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Anant Chaturdarshi Kab Hai 2026: हिंदू धर्म की प्रमुख तिथियों में से एक है अनंत चतुर्दशी का व्रत। यह दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन भक्त जन पूरी श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और उनसे घर की समृद्धि का आशीर्वाद लेते हैं। यही नहीं इस दिन सबसे खास माना जाता है अनंत सूत्र बांधना। यह एक ऐसा धागा होता है जिसमें 14 गांठें लगाईं जाती हैं और पूजन के बाद इसे हाथ में बांधा जाता है। इसी दिन गणपति विसर्जन भी होता है।इस वजह से लोग विष्णु जी के साथ गणपति की पूजा भी करते हैं। इस साल अनंत चतुर्दशी की तिथि को लेकर लोगों के मन में शंका है और यह पर्व किस दिन मनाया जाएगा, इसके बारे में सभी जानकारी लेना चाहते हैं। आवे आपको बताते हैं इसकी सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है?Anant Chaturdarshi Kab Hai 2026: Vishnu Ji Ki Puja Ka Muhurt,Rahu Kal Samay..

The fast of Anant Chaturdashi is one of the most important dates in Hinduism. This day is primarily dedicated to the worship of the infinite form of Lord Vishnu. On this day, devotees worship Lord Vishnu with devotion and seek his blessings for prosperity in their homes. Furthermore, the most special event on this day is the tying of the Anant Sutra (the Anant Sutra). This is a thread with 14 knots that is tied around the hand after worship. The Ganesh Visarjan also takes place on this day.For this reason, people worship Lord Ganesha along with Lord Vishnu. This year, people are unsure about the date of Anant Chaturdashi and want to know when it will be celebrated. Let us tell you the exact date, auspicious time, and significance of the puja.

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00:00मंगलम भगवाने विष्टनों, मंगलम गरुनद्धोजा, मंगलम पुंडरी काक्छो, मंगला यतनों हरी प्यारी मित्रों, जैश्याराम, जैमातादी मित्रों, आज आप से चर्चा
00:09करते हैं, अनन्त चतुरदशी का पामन पर्व कब मनाया जाएगा और क्या है पूजाबि�
00:16अनन्त चतुरदशी का पामन पर्व 25 सितंबर 2026 को अनन्त चतुरदशी का पामन पर्व मनाया जाएगा अनन्त चतुरदशी भारती चेतना
00:28का पर्व है जो केवल धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं बलकि जीवन के साश्वत, शिद्धानतों, धैर्य, निरंतरतां और संत
00:42जीवन उस्यों बताया गया है, अनन्त का सादिक अर्थ होता है, जिसका कोई अन्त नहीं हो, जो किसी सीमा में
00:52नहीं हो, जो समस्त प्रकार की सीमाओं से परे हो वह है अनन्त, अनन्त चतुरदशी का पामन पर्व 25 सितंबर
01:01दो हजार छब्विस को आने वाली चतुर्दसी तिथी स्रष्टी का पालन करता भगवाने विष्ट्णू के बिराठ स्वरूप को जोडता है
01:12और उसे ब्रह्मांड में संतुलन बनाए हुए रखते हैं वर्स दो हजार छब्विस में यह पामन अनंत चतुर्दसी का जो
01:20पू�
01:31ग्यारा बच करके 18 मिनट से चतुर्दसी तिथी प्रारंब होगी और चतुर्दसी तिथी की समाप्ती की अगर हम चर्चा करें
01:39तो 25 सितंबर 2026 को रात में ग्यारा बच करके 6 मिनट पर अनंत चतुर्दसी का जो पावन पर्व है
01:47यह पूण हो जाएगा चतुर्दसी पूण
01:53सुबह 6 बच करके 11 मिनट से रात्री में 11 बच करके 6 मिनट तक रहेगा यह दर्साता है कि
02:03इस्वर तक पहुँचने का मार्ग लचीला होता है इसलिए निरंतर जुक करके रहना चाहिए
02:10संतुलन का योग भगवानि विष्णू शांती और पालन करने के दे होता है और इनकी पूजा करने से सुक्र के
02:19दिन होती है तो शाधक के भावतिक और आध्यात्मिक जीवन के बीच में आदर सेतु का निर्मान करती है
02:28मानसिक शुद्धी चतुरदशी तिथी का सीधा प्रभाव मन की चंचलता को नियंतरित करने पर होता है यह वर्स अत्यनती ही
02:38विष्लेशन के लिए सर्वस्रेष्ट है और जहां अपने जीवन के अस्वंतुलन को पहचान करके अनन्त की क्रपा ठीक कर सकते
02:50हैं
02:51पौरानिक गहराईयों की गाथा का ऐसा भी वर्णन आता है कि इस महापर्व से जुड़े ब्राम्मण, कॉंडिल्य और उनकी धर्वनिष्ट
03:04पत्नी सुसीला की कथा आती है
03:07यह कथा प्राचीन काल की कहानी नहीं है बलकि मानों के मनो वैज्ञानिक विशलेशन को दर्शाती है
03:17स्रद्धा और भक्ती सुसीला ने अनंत के धागे को अपने बाजू पे बांधा परंतु पती ने कॉंडिल रिशी ने उस
03:28धागे को तोड़ करके अगनी में फेक दिया
03:31अहंकार के बस में आ करके पवित्र धागे को तोड़ करके फेक दिया जिसके कारण से जीवन में दरिद्रता आ
03:40गई और घोर संगरसों का उनको शामना करना पड़ा
03:44प्राश्चित और प्राप्ति जब कॉंडिल ने अपनी भूल को शुकार किया तो उन्होंने इस्वर की खोज की और निकल पड़े
03:54और इस्वर की खोज की और जब निकले तो निरंतरता को प्राप्त करते हुए इस्वर भी प्राप्त हो गए
04:01चौदा गाठों का ये धागा विज्ञान को दर्शाता है
04:06चौदा लोकों के जो मालिक हैं
04:08चतुरदशी के दिन धारण किये हुए जाने वाले
04:11इसको कवच बोला जाता है
04:14लोग चौदा वर्षों का शंकल पलेते हैं
04:17और बहुत चे लोग इस धागे को अपने सीधे हाथ पर
04:21जो पुरुषवर्ग हैं वह दाइने हाथ में धारण करते हैं
04:26महिलाएं बाएं हाथ में धारण करते हैं
04:28और पूरे वर्ष तक धारण करके रखते हैं
04:31एक छोटा शाधागा है चौदा गाठ का
04:34इसका पूजन आपको करना है
04:36और इसको आप अपने बाजू पर धारण करिएगा
04:40निश्चित रूप से आपके मन की शायें पूर्ण होंगी
04:43अधिक जानकारी चाहते हैं इस विशेपर तो आप शंपर कर सकते हैं
04:47मैं मिलता हूँ नए वीडियो में तब तक के लिए आप सबीको
04:50जै स्री कृष्णा जै श्याराम
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