00:09आज के इस वजाती जाइजे में खुशामदी
00:12आज हम पाकिस्तान के सुबा सिंध के एक बहुत ही दिल्चस्प जिले
00:15नौशेरो फिरोस पर बात करने वाले है
00:17आपको ये जानकर हैरत होगी कि ये इलाका अपनी शानदार जरात
00:21और इंतहाई कदीम तारीख दोनों के लिए बयक वक जाना जाता है
00:24तो चले वक जाया किये बिना सिधा इस कहानी के अंदर चलते हैं
00:28और देखते हैं कि इसकी असल हकीकत किया है
00:30नौशेरो फिरोस दरसल एक बहुत हैरत अंगेस्त अज़ात की तस्वीर पेश करता है
00:34जरा तसवर करें
00:35एक तरफ तो सरसबस बागात हैं
00:37खास दोर पर सिट्रिस और खुजूर की वो शांदार फसलें जो लाकों लोगों का पेट पाल रही हैं
00:42लेकिन दूसी जानिब
00:43दूसी जानिब हमारे तारीखी और तामिराती शाकार हैं
00:46जो बदकिस्मती से रफ़ता रफ़ता गुमनामी के अंधेरों में खोते जा रहे हैं
00:49यानि एक ऐसा इलाका है जो अपनी मौशी बका और अपनी तारीख को बचानी की जंग एक साथ लड़ रहा
00:54है
00:55हिस्सा पहला
00:56जमीन और आबो हवा
00:57चलिए सबसे पहले देखते हैं कि यहां कुदरत किस थरा अपने इंतहाई मुख्तलिफ रंग दिखाती है
01:03इस खित्ते को मुकमल तोर पर समझने के लिए ना
01:05हमें सबसे पहले इसके माहौल की शिद्ध को देखना होगा
01:07जरा इस हिंसे पर गोर करें
01:0952 डिग्री सिंटी ग्रेट
01:11यह वाकई होश उड़ा देने वाला दरजा हरारत है
01:13मई 2010 में रिकॉर्ड की गई गर्मी की ये शिद्ध हमें बताती है
01:17कि यहां का मकामी किसान, आम शहरी और यहां का जराई निजाम
01:21रोजाना किस कदर कठन और इंतहाई गर्म सहराई आब और हवा का मकाबला करते है
01:25गर्मियों में तो यहां वाकी आग बरसती है
01:28बारिशें ना होने के बराबर हैं और हवाई भी काफी तेज होती है
01:31लेकिन इस सखतरी मौसम के बावजूद
01:34आप यहां की जिन्दगी की चहल पहल देखें
01:36यह बहुत बड़ा जिला पांच मुक्तलिफ इंतजामी तालगों में बटा हुआ है
01:40जिन में भरिया, कंद्यारो, मोरो, खुदनोशहरो फेरोज और महरापूर शामिल है
01:46यहां 16 लाग से जादा लोग आबाद है
01:48और सबसे कमाल के बाद क्या है?
01:50इतनी मौसमियाती शिद्धों के बावजूद
01:52यहां की शर्य खुआंदगी 64 फीसद है
01:55यह अदादो शुमार साफ बताते हैं
01:57कि यहां के लोग इल्म हासिल करने का कितना जबरदस जजबा रखते हैं
02:01हिस्सा दूसरा तारीख का एक अक्स
02:03अब हम देखते हैं कि यह खिता किस तरह सदियों से मुक्तलिफ सल्तनतों की गुजरगा रहा है
02:08इस जमीन की जड़ें आपकी सोच से भी ज़्यादा गहरी है
02:12अगर हम वक्त में पीछे जाएं तो यह लाका कदीम वादिय सिंध की तहजीब से जड़ा है
02:17इसके बाद यहां सूमरा, अरगून, कलोडा और टालपुर खांदानों का दौर रहा
02:22फिर बिलाखर, 1852 में अंग्रेजों ने इसे अपने कब्जे में लेकर हैदरबाद कलेक्टरेट का हिस्सा बना दिया
02:29तो ये महस तारीख की कोई बोरिंग टाइम लाइन नहीं है
02:32बलके हर दौर ने इस मटी पर अपनी एक अनमिट एक पकी चाप छोड़ी है
02:37अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस जिला का नाम नौशेरो फिरोस पड़ा कैसे
02:41तो जनाब तारीख हमें बताती है कि कलहुड़ा दौरे हकूमत में फिरोस फकीर नामी एक शख्स ने नौ अलग-अलग
02:47देहातों को मिला कर इस शहर की मुनियाद रखी थी
02:50मीर अली शेर काने का ये तारीखी हवाला इस बात को बिलकुल वाज़े कर देता है
02:54कि किस तरह नौ बिखरी हुई छोटी बस्तियां एक मुनज़म गजबे की शकल इख्दियार कर गें
02:59जिसे आज हम इसी मुनाजबत से नौशेरो फिरोस कहते हैं
03:03हिस्सा तीसरा सिंद का जराई मरकस
03:05आईए अब इस मिटी की बात करते हैं जो आज एक जबरदस्त मौशी इंजन का काम कर रही है
03:11आज वही तारीखी मटी इलाकाई मईश्ट की रीर की हड़ी बनी हुई है
03:15जरा इन आदादों शुमार पर नज़र डालें
03:1719,000 एकर से ज़्यादा रखबे पर तो सिर्फ केलू के बागाट पहले हुए है
03:20जो इसके जर्ए गल्बे का मूँ बोलता सबूत है
03:23इसके साथ साथ आम और लीमू के बागाट का रखबा भी हैरान कुन हद तक वसी है
03:27रोडी कैनाल के पानी में इस इलाकी की तक्तीर कुछ यूँ बदली है
03:30कि यह अब सिर्फ सिंद कर नहीं बलके पूरे पाकिस्तान के लिए फ़लू की पैदावार का एक बहुत बड़ा मरकज
03:35बन चुका है
03:36और अब यहाँ एक बहुत ही कमाल का पहलू सामने आता है
03:39देखें कपास गंदम और सिट्रस जैसी रिवायती फसलें तो यहाँ होती ही है
03:43लेकिन अब इस मिटी पर कुछ इंतहाई जदीद और नायाब फसलों की तजर्बात भी काम्याबी से किये जा रहे है
03:48किसान अब इंतहाई आला मियार की कीमती अर्भी खुजूरें
03:52जैसे अजवा, अंबर और मजजोल काश्ट कर रहे है
03:55दुबई से मंगवाए गए इन पौदों की इस इस इलाके में जबरदस्त अफजाईश यह साबित करती है कि इस मिटी
04:00में वाकई कोई जादूई सलाहियत मौचूद है
04:03हिस्सा चौथा
04:04खत्रे से दो-चार वर्सा
04:05जरात के औरूच के साथ साथ अब हम इस तबई तारीख को दरपेश संगीन खत्रे का जायजा लेते हैं
04:10एक तरफ तो जरई मरिशत आस्मान से बाते कर रही है
04:13लेकिन बदकिस्मती से इसी जिला की तारीखी और तामिराती विरासत मिटती जा रही है
04:18जरा तसवर करें सरकारी तहवील में होने के बावजूद बेश्शुमार तारीखी मकामात तूट फूट और तजावजात का शकार है
04:2519 मीं सदी की ये शांदार तालीमी इमारते हैं जैसे 1893 का गवर्मिन्ट मदर्सा और कैंपस हाई स्कूल आज खस्ताहाली
04:33की तस्वीर बने हुए है
04:34यहां तक के बरतानवी दौर के मैजिस्ट्रेट हेंडरी रेलन की कबर भी मुकमल तबाही के दाने पर हैं
04:40यह सिर्फ पुरानी इंटे नहीं है यह हमारा सकाफती और तालीमी विर्सा है जो हमारी आँखों के सामने दम तोड़
04:46रहा है
04:47इस बेहिसी पर मकामे महाकिकीन और लिखारी बार बार आवाज उठा रहे हैं
04:52डॉक्टर अब्दुलकदीर मेमन के यह अलफास पढ़ें यह वाकई दिलचीप देने वाले हैं
04:56वो साफ कह रहे हैं कि यह देखकर किस कदर दुख होता है
04:59कि हम अपने शानदार वुरसे को खुद अपने हाथों से बिखरने के लिए छोड़ रहे हैं
05:03उनकी यह अपील सीधी सी बात है
05:05कि अगर अब भी हकोमती सता पर कोई आक्शन ना लिया गया
05:08तो हमारी यह कीमती तारीखी कहानिया हमेशा के लिए मिट जाएंगी
05:11और सच तो यह है कि ऐसी चीजों का नुकसान दुबारा कभी पूरा नहीं हो सकता
05:15तो इस सारी बहस के बाद हमारे सामने एक बहुत ही एहम और गोरतलब सवाल आकर खड़ा होता है
05:20क्या नोशारो फिरोज अपनी इस तेज रफ़तार जर्ई तरकी को जारी रखते हुए
05:24अपनी गदीम तारीखी जड़ों को बचाने का कोई रास्ता निकाल पाएगा
05:27मौशी तरकी सौ फीसद जरूरी है इसमें कोई शक नहीं
05:31लेकिन क्या इसकी कीमत हमारी तारीख को चुकानी चाहिए
05:34ये वो कड़ात आवाजों है जिस पर आज हमें संजीदगी से सोचना होगा
05:38हमें ये देखना होगा कि सिंध का ये सुनहरा जरूरी मरकज
05:41कहीं अपनी अजीम उश्शान विरासत को इसी जर्खेज मटी में दफन ना कर दे
05:45आज के इस वजाती जाइजे में हमारे साथ रहने का बहुत चुक्रिया
05:49मुझे उमीद है कि आज आज आपको कई नए और दिल्चस भकाइक जानने को मिले होंगे