00:00भूत पिशाच निकट नहीं आवें, महावीर जब नाम सुनावें, तो यहां पे तुलसिदास जी क्या गहना चाहते हैं?
00:30अमाने की दादी नहीं होती, तुम उसको इसकी दादी से अलग कर रहे हो, नहीं मानेगा, लेकिन उसको राम के
00:36पास भी लेकर आना है, तो फिर यह तरीका निकाला जाता है, एसा, कि देखो, भूत परे तुमको बहुत बाधा
00:42देते हैं, परिशान करते हैं, वो कालू भूत थ
00:47थी ना तुमारी, हुआ कुछ नहीं था, अंधेरी रात में निकल रहे हैं, बर्गत के नीचे से टकरा गए, पत्थर
00:53से गिर गए, टांग तूट गई, अब उसकी टांग तूटी होई है, इस बात को प्रमान के तौर पर लेता
00:58है, कि कालू भूत तो है ही, कहता है, ना होता
01:14कि यहां भूत प्रेद होते तो हैं, लेकिन हनुमान जी का जाप करोगे ने तो निकट नहीं आएंगे, उनका चलो,
01:22तू रखे रहे अपने भूत प्रेद, उनको रखे रखे ही सही, तुम श्री राम के निकट तो आओ, और यह
01:28बर निकट आ जाओगे, तो संभावना यह है
01:30कि दीरे दीरे अंधविश्वास से सोयमी मुक्त हो जाओगे, बात प्रतिकात्मत है न?