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देश के प्रमुख संवैधानिक और स्वायत्त संस्थानों को लेकर इन दिनों सियासी गलियारों से लेकर आम जनता के बीच गहरी चिंता और बहस छिड़ी हुई है। विपक्ष और कई जानकारों का लगातार यह आरोप रहा है कि केंद्र सरकार देश की निष्पक्षता बनाए रखने वाली संस्थाओं जैसे चुनाव आयोग, रिजर्व बैंक, और केंद्रीय जांच एजेंसियों को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले रही है। हाल ही में पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र Garg द्वारा सामने आए खुलासों और बयानों ने इस आग में घी का काम किया है जिससे आर्थिक आंकड़ों से लेकर प्रशासनिक स्वतंत्रता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। आम नागरिकों के मन में अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या लोकतंत्र की रक्षा करने वाले ये स्वतंत्र स्तंभ अब सरकार की कठपुतली बनकर रह गए हैं। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और ज्ञानेश कुमार जैसे शीर्ष पदों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी जनता लगातार सवालिया निशान लगा रही है। इस विशेष वीडियो में हम इसी बात की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि किस प्रकार देश की सर्वोच्च संस्थाओं की स्वायत्तता को कथित तौर पर कमजोर किया जा रहा है। लोकतंत्र के इस दौर में संस्थागत नियंत्रण और तानाशाही प्रवृत्तियों के बीच पिसती आम जनता की आवाज को इस रिपोर्ट में प्रमुखता से उठाया गया है।

This comprehensive report explores the mounting concerns and widespread public debate surrounding the alleged institutional capture of India's core democratic pillars by the central government. Amidst fierce discussions on whether vital bodies like the Election Commission, Reserve Bank of India, and investigative agencies are being reduced to mere puppets, revelations from former top bureaucrats have intensified the crisis. Citizens and political analysts are questioning the transparency of high-profile appointments and the increasing centralization of power that threatens the foundational checks and balances of our democracy. We analyze how institutions meant to act independently are facing unprecedented pressure, raising alarms about the future of free and fair governance in the country. The discussion delves into the implications of administrative control, economic oversight compromises, and the fading boundaries between party governance and state machinery. Join us as we break down the hard facts, expert insights, and what this institutional overreach means for the ordinary citizens of India.

#InstitutionalCapture #ModiGovernment #IndianDemocracy #ElectionCommission #RBIControl #SubhashChandraGarg #IndianPolitics #DemocracyUnderThreat

~HT.178~VG.HM~

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00:00आज ECI के उपर भी सवाल उट गया है, घ्याने जी के उपर भी सवाल उट गया है, आप थोड़ा
00:05ये समझाइए, गवर्मेंट के साथ आपने काम किया है, are all these institutions, जिनके बारे में हम बच्पन से सुनते
00:12आए, RBI के बारे में, election commission के बारे में, गवर्मेंट में आपने काम किया है
00:17आपको लगता है, आर्दे compromise, अब compromise हो चुके है कि ने, reality क्या है?
00:23देखे, 2019 के बाद, ये दोर शुरूआ देश में, जो हमारे सारे independent institutions हैं, चाए election commission of India
00:35हो, चाए CAG हो, चाए RBI वगरा वगरा, इन सभी
00:43institutions को सरकार में कोशिश की, कि वो उनकी विचारधारा के हो, उनके तरह से चलें, और जो सरकार की
00:54नीती है, preference है, उसके इसाब से काम करें, और वो उनके प्रति लॉयल रहें, उनके विचारों के प्रति लॉयल
01:05रहें, उनके जिंडा के प्रति लॉयल रहें, और अगर नहीं है
01:09तो फिर ऐसे लोगों को जो इंडिपेनेंट हैं जो अपना दिमाग इस्तिमाल करना चाहते हैं उनके लिए सरकार दीरे दीरे
01:18जगा खताम हो गई और जैसा कि ऐसी इस्तितियों में होता है आप पिछले पांचे साल में ऐसे लोग आ
01:28गए हैं सिस्टम में जो जादा तर सरकार क
01:31करने के तयार हैं और सरकार के हिसाब से लेकिन जब उसमें भी आती हो जाती है बहुत जादा सुड़ो
01:43दवाब बनने लग जाता है जैसा कि अभी इस केस में इलेक्शन कमिशन के केस में हो रहा है तो
01:49अपनी जान बचाने के लिए आफसर जो हैं वह एक कोशिश करते हैं कि �
01:55ऐसा नहों कि कल हम फज जाएं जादा तो वह कुछ लिखाने का शुरू कर देते हैं अधरवाज तो इस्तिती
02:02काफी खराब है हमारे देश के अब ये सरकार के साथ जो इंस्टिउशन से वह तो ही है उसके अलावा
02:10कोर्ट्स हैं ये हैं इन सब में भी ऐसी काफी खराब सी इ
02:17कि आज आप ये विस्वास नहीं कर सकते हैं कि आपके देश के जो institutions हैं वो जनता के लिए
02:24काम करते हैं लोगों के लिए काम करते हैं समयधान के लिए काम करते हैं या केवल राजनीतिक निताओं के
02:32लिए काम करते हैं
02:32आपका 34 साल से ज्यादा का करियर रहा, आपने सरकार के साथ इतनी क्लोजली काम किया, हमें थोड़े अंदर की
02:39चीज़े बताइए, जब इस तरह के डिसिजन्स ले जाते हैं कि नोट बंदी हो गए एक रात के अंदर, और
02:45फिर वो 2000 का नोट वापस भी ले लिया गया, आज किस
02:48को देखने के लिए भी नहीं मिलेगा, बहुत कुछ होता है, तो all these dramatic decisions, क्या जो bureaucrats हैं,
02:57वो इसी हिसाब से काम करते हैं, काम चलता कैसे है, 2016 is just an example, but हम यह समझना
03:04चाहते हैं, कि यह जो bureaucracy है, वो चलती कैसे है, मनमोहन जी के सरकार में कैसे चली, अभी कैसे
03:10चली, क्या बदलाव
03:11है, और इस तरह के decisions ले कैसे लिए जाते हैं, जिससे हमें इतना लुकसान हो या फाइदा हो, तो
03:18देखिए, यह बहुत बड़ा subject है, मैंने तो दो कितावे लिखी हैं, पता नहीं, आपके ध्यान में अभी आई हैं
03:25नहीं आई हैं, एक किताब को नाम है, No Minister, ठीक है, और दू
03:41मैंने डील किये, उसमें कैसे decision हुए, किस तरह से public interest को watch किया गया, नहीं किया गया, वो
03:49मैंने सब लिख लिए हैं, तो इतना मेरे लिए संभव नीतनी छोटी सी podcast में, कि उसके बारे में मैं
03:56ज़्यादा बताऊं, आपको सलह मेरी यह है, कि अगर आप interest हैं, इस विखे के बार
04:09अगर फिर आप कोई उसमें निकले वे सवाल पूछेंगे, तो मैं आपको जरूर समय दूँगा, और उसमें आपको explain करूँगा,
04:18बड़ इसमें इन किताबों में आपको पूरी जानकरी मिल जाएगी, कैसे सरकार काम करती हैं, लेकिन एक बात बस मैं
04:25आज अभी कहते देना �
04:26चाहता हूं कि अपनी 36 साल की सेवा में मैंने इस किसम का महौल नहीं देखा, जो अभी इस समय
04:35देश में चल रहा है, जिस तरह से सिविल सर्वेंट्स के साथ सेवाओं पर दबाब बनाया जा रहा है, इमर्जिंसी
04:42के समय में सरकार में नहीं आया था, ये 1975 की बात है, उस समय
04:48तो मैं पढ़ता था, लेकिन उसके बाद से और 2019 तक जो 83 से 36 साल मैंने सेवा की, इस
04:56किसम की चीज़ बहुत दवाब बने आपको, उस किताब में पढ़ने से मिलेगा, कई ऐसे मौके आए जिसमें पॉलिटीशन्स के
05:04साथ, मिनिस्टर्स के साथ जगडा हुआ, और अन्त में
05:07मैंने 2019 में तो सरकार से voluntary retirement लिया था, क्योंकि सरकार के साथ काम करने की, करना मुझे उचित
05:15नहीं लगा, तो इस्तिती आज बन गई है, लेकिन वो moment क्या था कि आपने VRS का सोच लिया, इतनी
05:22अच्छी नोकरी आपने छोड़ दी, वो moment क्या था, 2019 का, लेकि कोई भी moment पे decision नह
05:31होना चाहिए, लेकिन triggering point अगर आप बता सकें, triggering point तो कई सारी चीजें होती है, मैंने वो पूरी
05:38वाक्या भी इसमें लिख दिया है, कुल मिला के, 2019 में निर्मला सितारमन, वित्तमंत्री बनती है, पच्पन दिन मैं उनके
05:48साथ काम करता हूं, वो मुझे पसंद नहीं करती है,
05:52वो मेरा तबादला चाहती है, कई सारे ऐसे issues बनने लगे, budget को लेके, RBI के surplus को के मामले
06:02को, committee को लेके, और फिर एक स्थिती में कि सरकारी जो note sheet है, उसको उनका बदलवाना चाहता है,
06:11और ऐसा लिखना चाहता है, जो की उचित नहीं हैं, और जो हमारे honest views expressed किये गए थे, उनक
06:22जब मौके ऐसे बने, तो फिर मैंने तै किया कि इस सरकार के साथ काम करने में कोई फाइदा नहीं
06:29है, और अपनी रवानगी होगी, लेकिन it must be tough, because you're working for the country, और suddenly such situations
06:39happen, अब चलिए आपने बहुत ज्यादा काम नहीं किया नहीं है, मेरे लिए ये बहुत ज्यादा
06:44मुश्किल decision नहीं था, तो मेरा दिमाग clear है, कि अगर सेवा में रहते हैं, और public service कर सकते
06:52हैं, और ऐसे पहुत सी निर्ड़े लेने में मदद कर सकते हैं, जो देश के हित में हैं, तो सेवा
06:58में रहना चाहिए, सेवा में मैं अपनी रोजी-रोजगारी के लिए नहीं काम करता �
07:02और ना मुझे कोई ऐसा interest था, कि मुझे कोई power exercise करनी है, या कोई ऐसा बड़ा आदमी बनके
07:09दिखना है, वो सब चीज़े मुझे नहीं चाहिए थी, तो इसलिए जब मुझे लगा कि ये अब काम नहीं हो
07:14पा रहा इस सरकार के साथ, तो भाई रवाना हूँ, आराम से.
07:19अच्छा, आपके उस famous interview के बाद, आपको social media पे या personally, लोग बोलें anti-national, मोधी जी के
07:29खिलाब बस एक नहीं रण नहीं ती, और जैसे अगर आपका interview सुनेंगे, तो बोलें कि अच्छा, इनको तो निर्मला
07:35सितारवन जी पसंद नहीं करती थी, तो अब ये खुननस निकाल र
08:15या कि नहीं बोलागे आपको अभी तक?
08:17देखे हमारी विवस्ता में जैसे बहुत सारे लोग हैं, वो अपनी-अपनी समझ के हिसाफ से और अपने-पने दिमाग
08:26के हिसाफ से बाते करते हैं, मैं ऐसे लोगों को एक टर्म इस्तिमाल करता हूँ, उनको मैं डॉमपीज कहता हूँ,
08:34वो डॉमपीज में डॉक्स जो बा
08:47करें, उनसे मुझे कोई फरक नहीं पड़ता, तो कौन anti-national कहरा है, उस पे जादा important है, या कौन
08:55और कौन नहीं कहरा है, उस पर important, तो मुझे इन चीज़ों से कोई परशानी नहीं होते हैं, आप खूब
09:02गई है, आरांज से गई है, square root लगा लिजे, जो भी मर्जी होआ, इतन
09:16largest economy हो गया है, एक सपना देखा जारते कि विल भी the third largest economy, बट फिर भी भारत
09:23का जो total GDP, it is much lower, 10 times lower than the first one, तो possibility क्या है, और
09:30साथ में थोड़ा सा और जोड़ देता हूं, 2047 विक्सित भारत का सपना, उसके बारे में थोड़ा समझाईए कि ये
09:37सपना हकीकत बनेगा, कि it is just a dream for 20 साल
09:42जोड़ा जाए कमुद्धी आप भाविश्य के बारे में सपने देखें, तो सपने और विजन में फरक होता है, dream और
09:53विजन में फरक होता है, dream को आप vision में भी बदल सकते हैं, और या आप उसको dream को
10:03शेक्चिलनी के ख़थ में भी बदल सकते हैं, तो दोनों में बहुत परि�
10:08अगर आप के पास माद्धा है, समझ है, ताकत है, तो आप विजन बना के उसको हासिल करने का प्रयास
10:18करिए, शेख चिल्ली की तरह से केवल ख्वाब मत देखिए, तो आपका जो सवाल के छटी, हम छटी से छटी
10:30पर आ गए हैं आज के दिए, कभी भी हम चौथे पर तो पहु
10:37किया गया था नीती आयोग के द्वारा दो एक साल पहले, उस समय हम नीती आयोग के जैसी संस्ता उसमय
10:44मिस्रीड करती थी, जो एक साल आगे पर एंटिसिपेड़ड आएमेफ में आखड़ा दिया था, जो उस समय की अखिकत नहीं
10:53था, उसको लेके, वो यह कहने लगे थे कि
10:55हम जपैन से आगे निकल गए, वो साल जपैन से हम आगे निकले नहीं, और अब तो इस्तिती यह हो
11:02गई कि हम पांचवे से छटे पर आगे, जैसा आपने भी खुद भी कहा, पांचवा, छटा, चौथा, तीसरा, यह बहुत,
11:11बहुत ज़ादा माइने नहीं रखते, जैसे आ
11:25करीब चार्ट लेंसे नीचे होके, जबकि हमारी जन संख्या और चीन की जन संख्या बराबर है, अमेरिका की जो एकॉनमी,
11:34जो पर कैपिटा इंकम है, वो हम से करीब करीब 15-17 गुना जादा है, तो ऐसे में कंपैरजन करके,
11:43और अगर हम तीन नंबर में पहुंच पी जाए
11:48जेपैन, इंग्लेंड और जर्मनी, वो बड़े छोटे देश हैं, उनकी पॉपुलेशन बहुत कम हैं, तो हमारे से एक बड़ा दस
11:56भी पॉपुलेशन नहीं है इनकी, एक की तो एक बड़ा 20 के आसपास है, 15 के आसपास है, तो ऐसे
12:03देशों से जो चोटे छोटे छोटे दे
12:05हैं, उनसे अगर हम यह अपने आपको 30 मार्खा समझें, कि हम उनसे आगे निकल के टोटल GDP में, तो
12:13हमें इस बात कोई भी ऐसा सपना भी नहीं देखना चाहिए, यह तो मुगालता है, सपना नहीं है, पर कैपिटा
12:21इंकम में हम 142 में नंबर से 145 में नंबर पे आतें दुनि
12:35जिने की इच्छा है, वो नेशनल GDP से पूरी नहीं होती, वो पूरी होती है, पर कैपिटा जीडिपी से, तो
12:45इन चीज़ा है में, लेकिन आपने जब पर कैपिटा की बात की, फिर मुझे डिस्पैरिटी की या था, यह कि
12:53भारत में डिस्पैरिटी कितनी बढ़ गई है, अम
12:59पहले हम एक बात करते थे कि भारत ना पाकिस्तान की तरह बन जाएगा, कि there are only riches or
13:04the poor, तो अभी थोड़ा सा समझाईए, जो हमारा मध्यम वर्ग है, उसका क्या हाल है, जो गरीब है, उनका
13:11क्या हाल है, तो अगले पाट साल में आप भारत को कैसे देखते हैं, भारत के लोगो
13:27इंकम हैं दुनिया में, और वो भी ऐसी अनीकुली डिस्ट्रिब्यूटेड है, जिसमें बहुत जादा लोग रिच्छे हैं, थोड़े से बहुत
13:35जादा जादा रिच्छे हैं, बहुत सारे लोगें जादा जर गरीब हैं, जिनके पास एक दिन में खाने का अनाज का
13:43अनाज
13:56के हम पाकिस्तान की तरह से हो जा रहे हैं, यह बात सही है, एक्शली हम पाकिस्तान की दिशा में
14:03जा रहे हैं, दोनों तरह से, एकनॉमिक ली भी जहां डिस्ट्रिब्यूशन और उफ इंकम उस तरह का है, और दूसरा
14:10हम रिलीजिस व्यूज़ में भी, जितना पाकिस्तान 20
14:13साल तीस साल पहले कटरपंथी बनके बरबादी की रास्ते पे निकला हम उसी तरह से कटरपंथी बनके बरबादी के रास्ते
14:21पे जा रहे हैं दूसरा देश उसका जो दूसरा पाकिस्तान का हिस्सा बंगलादेश वो दूसरी तरह बूब करा बंगलादेश हमसे
14:29बहुत पीछे
14:29हुआ गरता था पर-capita income में और income distribution में आज हमसे आगे है कहीं पिछले 10 साल से
14:36पर-capita income में आगे है और वहां पे जो distribution है वो income का काफी कम आनिकुल है इसके
14:43मुकाबले तो हमें इन issues पे really काम करना चाहिए पाकिस्तान की दिशा में हमें नहीं जाना चाहिए
14:52जी सर थोड़ा सा अब दर्शकों को यह समझाए कि हम हमारी अभी एक तरीके में ओकात वर्ड यूज नहीं
15:02करना चाहता था लेकिन हमारी ओकात क्या है अभी इस दुनिया के सामने और हम दर्शकों को यह कैसे समझना
15:10चाहिए कि आजकर कोई भी data आता है उस पर विवाद हो जा
15:15जाता है और जो मेन मुद्य वो तो सब भूली जाते यह तो हमने देख लिया दर्शकों को थोड़ा सा
15:21समझाए रियालिटी ओफ इंडिया इंडिया इंटरम्स आप से हम मैं डेटा नहीं बता पाऊंगा आप डेटा जरूर अच्छे से समझा
15:30सकते हैं कि लोगों को समझ में
15:32चाहिए कि भाई सच का है and where they should refer if they really want good information, right information अगर
15:38उनको चाहिए तो मीडिया से तो उनका मतलब विश्वास उच्छुका है और टीवी से भी उच्छुका है तो कहां उनको
15:45असली information खोजनी चाहिए अगर सच में उनको भारत की सिती जाननी है दो सवाल है इसमें
15:51एक जो चीज बहुत ज़्यादा जरूरी है उदेश के नागरिकों के लिए यह बहुत जरूरी है कि वो अपने दिमाग
16:00में questioning attitude अपना है, curiosity के बाद में question आता है, पहले कोई भी data दिया जाए या कोई
16:11भी claim किया जाए उसको face value पे नहीं लेना चाहिए
16:18हमें कोई भी नागरिकों नीचे से छोड़े से छोटी income हला हो या छोड़े से छोड़े पद पे हो या
16:25student है कोई भी हो, उसको यह समझना चाहिए कि यह real है या इसमें कोई जोल है, कोई इसमें
16:33बनावटी बात है, तो अगर इस attitude से आप शुरुवात करते हैं, तो फिर आप �
16:40कि जो data आपके सामने दिया गया है, उसी data में असलियत निकलाती है, कोई ऐसे data sets नहीं है
16:49देश में, कि यह तो सही data set है और यह गलट data set है, कुछ चीजों को छोड़के, जातर
16:57चीजों में जो data दिया जाता है, अब जैसे मैं आपको उधारन बताओ, GDP के बारे में तो काफी च
17:06data आया, कि हमारी 14% increase हो गई अगस्त के महने में, और फिर यह हमारी net GST increase
17:18जो है, करी 9% हो गई, मैंने उस पे लिखा और बताया, कि आप बैमानी क्या कर रहे हैं,
17:24बट बैमानी क्या कर रहे हैं, कि पिछले साल हमारा जो GST CS की आमदनी आती थी, आपने पिछले साल
17:31की base से उसको
17:32हडा दिया, और उसके बाद दावा कर रहे हैं, कि आपकी increase जादा हो गई, वो revenue थी, उस revenue
17:38को हडा ने सकते हैं, लेकिन इसको देखने के लिए बहुत ज़्यादा दिमाग नहीं चाहिए, थोड़ी सी inquisitiveness चाहिए, कि
17:45पिछले साल की जो GST बताये गई थी, वो सही बताये ग�
18:01भागे, उसको चेक करें, तो उसको पता लग जाएगा, मैं आपको और 50-100 धारन दे सकता हूँ, लेकिन समय
18:07की कमी के कारण से, मैं ये इस बात पर नहीं जाना चाहता अभी, कि कौन सा data reliable, कोई
18:14भी data reliable नहीं, एक बात तो सरकार में है, कि आप वो छुपाएंगे तो भी, उसक
18:22हकीकत आप जान पाएंगे, आपको जानने में इंट्रेस होना चाहिए, तो आप पहुंच पाएंगे सही जगात, लेकिन भारत का इंट्रेस
18:31थोड़ा खतम हो गया, reality और सचाही जानने में, उनका जो focus कुछ और ही है, एक चीज में आपको
18:38कभी skeptic नहीं बनना चाहिए, या �
18:43उमीद नहीं छोड़ने चाहिए, कि यहाँ दो सभी गढ़बढ है, इसलिए कुछ नहीं है, यह एटिट्यूड बहुत गलत है, विजय
18:52सर्दान साब का एक इंटर्विव ले रहा था, दो घंटे का हमने podcast किया, at the end मैंने पूछा, वोट
19:00किसको दीजेगा, तोनों ने बोला
19:13तो मोदी ली कोई दूंगा, यह इस सवाल पर नहीं जाना चाहता, कि लोग निरने करें कि किसको वोट दें,
19:23यह उनका वेक्तिकत निरने, और उनको हर एक आदमी को entitled है, कि वो किसको वोट देना चाहता है, किसको
19:31नहीं वोट देना चाहता है, यह मेरी नजर में जो contestants हैं, उ
19:43किसी शूपे मुझे नहीं जाना चाहिए, मैं केवल इसमें इंट्रेस्ट, इतना इस चीज में इंट्रेस्ट हो सकता हूं, कि किसी
19:50पर्टिक्लर मैटर पे सरकार का रुख सही है, नहीं है, उसकी हम रियल्टी में जा सकते हैं, आप वोट कि
19:58इसको पने नदें, वो आपकी ज
20:13बहुत सारे, वो उसी शूपे जाने से कोई फैदा नहीं, चली, बस मैं आखरी सवाल मुझे पता है, हमें 20
20:20मिर्ट मिले दें और मैं उसको स्ट्रेच नहीं करूंगा, आखरी सवाल ज़र, अगले 5 साल में भारत को क्या एक्सपेक
20:27करना चाहिए, सरकार की बात नहीं करते हैं
20:31ब्यूरोक्रासी तो चलाती है, चली, प्रेशिर्स कुछ भी हो सकते हैं, बट आपने जैसे बोला कि we should not be
20:37skeptical, तो अगले 5 साल आप कैसे देखते हैं भारत के?
20:43मुश्किलात से नजर आ रही हैं इस इस्तिती में तो क्योंकि जो सरकार का रुख अभी शुरू में हमने डिस्कस
20:50किया, institutions को capture कर लेना, compromise कर देना, उनको, जब आपकी institutions आपको सही बात बताने के लिए हैं,
20:59और सही दिशा में ले जाने के लिए काम नहीं करते हैं, छुपाने
21:12देश में जिस तरह से election management से, पूरा vote, सरकारे बदलना, जिस तरह से हमने use किया, अपनी agencies
21:20को, इन सब चीजों, तो एक ऐसा महाल बना हुआ है देश में, जिसमें सब लोग cross purposes पे काम
21:28कर रहे हैं, बजा है, देश को एक साथ आगे ले जाने के लिए, तो थोड़ी सी मुश्किल
21:34आगे चार-पांस साल तक के लिए, मैं एक किताब लिखता हूँ, पांस साल में रिव्यू करता हूँ, मैंने भी
21:42आपने ड्रीम शब्स इस्तिमाल किया था, तो पहली किताब मैंने 2019 के reference से लिखा था, दी डॉलर टें ट्रिलियन
21:49ड्रीम, कि हम अपनी हमारी रीम है कि हम 10 ट्र
21:53डॉलर की एकॉनमी को बनाएं, जैंगे दोजार चोबिच में पांस साल बाद जब मैंने उसको पहला रिव्यू किया, तो उसका
21:59टाइटल मैंने बदल दिया, तो उसका टाइटल किया, दी डॉलर टें ट्रियन ड्रीम डेंटिड, उसमें डेंट लग रहा है, लग
22:07गया है, �
22:09अब 2029 मैं फिर लुखूं लुखूंगा इसी सब्जेक्ट पे किताब, अभी इसे सोचना पड़ रहा है कि क्या उसका टाइटल
22:17होगा, मुश्किलात के स्थिति की तरफ जाता नजर आ रहा है, तो अभी कोई टाइटल फाइनल नहीं किया है, लेकिन
22:24ऐसा नहीं लग रहा है
22:25थोड़ा हैपी किसम का टाइटल, चलिए, I hope कि हम जब का future safe हो, and we have a happy
22:33life, और भारत में जो लोग हैं, उनका per capita income भी थोड़ा improve हो, that they can live with
22:39dignity, शुक्रियाजर अपने वक्त दिया, और हमें समझानी कोशिश की बहुत ही short conversation था, I'm sure कि दर्शक और
22:45जादा सुनना चाहेंगे, तो मै
22:49हमारा जो guest relation के लोग हैं, शुक्रियाजर जब आप से contact करें, तो हमें और वक्त दे, और हमारे
22:55काफी सारे live shows भी होते हैं, उसमें भी आप participate करें, with other people, there are very, very great
23:01people who are coming in, who are supporting governments as well, but you'll enjoy the conversation.
23:09Certainly, किसी समय और अच्छी, मैं बहुत सारे podcast करता हूँ, कोई 2 घंटे के, कोई 9 घंटे के, etc.,
23:16etc., आपके साथ भी, खुशी होगी उस तरह का कोई podcast करने के लिए, thank you very much.
23:21Thank you so much for your time, sir. I'll see you soon. See you, see you. Bye.
23:36Thank you.

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