जुड़े ब्राम्मण, कॉंडिल्य और उनकी धर्वनिष्ट
03:04पत्नी सुसीला की कथा आती है
03:07यह कथा प्राचीन काल की कहानी नहीं है बलकि मानों के मनो वैज्ञानिक विशलेशन को दर्शाती है
03:17स्रद्धा और भक्ती सुसीला ने अनंत के धागे को अपने बाजू पे बांधा परंतु पती ने कॉंडिल रिशी ने उस
03:28धागे को तोड़ करके अगनी में फेक दिया
03:31अहंकार के बस में आ करके पवित्र धागे को तोड़ करके फेक दिया जिसके कारण से जीवन में दरिद्रता आ
03:40गई और घोर संगरसों का उनको शामना करना पड़ा
03:44प्राश्चित और प्राप्ति जब कॉंडिल ने अपनी भूल को शुकार किया तो उन्होंने इस्वर की खोज की और निकल पड़े
03:54और इस्वर की खोज की और जब निकले तो निरंतरता को प्राप्त करते हुए इस्वर भी प्राप्त हो गए
04:01चौदा गाठों का ये धागा विज्ञान को दर्शाता है
04:06चौदा लोकों के जो मालिक हैं
04:08चतुरदशी के दिन धारण किये हुए जाने वाले
04:11इसको कवच बोला जाता है
04:14लोग चौदा वर्षों का शंकल पलेते हैं
04:17और बहुत चे लोग इस धागे को अपने सीधे हाथ पर
04:21जो पुरुषवर्ग हैं वह दाइने हाथ में धारण करते हैं
04:26महिलाएं बाएं हाथ में धारण करते हैं
04:28और पूरे वर्ष तक धारण करके रखते हैं
04:31एक छोटा शाधागा है चौदा गाठ का
04:34इसका पूजन आपको करना है
04:36और इसको आप अपने बाजू पर धारण करिएगा
04:40निश्चित रूप से आपके मन की शायें पूर्ण होंगी
04:43अधिक जानकारी चाहते हैं इस विशेपर तो आप शंपर कर सकते हैं
04:47मैं मिलता हूँ नए वीडियो में तब तक के लिए आप सबीको
04:50जै स्री कृष्णा जै श्याराम
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