00:00आज ECI के उपर भी सवाल उट गया है, घ्याने जी के उपर भी सवाल उट गया है, आप थोड़ा
00:05ये समझाइए, गवर्मेंट के साथ आपने काम किया है, are all these institutions, जिनके बारे में हम बच्पन से सुनते
00:12आए, RBI के बारे में, election commission के बारे में, गवर्मेंट में आपने काम किया है
00:17आपको लगता है, आर्दे compromise, अब compromise हो चुके है कि ने, reality क्या है?
00:23देखे, 2019 के बाद, ये दोर शुरूआ देश में, जो हमारे सारे independent institutions हैं, चाए election commission of India
00:35हो, चाए CAG हो, चाए RBI वगरा वगरा, इन सभी
00:43institutions को सरकार में कोशिश की, कि वो उनकी विचारधारा के हो, उनके तरह से चलें, और जो सरकार की
00:54नीती है, preference है, उसके इसाब से काम करें, और वो उनके प्रति लॉयल रहें, उनके विचारों के प्रति लॉयल
01:05रहें, उनके जिंडा के प्रति लॉयल रहें, और अगर नहीं है
01:09तो फिर ऐसे लोगों को जो इंडिपेनेंट हैं जो अपना दिमाग इस्तिमाल करना चाहते हैं उनके लिए सरकार दीरे दीरे
01:18जगा खताम हो गई और जैसा कि ऐसी इस्तितियों में होता है आप पिछले पांचे साल में ऐसे लोग आ
01:28गए हैं सिस्टम में जो जादा तर सरकार क
01:31करने के तयार हैं और सरकार के हिसाब से लेकिन जब उसमें भी आती हो जाती है बहुत जादा सुड़ो
01:43दवाब बनने लग जाता है जैसा कि अभी इस केस में इलेक्शन कमिशन के केस में हो रहा है तो
01:49अपनी जान बचाने के लिए आफसर जो हैं वह एक कोशिश करते हैं कि �
01:55ऐसा नहों कि कल हम फज जाएं जादा तो वह कुछ लिखाने का शुरू कर देते हैं अधरवाज तो इस्तिती
02:02काफी खराब है हमारे देश के अब ये सरकार के साथ जो इंस्टिउशन से वह तो ही है उसके अलावा
02:10कोर्ट्स हैं ये हैं इन सब में भी ऐसी काफी खराब सी इ
02:17कि आज आप ये विस्वास नहीं कर सकते हैं कि आपके देश के जो institutions हैं वो जनता के लिए
02:24काम करते हैं लोगों के लिए काम करते हैं समयधान के लिए काम करते हैं या केवल राजनीतिक निताओं के
02:32लिए काम करते हैं
02:32आपका 34 साल से ज्यादा का करियर रहा, आपने सरकार के साथ इतनी क्लोजली काम किया, हमें थोड़े अंदर की
02:39चीज़े बताइए, जब इस तरह के डिसिजन्स ले जाते हैं कि नोट बंदी हो गए एक रात के अंदर, और
02:45फिर वो 2000 का नोट वापस भी ले लिया गया, आज किस
02:48को देखने के लिए भी नहीं मिलेगा, बहुत कुछ होता है, तो all these dramatic decisions, क्या जो bureaucrats हैं,
02:57वो इसी हिसाब से काम करते हैं, काम चलता कैसे है, 2016 is just an example, but हम यह समझना
03:04चाहते हैं, कि यह जो bureaucracy है, वो चलती कैसे है, मनमोहन जी के सरकार में कैसे चली, अभी कैसे
03:10चली, क्या बदलाव
03:11है, और इस तरह के decisions ले कैसे लिए जाते हैं, जिससे हमें इतना लुकसान हो या फाइदा हो, तो
03:18देखिए, यह बहुत बड़ा subject है, मैंने तो दो कितावे लिखी हैं, पता नहीं, आपके ध्यान में अभी आई हैं
03:25नहीं आई हैं, एक किताब को नाम है, No Minister, ठीक है, और दू
03:41मैंने डील किये, उसमें कैसे decision हुए, किस तरह से public interest को watch किया गया, नहीं किया गया, वो
03:49मैंने सब लिख लिए हैं, तो इतना मेरे लिए संभव नीतनी छोटी सी podcast में, कि उसके बारे में मैं
03:56ज़्यादा बताऊं, आपको सलह मेरी यह है, कि अगर आप interest हैं, इस विखे के बार
04:09अगर फिर आप कोई उसमें निकले वे सवाल पूछेंगे, तो मैं आपको जरूर समय दूँगा, और उसमें आपको explain करूँगा,
04:18बड़ इसमें इन किताबों में आपको पूरी जानकरी मिल जाएगी, कैसे सरकार काम करती हैं, लेकिन एक बात बस मैं
04:25आज अभी कहते देना �
04:26चाहता हूं कि अपनी 36 साल की सेवा में मैंने इस किसम का महौल नहीं देखा, जो अभी इस समय
04:35देश में चल रहा है, जिस तरह से सिविल सर्वेंट्स के साथ सेवाओं पर दबाब बनाया जा रहा है, इमर्जिंसी
04:42के समय में सरकार में नहीं आया था, ये 1975 की बात है, उस समय
04:48तो मैं पढ़ता था, लेकिन उसके बाद से और 2019 तक जो 83 से 36 साल मैंने सेवा की, इस
04:56किसम की चीज़ बहुत दवाब बने आपको, उस किताब में पढ़ने से मिलेगा, कई ऐसे मौके आए जिसमें पॉलिटीशन्स के
05:04साथ, मिनिस्टर्स के साथ जगडा हुआ, और अन्त में
05:07मैंने 2019 में तो सरकार से voluntary retirement लिया था, क्योंकि सरकार के साथ काम करने की, करना मुझे उचित
05:15नहीं लगा, तो इस्तिती आज बन गई है, लेकिन वो moment क्या था कि आपने VRS का सोच लिया, इतनी
05:22अच्छी नोकरी आपने छोड़ दी, वो moment क्या था, 2019 का, लेकि कोई भी moment पे decision नह
05:31होना चाहिए, लेकिन triggering point अगर आप बता सकें, triggering point तो कई सारी चीजें होती है, मैंने वो पूरी
05:38वाक्या भी इसमें लिख दिया है, कुल मिला के, 2019 में निर्मला सितारमन, वित्तमंत्री बनती है, पच्पन दिन मैं उनके
05:48साथ काम करता हूं, वो मुझे पसंद नहीं करती है,
05:52वो मेरा तबादला चाहती है, कई सारे ऐसे issues बनने लगे, budget को लेके, RBI के surplus को के मामले
06:02को, committee को लेके, और फिर एक स्थिती में कि सरकारी जो note sheet है, उसको उनका बदलवाना चाहता है,
06:11और ऐसा लिखना चाहता है, जो की उचित नहीं हैं, और जो हमारे honest views expressed किये गए थे, उनक
06:22जब मौके ऐसे बने, तो फिर मैंने तै किया कि इस सरकार के साथ काम करने में कोई फाइदा नहीं
06:29है, और अपनी रवानगी होगी, लेकिन it must be tough, because you're working for the country, और suddenly such situations
06:39happen, अब चलिए आपने बहुत ज्यादा काम नहीं किया नहीं है, मेरे लिए ये बहुत ज्यादा
06:44मुश्किल decision नहीं था, तो मेरा दिमाग clear है, कि अगर सेवा में रहते हैं, और public service कर सकते
06:52हैं, और ऐसे पहुत सी निर्ड़े लेने में मदद कर सकते हैं, जो देश के हित में हैं, तो सेवा
06:58में रहना चाहिए, सेवा में मैं अपनी रोजी-रोजगारी के लिए नहीं काम करता �
07:02और ना मुझे कोई ऐसा interest था, कि मुझे कोई power exercise करनी है, या कोई ऐसा बड़ा आदमी बनके
07:09दिखना है, वो सब चीज़े मुझे नहीं चाहिए थी, तो इसलिए जब मुझे लगा कि ये अब काम नहीं हो
07:14पा रहा इस सरकार के साथ, तो भाई रवाना हूँ, आराम से.
07:19अच्छा, आपके उस famous interview के बाद, आपको social media पे या personally, लोग बोलें anti-national, मोधी जी के
07:29खिलाब बस एक नहीं रण नहीं ती, और जैसे अगर आपका interview सुनेंगे, तो बोलें कि अच्छा, इनको तो निर्मला
07:35सितारवन जी पसंद नहीं करती थी, तो अब ये खुननस निकाल र
08:15या कि नहीं बोलागे आपको अभी तक?
08:17देखे हमारी विवस्ता में जैसे बहुत सारे लोग हैं, वो अपनी-अपनी समझ के हिसाफ से और अपने-पने दिमाग
08:26के हिसाफ से बाते करते हैं, मैं ऐसे लोगों को एक टर्म इस्तिमाल करता हूँ, उनको मैं डॉमपीज कहता हूँ,
08:34वो डॉमपीज में डॉक्स जो बा
08:47करें, उनसे मुझे कोई फरक नहीं पड़ता, तो कौन anti-national कहरा है, उस पे जादा important है, या कौन
08:55और कौन नहीं कहरा है, उस पर important, तो मुझे इन चीज़ों से कोई परशानी नहीं होते हैं, आप खूब
09:02गई है, आरांज से गई है, square root लगा लिजे, जो भी मर्जी होआ, इतन
09:16largest economy हो गया है, एक सपना देखा जारते कि विल भी the third largest economy, बट फिर भी भारत
09:23का जो total GDP, it is much lower, 10 times lower than the first one, तो possibility क्या है, और
09:30साथ में थोड़ा सा और जोड़ देता हूं, 2047 विक्सित भारत का सपना, उसके बारे में थोड़ा समझाईए कि ये
09:37सपना हकीकत बनेगा, कि it is just a dream for 20 साल
09:42जोड़ा जाए कमुद्धी आप भाविश्य के बारे में सपने देखें, तो सपने और विजन में फरक होता है, dream और
09:53विजन में फरक होता है, dream को आप vision में भी बदल सकते हैं, और या आप उसको dream को
10:03शेक्चिलनी के ख़थ में भी बदल सकते हैं, तो दोनों में बहुत परि�
10:08अगर आप के पास माद्धा है, समझ है, ताकत है, तो आप विजन बना के उसको हासिल करने का प्रयास
10:18करिए, शेख चिल्ली की तरह से केवल ख्वाब मत देखिए, तो आपका जो सवाल के छटी, हम छटी से छटी
10:30पर आ गए हैं आज के दिए, कभी भी हम चौथे पर तो पहु
10:37किया गया था नीती आयोग के द्वारा दो एक साल पहले, उस समय हम नीती आयोग के जैसी संस्ता उसमय
10:44मिस्रीड करती थी, जो एक साल आगे पर एंटिसिपेड़ड आएमेफ में आखड़ा दिया था, जो उस समय की अखिकत नहीं
10:53था, उसको लेके, वो यह कहने लगे थे कि
10:55हम जपैन से आगे निकल गए, वो साल जपैन से हम आगे निकले नहीं, और अब तो इस्तिती यह हो
11:02गई कि हम पांचवे से छटे पर आगे, जैसा आपने भी खुद भी कहा, पांचवा, छटा, चौथा, तीसरा, यह बहुत,
11:11बहुत ज़ादा माइने नहीं रखते, जैसे आ
11:25करीब चार्ट लेंसे नीचे होके, जबकि हमारी जन संख्या और चीन की जन संख्या बराबर है, अमेरिका की जो एकॉनमी,
11:34जो पर कैपिटा इंकम है, वो हम से करीब करीब 15-17 गुना जादा है, तो ऐसे में कंपैरजन करके,
11:43और अगर हम तीन नंबर में पहुंच पी जाए
11:48जेपैन, इंग्लेंड और जर्मनी, वो बड़े छोटे देश हैं, उनकी पॉपुलेशन बहुत कम हैं, तो हमारे से एक बड़ा दस
11:56भी पॉपुलेशन नहीं है इनकी, एक की तो एक बड़ा 20 के आसपास है, 15 के आसपास है, तो ऐसे
12:03देशों से जो चोटे छोटे छोटे दे
12:05हैं, उनसे अगर हम यह अपने आपको 30 मार्खा समझें, कि हम उनसे आगे निकल के टोटल GDP में, तो
12:13हमें इस बात कोई भी ऐसा सपना भी नहीं देखना चाहिए, यह तो मुगालता है, सपना नहीं है, पर कैपिटा
12:21इंकम में हम 142 में नंबर से 145 में नंबर पे आतें दुनि
12:35जिने की इच्छा है, वो नेशनल GDP से पूरी नहीं होती, वो पूरी होती है, पर कैपिटा जीडिपी से, तो
12:45इन चीज़ा है में, लेकिन आपने जब पर कैपिटा की बात की, फिर मुझे डिस्पैरिटी की या था, यह कि
12:53भारत में डिस्पैरिटी कितनी बढ़ गई है, अम
12:59पहले हम एक बात करते थे कि भारत ना पाकिस्तान की तरह बन जाएगा, कि there are only riches or
13:04the poor, तो अभी थोड़ा सा समझाईए, जो हमारा मध्यम वर्ग है, उसका क्या हाल है, जो गरीब है, उनका
13:11क्या हाल है, तो अगले पाट साल में आप भारत को कैसे देखते हैं, भारत के लोगो
13:27इंकम हैं दुनिया में, और वो भी ऐसी अनीकुली डिस्ट्रिब्यूटेड है, जिसमें बहुत जादा लोग रिच्छे हैं, थोड़े से बहुत
13:35जादा जादा रिच्छे हैं, बहुत सारे लोगें जादा जर गरीब हैं, जिनके पास एक दिन में खाने का अनाज का
13:43अनाज
13:56के हम पाकिस्तान की तरह से हो जा रहे हैं, यह बात सही है, एक्शली हम पाकिस्तान की दिशा में
14:03जा रहे हैं, दोनों तरह से, एकनॉमिक ली भी जहां डिस्ट्रिब्यूशन और उफ इंकम उस तरह का है, और दूसरा
14:10हम रिलीजिस व्यूज़ में भी, जितना पाकिस्तान 20
14:13साल तीस साल पहले कटरपंथी बनके बरबादी की रास्ते पे निकला हम उसी तरह से कटरपंथी बनके बरबादी के रास्ते
14:21पे जा रहे हैं दूसरा देश उसका जो दूसरा पाकिस्तान का हिस्सा बंगलादेश वो दूसरी तरह बूब करा बंगलादेश हमसे
14:29बहुत पीछे
14:29हुआ गरता था पर-capita income में और income distribution में आज हमसे आगे है कहीं पिछले 10 साल से
14:36पर-capita income में आगे है और वहां पे जो distribution है वो income का काफी कम आनिकुल है इसके
14:43मुकाबले तो हमें इन issues पे really काम करना चाहिए पाकिस्तान की दिशा में हमें नहीं जाना चाहिए
14:52जी सर थोड़ा सा अब दर्शकों को यह समझाए कि हम हमारी अभी एक तरीके में ओकात वर्ड यूज नहीं
15:02करना चाहता था लेकिन हमारी ओकात क्या है अभी इस दुनिया के सामने और हम दर्शकों को यह कैसे समझना
15:10चाहिए कि आजकर कोई भी data आता है उस पर विवाद हो जा
15:15जाता है और जो मेन मुद्य वो तो सब भूली जाते यह तो हमने देख लिया दर्शकों को थोड़ा सा
15:21समझाए रियालिटी ओफ इंडिया इंडिया इंटरम्स आप से हम मैं डेटा नहीं बता पाऊंगा आप डेटा जरूर अच्छे से समझा
15:30सकते हैं कि लोगों को समझ में
15:32चाहिए कि भाई सच का है and where they should refer if they really want good information, right information अगर
15:38उनको चाहिए तो मीडिया से तो उनका मतलब विश्वास उच्छुका है और टीवी से भी उच्छुका है तो कहां उनको
15:45असली information खोजनी चाहिए अगर सच में उनको भारत की सिती जाननी है दो सवाल है इसमें
15:51एक जो चीज बहुत ज़्यादा जरूरी है उदेश के नागरिकों के लिए यह बहुत जरूरी है कि वो अपने दिमाग
16:00में questioning attitude अपना है, curiosity के बाद में question आता है, पहले कोई भी data दिया जाए या कोई
16:11भी claim किया जाए उसको face value पे नहीं लेना चाहिए
16:18हमें कोई भी नागरिकों नीचे से छोड़े से छोटी income हला हो या छोड़े से छोड़े पद पे हो या
16:25student है कोई भी हो, उसको यह समझना चाहिए कि यह real है या इसमें कोई जोल है, कोई इसमें
16:33बनावटी बात है, तो अगर इस attitude से आप शुरुवात करते हैं, तो फिर आप �
16:40कि जो data आपके सामने दिया गया है, उसी data में असलियत निकलाती है, कोई ऐसे data sets नहीं है
16:49देश में, कि यह तो सही data set है और यह गलट data set है, कुछ चीजों को छोड़के, जातर
16:57चीजों में जो data दिया जाता है, अब जैसे मैं आपको उधारन बताओ, GDP के बारे में तो काफी च
17:06data आया, कि हमारी 14% increase हो गई अगस्त के महने में, और फिर यह हमारी net GST increase
17:18जो है, करी 9% हो गई, मैंने उस पे लिखा और बताया, कि आप बैमानी क्या कर रहे हैं,
17:24बट बैमानी क्या कर रहे हैं, कि पिछले साल हमारा जो GST CS की आमदनी आती थी, आपने पिछले साल
17:31की base से उसको
17:32हडा दिया, और उसके बाद दावा कर रहे हैं, कि आपकी increase जादा हो गई, वो revenue थी, उस revenue
17:38को हडा ने सकते हैं, लेकिन इसको देखने के लिए बहुत ज़्यादा दिमाग नहीं चाहिए, थोड़ी सी inquisitiveness चाहिए, कि
17:45पिछले साल की जो GST बताये गई थी, वो सही बताये ग�
18:01भागे, उसको चेक करें, तो उसको पता लग जाएगा, मैं आपको और 50-100 धारन दे सकता हूँ, लेकिन समय
18:07की कमी के कारण से, मैं ये इस बात पर नहीं जाना चाहता अभी, कि कौन सा data reliable, कोई
18:14भी data reliable नहीं, एक बात तो सरकार में है, कि आप वो छुपाएंगे तो भी, उसक
18:22हकीकत आप जान पाएंगे, आपको जानने में इंट्रेस होना चाहिए, तो आप पहुंच पाएंगे सही जगात, लेकिन भारत का इंट्रेस
18:31थोड़ा खतम हो गया, reality और सचाही जानने में, उनका जो focus कुछ और ही है, एक चीज में आपको
18:38कभी skeptic नहीं बनना चाहिए, या �
18:43उमीद नहीं छोड़ने चाहिए, कि यहाँ दो सभी गढ़बढ है, इसलिए कुछ नहीं है, यह एटिट्यूड बहुत गलत है, विजय
18:52सर्दान साब का एक इंटर्विव ले रहा था, दो घंटे का हमने podcast किया, at the end मैंने पूछा, वोट
19:00किसको दीजेगा, तोनों ने बोला
19:13तो मोदी ली कोई दूंगा, यह इस सवाल पर नहीं जाना चाहता, कि लोग निरने करें कि किसको वोट दें,
19:23यह उनका वेक्तिकत निरने, और उनको हर एक आदमी को entitled है, कि वो किसको वोट देना चाहता है, किसको
19:31नहीं वोट देना चाहता है, यह मेरी नजर में जो contestants हैं, उ
19:43किसी शूपे मुझे नहीं जाना चाहिए, मैं केवल इसमें इंट्रेस्ट, इतना इस चीज में इंट्रेस्ट हो सकता हूं, कि किसी
19:50पर्टिक्लर मैटर पे सरकार का रुख सही है, नहीं है, उसकी हम रियल्टी में जा सकते हैं, आप वोट कि
19:58इसको पने नदें, वो आपकी ज
20:13बहुत सारे, वो उसी शूपे जाने से कोई फैदा नहीं, चली, बस मैं आखरी सवाल मुझे पता है, हमें 20
20:20मिर्ट मिले दें और मैं उसको स्ट्रेच नहीं करूंगा, आखरी सवाल ज़र, अगले 5 साल में भारत को क्या एक्सपेक
20:27करना चाहिए, सरकार की बात नहीं करते हैं
20:31ब्यूरोक्रासी तो चलाती है, चली, प्रेशिर्स कुछ भी हो सकते हैं, बट आपने जैसे बोला कि we should not be
20:37skeptical, तो अगले 5 साल आप कैसे देखते हैं भारत के?
20:43मुश्किलात से नजर आ रही हैं इस इस्तिती में तो क्योंकि जो सरकार का रुख अभी शुरू में हमने डिस्कस
20:50किया, institutions को capture कर लेना, compromise कर देना, उनको, जब आपकी institutions आपको सही बात बताने के लिए हैं,
20:59और सही दिशा में ले जाने के लिए काम नहीं करते हैं, छुपाने
21:12देश में जिस तरह से election management से, पूरा vote, सरकारे बदलना, जिस तरह से हमने use किया, अपनी agencies
21:20को, इन सब चीजों, तो एक ऐसा महाल बना हुआ है देश में, जिसमें सब लोग cross purposes पे काम
21:28कर रहे हैं, बजा है, देश को एक साथ आगे ले जाने के लिए, तो थोड़ी सी मुश्किल
21:34आगे चार-पांस साल तक के लिए, मैं एक किताब लिखता हूँ, पांस साल में रिव्यू करता हूँ, मैंने भी
21:42आपने ड्रीम शब्स इस्तिमाल किया था, तो पहली किताब मैंने 2019 के reference से लिखा था, दी डॉलर टें ट्रिलियन
21:49ड्रीम, कि हम अपनी हमारी रीम है कि हम 10 ट्र
21:53डॉलर की एकॉनमी को बनाएं, जैंगे दोजार चोबिच में पांस साल बाद जब मैंने उसको पहला रिव्यू किया, तो उसका
21:59टाइटल मैंने बदल दिया, तो उसका टाइटल किया, दी डॉलर टें ट्रियन ड्रीम डेंटिड, उसमें डेंट लग रहा है, लग
22:07गया है, �
22:09अब 2029 मैं फिर लुखूं लुखूंगा इसी सब्जेक्ट पे किताब, अभी इसे सोचना पड़ रहा है कि क्या उसका टाइटल
22:17होगा, मुश्किलात के स्थिति की तरफ जाता नजर आ रहा है, तो अभी कोई टाइटल फाइनल नहीं किया है, लेकिन
22:24ऐसा नहीं लग रहा है
22:25थोड़ा हैपी किसम का टाइटल, चलिए, I hope कि हम जब का future safe हो, and we have a happy
22:33life, और भारत में जो लोग हैं, उनका per capita income भी थोड़ा improve हो, that they can live with
22:39dignity, शुक्रियाजर अपने वक्त दिया, और हमें समझानी कोशिश की बहुत ही short conversation था, I'm sure कि दर्शक और
22:45जादा सुनना चाहेंगे, तो मै
22:49हमारा जो guest relation के लोग हैं, शुक्रियाजर जब आप से contact करें, तो हमें और वक्त दे, और हमारे
22:55काफी सारे live shows भी होते हैं, उसमें भी आप participate करें, with other people, there are very, very great
23:01people who are coming in, who are supporting governments as well, but you'll enjoy the conversation.
23:09Certainly, किसी समय और अच्छी, मैं बहुत सारे podcast करता हूँ, कोई 2 घंटे के, कोई 9 घंटे के, etc.,
23:16etc., आपके साथ भी, खुशी होगी उस तरह का कोई podcast करने के लिए, thank you very much.
23:21Thank you so much for your time, sir. I'll see you soon. See you, see you. Bye.
23:36Thank you.