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राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए सिब्बल ने दावा किया कि चुनाव आयोग में बहुमत की अनदेखी कर एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं।

सिब्बल के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और ज्ञानेश जोशी ने कई फैसलों का विरोध किया, लेकिन उनकी असहमति को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने वोटर लिस्ट के केंद्रीकरण, ईसीआई-नेट (ECI NET) पोर्टल के एक्सेस में बदलाव और फॉर्म-6 में संशोधन पर सवाल उठाए। सिब्बल ने आरोप लगाया कि ईआरओ (ERO) से अधिकार छीनकर दिल्ली स्थित मुख्यालय को दे दिए गए हैं, जिससे पारदर्शी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को तुरंत सस्पेंड करने, पिछले चुनावों की समीक्षा करने और पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

Rajya Sabha MP and senior advocate Kapil Sibal held a press conference and levelled serious allegations against the functioning of the Election Commission of India (ECI) and Chief Election Commissioner (CEC) Gyanesh Kumar. Citing a report by The Indian Express, Sibal claimed that unilateral decisions are being taken within the Election Commission by disregarding the majority view.

According to Sibal, Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu and Gyanesh Joshi opposed several decisions, but their dissent was allegedly ignored. He raised questions over the centralisation of voter lists, changes in access to the ECI-NET portal, and amendments to Form-6. Sibal alleged that powers have been taken away from Electoral Registration Officers (EROs) and transferred to the ECI headquarters in Delhi, which, he said, could affect transparency in the process.

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00:00आज ये तैय हो गया है कि मजॉरिटी ग्यानेश कुमार के साथ नहीं थी ग्यानेश कुमार अपनी मनमर्जी से फैसले
00:12करते थे किस तरह एलेक्शन चलाना है क्या एरो को करना है कौन सा फॉर्म फाइल करना है ये तैय
00:22करते थे ग्यानेश कुमार इस देश में नेतिकता कामत का
00:26काहिम है आज मी कुछ लोगों कुछ लोगों का जमीर आज भी काहिम है और जो आज सुभे स्टोरी इंडियन
00:35एक्सप्रेस में निकली है मैं उन जर्नलिस्ट को दाद देता हूं जो उन्होंने विस्तार से बता है कि किस किसम
00:43का धान्दा हो रहा है इलेक्शन केमिशन में और सा
00:48साथ में एक बात और साबित हो गई कि जब तक जर्नलिजम जिन्दा है तब तक अकाउंटेबिलिटी रहेगी आज वो
01:00साबित हो गया है मोटी मोटी बाते करूँगा बारीकी में जाने के जुरुत नहीं है ऐसा लगता है इलेक्शन केमिशन
01:09आपको मालूम है कि पहले तो ए
01:12एकी एलेक्शन कमिशन का एकी मेंबर होता था फिर संचोदर नुवा और तीन मेंबर बनाई गई एलेक्शन कमिशन और ये
01:19भी तै किया गया कि डिसिशन्स भाइ मजॉरिटी होगा
01:23तो आज ये तै हो गया है कि मजॉरिटी गयानेश कुमार के साथ नहीं थी गयानेश कुमार अपनी मनमर्जी से
01:35फैसले करते थे किस तरह एलेक्शन चलाना है क्या एरो को करना है कौन सा फॉर्म फाइल करना है ये
01:46तै करते थे गयानेश कुमार
01:50जोशी साब और संदू साब जो election commissioners हैं कई बार उन्होंने विरोध किया
01:56कि जो आप कर रहे हो गनेश कुमार जी और लगबग मेरे खाल 40 बार 14 बार 10 मिहने में
02:03विरोध किया
02:04कि आप ये क्या कर रहे हो जो कर रहे हो आप वो सम्मिधानिक नहीं है वो कानून के मताबिक
02:10नहीं है
02:11और इसके पीछे सोच क्या थी दो बातें आपको मोटी मोटी बता देता हूं कि जो software election commission का
02:19जो अधिकारी है जिसको अख्तियार है वो है ERO उसको access कर सकता है क्योंकि ERO बहां बैठा हुआ है
02:30constituency में जहां भी पोल हो रहा है ERO तेह कर सकता है और उसको access मिलना चाहिए
02:37इस software का कि किसको delete करना है और किसको add करना है
02:43अब हुआ क्या कि यह सारा system centralized हो गया मतलब कि यह election commission के हाथ में आ गया
02:52ERO को access दिया ही नहीं गया और इसमें दोनों election commissioners ने विरोद किया
02:58संदू साब ने और जोशी साब ने कि आप क्या कर रहे हैं और एक उधारन गोआ का सामने आ
03:04गया कि 27 ऐसे लोग थे
03:06जो ERO ने कहा कि साब इनको upload कीजिए तो सही वोटर हैं upload नहीं होने दिया
03:13तो पहली बात तो यह कि election commission ने सारा system centralized कर लिया
03:19कानून के खिलाफ था election commission के procedure के खिलाफ था
03:25और इसका मतलब यह हुआ कि जो IT seller जिसमें कोई भी अधिकारी बैठा हुआ है गनाश गनेश कुमार के
03:32के आधीन वो तेह करेगा कि कौन डिलीट होगा और कौन एड होगा
03:40यह हो रहा है election commission में पहली बात तो यह दूसरी बात सारे फैसले बाय मजॉरिटी होने चाहिए
03:49और अगर दो election commission ने विरोध किया है इस बात का कि आप ऐसा नहीं करना आपको करना चाहिए
03:55तो उसको नजर अंदाज किया गया और यह मामले election commission के सामने आई ही नहीं
04:03दूसरी बात यह तीसरी बात election commission ने यह भी कहा है कि representation people's act के अंतरगत आप यह
04:10जो special intensive revision है यह exceptional cases में कर सकते हो यह भी बात सामने आई इस पे भी
04:18ग्यानेश कुमार ने इसको नजर अंदाज कर दिया क्योंकि उधारन एक ही पहले हुआ है कि
04:23एक बार ही representation people act के अंतरगत एक special revision हुआ है वो भी एक ही छोटे से इलाखे
04:30में एक constituency के लेकिन अब सारे देश में हो रहा है और सारे देश में इस लिए हो रहा
04:36है कि चुनाव का अपने हाथ में कर दो जिसको वोट देने का हक दो वो अपने हाथ में रखो
04:41जिसका नाम delete करना है
04:43वो अपने हाथ में रखो जिसको add करना है वो अपने हाथ में रखो तीसरी बात है कि ऐसा होना
04:52ही नहीं चाहिए थे चौथी बात जो और भी गंबीर बात है यह जो form six है
05:00representation people of act के अंतरगर यह new voter को भरना पड़ता है और new voter में उसको कहना पड़ता
05:07है कि मैंने कभी पहले वोट नहीं किया ठीक है अब जिनका नाम जिनके parents और grand parents का
05:15नाम नहीं है और यह मेरा नाम अगर कट जाए तो मुझे form six बरना पड़ेगा और फिर उसमें हमें
05:22बोलना पड़ेगा कि मैंने कभी पहले वोट नहीं किया तो इसका मतलब मैं form six बरूं और जूड बोलूं कि
05:30मैंने कभी वोट नहीं किया यह election commission करवा रही है
05:35और इसमें मैं आपको बहुत interesting बात पता हूँ इस पे विरोध हुआ कि आप form six ऐसे नहीं कर
05:41सकते क्योंकि अगर form six के आपने तबादली लानियां संशोधर करना है तो वो सरकार के द्वारा एक amendment होगी
05:48act में और उस rule में और तब ही वो अपारित होगा और उसके इलावा आप �
05:55इस तरह पर नहीं कर सकते गैने इशकुमार की गुरसी पर बैटके यह नहीं कर सकते उसका दोनों कमिशनर्स ने
06:02विरोध किया उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई फिर इन्होंने किया किया कि एक अफसर जो था जो अपना काम सही
06:10तरीके से कर रहा था वो वो पोर्टल देख �
06:13रहा था इसी आई नेट का हां वो चुट्टी पर चले गया इन्होंने एक और शक्स उसके बिठा दिया एक
06:22शक्स बिठा दिया और उसको उस रिस्पांसिबिलिटी से वरकास्त कर दिया इस पर भी विरोध हुआ और इस पर दोनों
06:30कमिशनर्स ने कैविनेट सेक्टरी को लि
06:43बताना चाहता हूं कि चालीस पोर्टल और एप्स एक एक सेंट्रलाइज कर लिए गए चालीस पोर्टल और एप्स मतलब कि
06:58सारा अक्तियार कमिशन को था फिर और ये सीमा खना जी ने डिरेक्टर जेनरल आईटी कमिशन की हैं उनके सब
07:08कुछ आधीन हुआ और
07:11दूसरी बात ये है कि तीस स्टेट्स में तेरा करोड को नाम निका दे गए तेरा करोड और अगर पूरा
07:21ये पूरी प्रक्रिया आगे बढ़े तो तीस करोड नाम कटे जाएंगे
07:29ये बाते हम सुप्रीम कोट को बता चके हैं हम कह रहे हैं सुप्रीम कोट और रोज कहते हैं जब
07:36जब भी मामला आता है सुप्रीम कोट हमारा सुनता भी नहीं है
07:41हम कहते हैं कि आप इन पर विश्वास मत करो आप जमीनी हकीकत देखो ये का बात कल भी हुई
07:48सुप्रीम कोट है प्रशान भूशन ने ये बात कही कि आप फॉर्म सिक्स को क्यूं कहलाते हो वोटर से कि
07:56वो फॉर्म सिक्स भरे और ये जूट बोले कि वो पहली बार वोट कर �
08:01और ये जो उन्होंने प्राव्दान रखा फॉर्म ने कि आपके पेरेंट्स और ग्रैंट पेरत्स में वोटर इस्ट में होना चाहिए
08:08यह तो कभी था ही नहीं
08:12इसको उन्होंने गैनिश कुमार जी ने इसमें फॉर्म सिक्स में डाल दिया जिसका विरोध हुआ
08:19जोशी साब और संधी साब ने कहा आप ऐसा नहीं कर सकते यह नहीं डाल सकते
08:22तो वो जो निया वोटर होगा वो कहां से लाएगा कि उसके माता पिता कौन सी कहां उन्होंने वोट किया
08:29था ग्रैंड पेरेंट्स का उसकी कहां से एज लाएगा उनकी कहीं लोगों को नहीं मालूं और नहीं नहीं यह कहते
08:37हैं कि आप नहीं नहीं हमें सर्टिफिकेट्स दो �
08:40चार्ट डॉक्यूमेंट्स दो असलियत तो यह है कि नोटिस भेजते ही नहीं यह बात भी मैंने कई बार रखी कई
08:50बार आपके द्वारा मैंने प्रेस कॉंफरेंस इसी के बारे में कई
08:54कि नोटिस मिलते ही नहीं है अगर एक मारत हो चार पांट स्टोरी की उसमें लोग रहते हो तो क्या
09:00बिये लो वो विचारा हर क्वार्टर में जाएगा देखने के लिए कि आपको नोटिस मिला है के नहीं निश्टित रूप
09:07से नहीं जाएगा
09:11कौपरेटिव सुसाइटी हो तो फिर भी वो सुसाइटी को नोटिस बेज सकता है लेकिन अगर कोई कौपरेटिव लोग ऐसे ऐसे
09:18अमारतों पर रहते हैं ऐसे ऐसे ब्लॉक्स में रहते हैं उनको पता ही नहीं लगता उनको नोटिस ही नहीं मिलेगा
09:24तो वो कैसे अपना सि�
09:25करेंगे कि मैं तो वोटर हूँ और तीन बार ऐसे होगा तो वोटर लिसे नाम कटा जाएगा और यह तो
09:32अधारण अब आप सामने आ गया ना यह तो सुप्रीम कोट के सामने वो जो वो जो बंगाल का अधारण
09:39है वो तो सामने आ गया
09:44अब बताईए मैं आपको यह जो चौदा नोट जो हुए पहले अक्तूबर अठाइस दोजार पच्चिस में आपको मालूम है यह
09:52सारी प्रक्या शुरू जून में हुई
09:55फिर उसके बाद एप्रिल सोला दोजार शब्विस में इन्होंने नोट दिया
10:00कि यह जो और हुए है अठाइस अक्तोबर को दो बो और बिना अप्रूबल किया है कमिश्ण के बिना अप्रूबल
10:1016 एप्रिल दोजार चब्विस तो चब्विस को कि यह पता चल गया इन लोगों को कि भाया यह जो आईटी
10:16मॉडिल्स और पोर्टल्स हैं मीडिया से पता चला उनको
10:20कि इनके कबजे में हैं 16 एप्रिल संदू साब ने कहा कि साब यह सब हो रहा है विदाउट आर
10:27अप्रूबल लिक्ट रूप में
10:32पिर जोशी साब ने एप्रिल सोना उसी दिन कहा कि कोई अजेंडा ही नहीं है कि कमिशन के सामने कोई
10:42जेंडा
10:52कर रहा है यही नतीजा हुआ ना आगे पड़ो सोला एप्रिल को जोसी साब ने कहा कि यह जो लोग
10:59फॉरन ट्रिप पे भी जा रहे हैं यह भी हमारे अप्रूल के विना जा रहे हैं एप्रिल
11:04को कहा कि को कोई कैस्यल्क किम्मीची यह इस्फ नेतस है कर दिया मेz सोला को फॉर्म चेंज से चेंज
11:17हो गया मैंज सोला कर दोजार पच्चीस की बाते हैं 26 की बात्त धा हूं
11:29कि फिर उन्होंने वान किया जोशी साब ने कि एलेक्टरल रोल डेटाबेस इस बिंग सेंट्रलाइज नीज और इंदास कर दिया
11:39फिर जुलाइ उनतीस को जोशी जी ने कैमिने सेक्टी को लिखा
11:44अच्छा संदू साब ने बात भी इंडोर्स की जोशी सी की जोशी जी की जो में उननतीस की मैंने बात
11:49रखी फिर जुलाइ उननतीस को कैमिने सेक्टी को लिखा गया कि ये डिस्टिबुशन वर्क हो रहा है विदाउट नॉलिज इदे
11:56कमिशन को मालूम है नहीं खुद गयान
12:12इसको मरजी कर रहा है जुलाइ 30 को जोशी एंड संदू स्ट्राइब डाउन न्यू एलोकेशन और निया एलोकेशन और रुवा
12:19उसको स्ट्राइब डाउन कर दिया 12 अगस्त संदू साब ने लिखा कि बही ये जो कौन कर रहा है कि
12:26अपील फाइल करो आपको मालूम है कि वे
12:41कर रही होगी ना कौन अप्रूव कर रहा है जैनिश कमार जी मतलब के यह और वोट कारना चाहते है
12:49एक तो कार्ट वेते हैं फिर और वोट कारना चाहते हैं तिर ऑगस्त 13 फॉर्म छे चेंज हुआ उन्होंने का
12:56कि अनौतराइज संदू साब ने का अनौतराइज और इलीग
13:11से तो बदलाव कैसे लाएगा कैसे कहेगा कि इस वोटर को हग है वोट करने का और इसका इसका नाम
13:18डिलीट नहीं होना चाहिए तो जिसके जिसका वोटर का नाम काटना है वो यहां से होगा निर्वाचन सदन से होगा
13:29वो एलेक्षन कमिशन से होगा जिसका एड करना है वो भी एलेक्षन कमिशन से होगा अस्रियत तो यह भवाइसब के
13:38इनके कॉर्परेटर बियर लों के साथ बैठ से हैं तर् enorme करते हैं कि इस गलीमें किसका नाम कथे
13:46किसको notice जाए
13:47और इस गली में कोई notice नहीं जाए
13:50किसको कोई को notice नहीं जाए
13:52वो विचारा एक तो
13:54teacher है वो क्या करेगा
13:55वो दे टे करता है
13:57नाम काटे जाते हैं
14:00लाकों की इताद में लोगों को पता नहीं लगता
14:02लोग appeal नहीं पर सकते
14:03जो बंचित लोग है गरीब लोग है
14:06वो कहां से appeal करेंगे
14:07कहां से documents लाएंगे
14:10आप इसकी जो
14:11इसकी जो seriousness है सोचिए
14:15यह देश अगर
14:16ऐसे ही चलता रहा
14:17तो फिर चुनाव का फाइदा क्या है
14:21होना तो
14:22यह चाहिए कि ग्यानोश कुमार
14:24को अभी suspend करना चाहिए
14:27अभी
14:28suspend करना चाहिए
14:31सारी
14:32यह election commission की जो भी
14:33प्रक्रिया है इस पे रोक
14:35लगने चाहिए अभी
14:37इसी वक्त
14:38जो पुराने चुनाव है
14:41उनको रद करना चाहिए
14:45अगर इसे ही चुनाव हुए है
14:48चाहे वो बिहार में हो
14:49चाहे वो पच्चिम बंगाल में हो
14:53चाहे बाकी जगा हो
14:56रद करना चाहिए
15:00और साथ साथ में
15:01क्योंकि यह तो oath of office लेते नहीं है
15:03यह भी अभी गंबीर बात है
15:04कोई election commissioner
15:06oath of office नहीं लेता
15:08कि I am
15:10that I take an oath of office
15:11to protect the constitution of India
15:13कोई नहीं लेता
15:15तो इसका मतलब सुनवाई कहा है
15:17इनके खिलाफ अगर होगी तो
15:21सरकार तो सुने के नहीं
15:22और एक और गंबीर बात
15:24यह ग्याने शकुमाजी अकेले तो नहीं कर रहे होंगे
15:28किसी के आदेश पर कर रहे होंगे
15:32इसकी investigation का होनी चाहिए
15:34कि कौन आदेश दे रहा है
15:36और जो आदेश दे रहा है वो देश द्रोही है
15:39असली में वो देश द्रोही है
15:42इसमें कोई सरकार के लोग वाकिफ हैं
15:47और यह जो धान्दे बाजी जमीन पर हो रही है
15:50आपको आपको सभी को ग्यान है
15:52कि सबी सरकार में जो बैठे हुए हैं उनको मालू है
15:55कि ये धानले-बाजी हो रही है
15:58लेकि नजरबाज हर रहा है
16:00क्यों कर रही है? क्युंकि
16:01मैं समझता हूँ उनके आदेश से हो रहा है
16:05तो उनकी भी
16:06ذिमिदारी होनी चाहिए ह grease
16:07accountability होनी चाहिए
16:10और अब तो साफ जाहर हो गया है
16:13साफ जाहर हो गया है
16:14के पस्च्चम बंगात में
16:16जो�데लीट हुए है
16:1891 प्रतिशत गलत जिलीट हुए
16:22तो ये कोई coincidence तो नहीं हो सकता
16:26अगर 90 प्रतिशत गलत तरीके से
16:29डिलीट हुआ है
16:29तो फिर किस किस अ महचना हुआ है
16:34मुंता बैने जी ठीक कहती थी और जिससरा से वोटिंग अकाउंटिंग काउंटिंग हुई वो एक अलग बात है उसके बारे
16:40तो हम नहीं जाएंगे वो एक अलग बात है और ये
16:48जऑ सब्डिविजनल मैजिस्ट्रेट उसको कोई रख नहीं ंकि एक्सेस का वो वोटर इस के एड करने
17:14इस पुपता करना पड़ेगा तो ऐसे कही चीज़े हैं लेकिन मोटी मोटी बाते हैं आपको बात पता दी मैंने और
17:19हम आप चाहेंगे कि रोक लगाई जाए सुप्रीम कोट इसका संग्यान करे किस तरीके से निया एलेक्शन कराना है इसको
17:34सस्पेंट किया जाए गैनेश कुम
17:44सुप मोटी कोट के गवारा एफाया होना चाहिए कि कौन कौन इसके पीछे थे किस किस ने ये काम करवाया
17:52गनेश कुमार के और उसकी फिर फाइनल रिपोर्ट फाइल होनी चाहिए क्योंकि ये संविदान के खिलाफ है जो सपना हमारे
18:02दिखाया था जिनोंने हमें अजादी
18:07दिलाई उन सपनों के विपरीत है जो एलेक्शन केमिशन का का रिस्पॉंसिबिलिटी था संविधान के अंतरगत उसको ग्यानाश कमार जी
18:19ने उतकी धजियां उड़ाई हैं और अगर अगर भी सुप्रेम कोट अभी भी इस पे लोक नहीं लगाती है इसका
18:29संग्यान नहीं
18:30करती तो मैं तो राजनेतिक दलों से आगरे करूँगा कि आप पीस्फुली सड़कों पे उतरों बहुत बहुत धन्यवाद है

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