00:00गुरुजी थेक, उनका एक अति उत्सा ही चेला था, गुरुजी जितना बताएं, चेला राम दो कदम आगे बढ़ जाएं, उनकी नई नई उमंग, जन्दी से हमें मुक्ति वगेरा पाई लेनी है, कब तक गुरुजी के नीचे नीचे काम चलेगा, तो आरा एक दन वहां से
00:30ज्यादा तेज, तो हाथी आया, उसने सून ये लपीटा, रिचाल के दूर फेक दिया, भाग अच्छा था कि कुछल के मारा नहीं धूर जाके गिरे, दो-चार हड़ी और टूटी, करा थे पड़े थे रात में, तो गुरुजी आये, ये क्या कर लिया, और आप ही ने बोल
01:00नारायन हैं, और बाकी आधा ये था कि वो हाथी, दोनों में से एक भी बात भोल नहीं सकते, तो मैं सदा इसलिए मिल रही है, क्योंकि तुमने अधूरी याद रखी, दोनों बाते याद रखाने हैं