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हिंदुओं में दुर्गा पूजा के व्रत में नमक को हाथ तक नहीं लगाया जाता है और अन्न भी नहीं खाया जाता है। यही नहीं नौ दिन तक वो सिर्फ सात्विक भोजन खाते हैं। साथ ही लहसुन प्याज की तरफ देखते तक नहीं है। ऐसे में आप समझ सकती हैं कि नॉनवेज के बारे में सोचना भी पाप समझा जाता है। लेकिन वहीं बंगालियों में दुर्गा पूजा के दिन नॉनवेज खाना जरूरी माना जाता है। उनके यहां नॉनवेज खाना एक रिवाज है, जिसे हर बंगाली फॉलो करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि क्यों हिंदू में शामिल बंगाली नॉनवेज खाते हैं। अगर नहीं जानते हैं तो आइए जानते हैं...Durga Puja 2026: Durga Puja Me Bengali Non Veg Kyu Khate Hai,Shakt Sampraday Ka Matlab Kya Hai ?

In the fasting of Durga Puja among Hindus, salt is not even applied to the hands and food is not eaten. Not only this, for nine days he eats only sattvik food. Also, the garlic does not even look at the onion. In such a situation, you can understand that even thinking about non-veg is considered a sin. But in Bengalis, it is considered necessary to eat non-veg on the day of Durga Puja. It is a custom to eat non-veg here, which is followed by every Bengali. But do you know why Bengalis who are included in Hindu eat non-veg. If you don't know then let us know...

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~HT.318~PR.111~ED.120~VG.HM~
Transcript
00:06क्या आपने कभी सोचा है कि देश के कई हिस्सों में नवरात्री के दोरान लोग प्याज, लहसुन और मांसाहार तक
00:12छोड़ देते हैं लेकिन पश्रिम बंगाल में दुर्गा-पूजा किसमें मचली और मटन की दावत होती है
00:16आखिर मादुर्गा की पूजा में इतना बड़ा अंतर क्यों क्या बंगाल में नौनवेज खाना धार्मिक परंपरा का हिस्सा है और
00:23कैस के पीछे शाक्त संपरदाई की कोई खास मानिता है
00:26आज समझेंगे इस शाक्त संपरदाय क्या होता है इसके धार्विक नियम क्या है और बंगाल में मादुर्गा की पूजा के
00:33साथ मांसहार का संबंध कैसे जुडा है
00:35सबसे पहले समझे कि शाक्त संपरदाय किसी जाती भाषा या शेतर का नाम नहीं है
00:40ये हिंदु धर्म की एक परंपरा है जसमें देवी आदिशक्ति को सर्वोच शक्ति के रूप में उजा जाता है।
00:47शाक्त उपासक मादुर्गा, काली, त्रपूर, सुंदरी और देवी के दूसरे स्वरूपों की आराधना करते हैं।
00:54इस परंपरा में देवी को केवल ममता और करुणा का प्रतीक में, बल्कि श्रष्टी की श्रक्ति और अधर्म का नाश
01:00करने वाली दिव्यूर्जा मानते हैं।
01:02बंगाल में शाक्त परंपरा का विशेश सांस्कृतिक और धार्मिक प्रभाव रहा है।
01:08मादुर्गा और माकाली की उपासना यहां की धार्मिक पहचान का अभिन अंग है।
01:13अब सवाल उठता है कि बंगाल की दुर्गा पूजा में नौन विच क्यों खाय जाता है।
01:17इसका पहला कारण शाक्त परंपरा की विविदिता है।
01:20यतिहास पे शाक्त उपासना की कुछ परंपराओं में परशुबली और मान से जुड़े अनुष्ठान भी रही है।
01:26कुछ विशेश पूजा पद्दतियों में मानसाहारी भोग का उलेख है।
01:30हलकि हर शाक्त पूजा में ऐसा नहीं होता और ना ही हर बंगाली परिवार इस परंपरा का पालन करता है।
01:37दूसरा कारण है बंगाल की खाद्य संस्वती।
01:39मचली बंगाली भूजन का पारंपर एक हिस्सा रही है।
01:43दुर्गा पूजा कुम बंगाली परिवार मा के माय के आने के उत्सव की तोर पर देखते हैं।
01:48ऐसे में परिवार रिष्टदारों के साथ विशेश भूजन करना भी उत्सव का ही खास अंग है।
01:54कई सार्वजनिक दुर्गा पूजा एजनों में मा को शाकाहारी भोग चड़ाय जाता है जबकि लोग घरो या आउटलेट्स में मचली
02:00और मटन खाते हैं।
02:01दूसरी और कुछ पारंपरिक परिवारों और विशेश शाक्त अनुष्ठानों में अलग प्रकार की भोग और परंपरायं भी मिलती है।
02:08लेकिन क्या शाक्त संप्रदाय में नौन विच खाना जरूरी है।
02:12बिलकुल नहीं। कई शाक्त भोग तो पूरी तरह शाकाहरी होते हैं और मादुर्गा की पूजा फूल, फल, मिठाई, खिचडी और
02:18दूसरे शाकाहरी भोग से करते हैं।
02:21इसी तरह बंगाल में सभी लोग एक जैसी पूजा पद्दती नहीं अपनाते हैं।
02:25कुछ परिवार वैशनो परमपराओं का पालन करते हैं, जिन में शाकाहर और सात्यक भोजन का महत्व है।
02:31इसलिए ये कहना गलत है कि हर बंगाली दुर्गा पूजा में नौन्रिज खाता है।
02:35याद रखें, मादुर्गा की भक्ती का कोई एक ही भोजन नियम सभी पर लागू नहीं होता।
02:40अलग-अलग परिवार अपनी धार्मिक मानिताओं और परमपराओं के नुसार ही पूजा करते हैं।
02:45आखिरकार भक्ती का अर्थ केवल ठाली में क्या है क्या नहीं इस पर निर्भर नहीं करता। बलकि श्रद्धा आचरण और
02:52दूसरों की मानिताओं की प्रती सम्मान भी है।
02:55फिल हाल असे वीडियो में इतना ही। वीडियो को लाइक और शेयर करें। साथी चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें।

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