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نوشہرو فیروز سندھ، پاکستان کے وسطی علاقے میں واقع ایک تاریخی اور زرعی خطہ ہے، جس کی شناخت قدیم تہذیبی ورثے، ثقافتی تنوع اور زراعت سے جڑی ہوئی ہے۔

اس ویڈیو میں جانیے نوشہرو فیروز کی تاریخ، ثقافت، معیشت، زراعت، آب و ہوا اور تاریخی مقامات کے بارے میں۔ گندم، کپاس، گنے کے ساتھ آم، امرود اور کھجور کے باغات اس خطے کی زرعی معیشت میں اہم کردار ادا کرتے ہیں۔

نوشہرو فیروز میں مختلف زبانیں بولنے والی برادریاں آباد ہیں، جبکہ قلعے، مزارات اور قدیم عمارات اس علاقے کے تاریخی ورثے کی عکاسی کرتے ہیں۔ شدید گرم و خشک موسم کے باوجود یہ خطہ اپنی زرعی پیداوار اور ثقافتی رنگا رنگی کے باعث سندھ میں ایک منفرد مقام رکھتا ہے۔

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00:09आज के इस वजाती जाइजे में खुशामदी
00:12आज हम पाकिस्तान के सुबा सिंध के एक बहुत ही दिल्चस्प जिले
00:15नौशेरो फिरोस पर बात करने वाले है
00:17आपको ये जानकर हैरत होगी कि ये इलाका अपनी शानदार जरात
00:21और इंतहाई कदीम तारीख दोनों के लिए बयक वक जाना जाता है
00:24तो चले वक जाया किये बिना सिधा इस कहानी के अंदर चलते हैं
00:28और देखते हैं कि इसकी असल हकीकत किया है
00:30नौशेरो फिरोस दरसल एक बहुत हैरत अंगेस्त अज़ात की तस्वीर पेश करता है
00:34जरा तसवर करें
00:35एक तरफ तो सरसबस बागात हैं
00:37खास दोर पर सिट्रिस और खुजूर की वो शांदार फसलें जो लाकों लोगों का पेट पाल रही हैं
00:42लेकिन दूसी जानिब
00:43दूसी जानिब हमारे तारीखी और तामिराती शाकार हैं
00:46जो बदकिस्मती से रफ़ता रफ़ता गुमनामी के अंधेरों में खोते जा रहे हैं
00:49यानि एक ऐसा इलाका है जो अपनी मौशी बका और अपनी तारीख को बचानी की जंग एक साथ लड़ रहा
00:54है
00:55हिस्सा पहला
00:56जमीन और आबो हवा
00:57चलिए सबसे पहले देखते हैं कि यहां कुदरत किस थरा अपने इंतहाई मुख्तलिफ रंग दिखाती है
01:03इस खित्ते को मुकमल तोर पर समझने के लिए ना
01:05हमें सबसे पहले इसके माहौल की शिद्ध को देखना होगा
01:07जरा इस हिंसे पर गोर करें
01:0952 डिग्री सिंटी ग्रेट
01:11यह वाकई होश उड़ा देने वाला दरजा हरारत है
01:13मई 2010 में रिकॉर्ड की गई गर्मी की ये शिद्ध हमें बताती है
01:17कि यहां का मकामी किसान, आम शहरी और यहां का जराई निजाम
01:21रोजाना किस कदर कठन और इंतहाई गर्म सहराई आब और हवा का मकाबला करते है
01:25गर्मियों में तो यहां वाकी आग बरसती है
01:28बारिशें ना होने के बराबर हैं और हवाई भी काफी तेज होती है
01:31लेकिन इस सखतरी मौसम के बावजूद
01:34आप यहां की जिन्दगी की चहल पहल देखें
01:36यह बहुत बड़ा जिला पांच मुक्तलिफ इंतजामी तालगों में बटा हुआ है
01:40जिन में भरिया, कंद्यारो, मोरो, खुदनोशहरो फेरोज और महरापूर शामिल है
01:46यहां 16 लाग से जादा लोग आबाद है
01:48और सबसे कमाल के बाद क्या है?
01:50इतनी मौसमियाती शिद्धों के बावजूद
01:52यहां की शर्य खुआंदगी 64 फीसद है
01:55यह अदादो शुमार साफ बताते हैं
01:57कि यहां के लोग इल्म हासिल करने का कितना जबरदस जजबा रखते हैं
02:01हिस्सा दूसरा तारीख का एक अक्स
02:03अब हम देखते हैं कि यह खिता किस तरह सदियों से मुक्तलिफ सल्तनतों की गुजरगा रहा है
02:08इस जमीन की जड़ें आपकी सोच से भी ज़्यादा गहरी है
02:12अगर हम वक्त में पीछे जाएं तो यह लाका कदीम वादिय सिंध की तहजीब से जड़ा है
02:17इसके बाद यहां सूमरा, अरगून, कलोडा और टालपुर खांदानों का दौर रहा
02:22फिर बिलाखर, 1852 में अंग्रेजों ने इसे अपने कब्जे में लेकर हैदरबाद कलेक्टरेट का हिस्सा बना दिया
02:29तो ये महस तारीख की कोई बोरिंग टाइम लाइन नहीं है
02:32बलके हर दौर ने इस मटी पर अपनी एक अनमिट एक पकी चाप छोड़ी है
02:37अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस जिला का नाम नौशेरो फिरोस पड़ा कैसे
02:41तो जनाब तारीख हमें बताती है कि कलहुड़ा दौरे हकूमत में फिरोस फकीर नामी एक शख्स ने नौ अलग-अलग
02:47देहातों को मिला कर इस शहर की मुनियाद रखी थी
02:50मीर अली शेर काने का ये तारीखी हवाला इस बात को बिलकुल वाज़े कर देता है
02:54कि किस तरह नौ बिखरी हुई छोटी बस्तियां एक मुनज़म गजबे की शकल इख्दियार कर गें
02:59जिसे आज हम इसी मुनाजबत से नौशेरो फिरोस कहते हैं
03:03हिस्सा तीसरा सिंद का जराई मरकस
03:05आईए अब इस मिटी की बात करते हैं जो आज एक जबरदस्त मौशी इंजन का काम कर रही है
03:11आज वही तारीखी मटी इलाकाई मईश्ट की रीर की हड़ी बनी हुई है
03:15जरा इन आदादों शुमार पर नज़र डालें
03:1719,000 एकर से ज़्यादा रखबे पर तो सिर्फ केलू के बागाट पहले हुए है
03:20जो इसके जर्ए गल्बे का मूँ बोलता सबूत है
03:23इसके साथ साथ आम और लीमू के बागाट का रखबा भी हैरान कुन हद तक वसी है
03:27रोडी कैनाल के पानी में इस इलाकी की तक्तीर कुछ यूँ बदली है
03:30कि यह अब सिर्फ सिंद कर नहीं बलके पूरे पाकिस्तान के लिए फ़लू की पैदावार का एक बहुत बड़ा मरकज
03:35बन चुका है
03:36और अब यहाँ एक बहुत ही कमाल का पहलू सामने आता है
03:39देखें कपास गंदम और सिट्रस जैसी रिवायती फसलें तो यहाँ होती ही है
03:43लेकिन अब इस मिटी पर कुछ इंतहाई जदीद और नायाब फसलों की तजर्बात भी काम्याबी से किये जा रहे है
03:48किसान अब इंतहाई आला मियार की कीमती अर्भी खुजूरें
03:52जैसे अजवा, अंबर और मजजोल काश्ट कर रहे है
03:55दुबई से मंगवाए गए इन पौदों की इस इस इलाके में जबरदस्त अफजाईश यह साबित करती है कि इस मिटी
04:00में वाकई कोई जादूई सलाहियत मौचूद है
04:03हिस्सा चौथा
04:04खत्रे से दो-चार वर्सा
04:05जरात के औरूच के साथ साथ अब हम इस तबई तारीख को दरपेश संगीन खत्रे का जायजा लेते हैं
04:10एक तरफ तो जरई मरिशत आस्मान से बाते कर रही है
04:13लेकिन बदकिस्मती से इसी जिला की तारीखी और तामिराती विरासत मिटती जा रही है
04:18जरा तसवर करें सरकारी तहवील में होने के बावजूद बेश्शुमार तारीखी मकामात तूट फूट और तजावजात का शकार है
04:2519 मीं सदी की ये शांदार तालीमी इमारते हैं जैसे 1893 का गवर्मिन्ट मदर्सा और कैंपस हाई स्कूल आज खस्ताहाली
04:33की तस्वीर बने हुए है
04:34यहां तक के बरतानवी दौर के मैजिस्ट्रेट हेंडरी रेलन की कबर भी मुकमल तबाही के दाने पर हैं
04:40यह सिर्फ पुरानी इंटे नहीं है यह हमारा सकाफती और तालीमी विर्सा है जो हमारी आँखों के सामने दम तोड़
04:46रहा है
04:47इस बेहिसी पर मकामे महाकिकीन और लिखारी बार बार आवाज उठा रहे हैं
04:52डॉक्टर अब्दुलकदीर मेमन के यह अलफास पढ़ें यह वाकई दिलचीप देने वाले हैं
04:56वो साफ कह रहे हैं कि यह देखकर किस कदर दुख होता है
04:59कि हम अपने शानदार वुरसे को खुद अपने हाथों से बिखरने के लिए छोड़ रहे हैं
05:03उनकी यह अपील सीधी सी बात है
05:05कि अगर अब भी हकोमती सता पर कोई आक्शन ना लिया गया
05:08तो हमारी यह कीमती तारीखी कहानिया हमेशा के लिए मिट जाएंगी
05:11और सच तो यह है कि ऐसी चीजों का नुकसान दुबारा कभी पूरा नहीं हो सकता
05:15तो इस सारी बहस के बाद हमारे सामने एक बहुत ही एहम और गोरतलब सवाल आकर खड़ा होता है
05:20क्या नोशारो फिरोज अपनी इस तेज रफ़तार जर्ई तरकी को जारी रखते हुए
05:24अपनी गदीम तारीखी जड़ों को बचाने का कोई रास्ता निकाल पाएगा
05:27मौशी तरकी सौ फीसद जरूरी है इसमें कोई शक नहीं
05:31लेकिन क्या इसकी कीमत हमारी तारीख को चुकानी चाहिए
05:34ये वो कड़ात आवाजों है जिस पर आज हमें संजीदगी से सोचना होगा
05:38हमें ये देखना होगा कि सिंध का ये सुनहरा जरूरी मरकज
05:41कहीं अपनी अजीम उश्शान विरासत को इसी जर्खेज मटी में दफन ना कर दे
05:45आज के इस वजाती जाइजे में हमारे साथ रहने का बहुत चुक्रिया
05:49मुझे उमीद है कि आज आज आपको कई नए और दिल्चस भकाइक जानने को मिले होंगे

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