00:00किन लोगों का अभी क्या बोलू मैं विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहता
00:07स्वामी रामदेव क्या है ये देश जानता है
00:10स्वामी रामदेव का योगदान क्या है ये देश जानता है
00:14इसलिए मैं ओचे लोगों के बारे में कोई टुपनी नहीं करना चाहता
00:18किन लोगों का अभी क्या बोलू मैं विवात को बढ़ावा नहीं देना चाहता
00:26स्वामी रामदेव क्या है ये देश जानता है इसलिए मैं ओचे लोगों के बारे में کوой टुपनी नहीं कर देशनों
00:38को
00:39आशिरवाद दिया है सब संतों ने क्योंकि हम संतों के लिए देश से बड़ा कुछ भी नहीं है
00:45माता भूमी पुत्रोहम्र धिव्याहा जननी जन्म भूमी स्वर्गाद भी गरी है से कि हम उपासक है
00:51वन नेशन वन इलेक्षन से शिक्षा तंत्र में भी सुधार होगा क्योंकि छे मेने साल भर में इलेक्षन ही चलते
00:58रहते हैं
00:59उससे और विकास हो योजनाई विबाधी तो होती हैं तो वन नेशन वन इलेक्षन का होने से हमारे जो गुरुजन
01:06जो लगबग उनका तीस प्रतिशत में तो चुनाओ कराने में लग जाता है तो भचों को पढ़ाएंगे देश आगे बढ़ेगा
01:12और कुछ राजनेताओं का �
01:31सबसंत दूर तक जानदेन के लिए इस देश के हितों से समझोता नहीं कर सकते हैं इसलिए सब संतों ने
01:41एक मत्सेता किया है
01:43कि ये बात दूर तक जानी चाहिए
01:45वन नेशन वन इलेक्षन के माध्यम से
01:48ये देश प्रगती के पसपर और तेजी से आगे बढ़ेगा
01:50देश को प्रधान मंतरी जी ने
01:52सो से जादा ऐसी विकास योजनाई शुरू की है
01:54देश से की 2046 तक विक्सित भारत बने
01:57हम तो चाहते हैं कि 2040 की बन जाए
01:59तो इस कारिय से और गधशील होगा ये लोग का तंत्र
02:02और चुनाव सुधारू को लेकर के और भी प्रथिवद्ध हमारे देश के
02:07प्रधान मंतरी लेकिन कुछ लोग सड़कों पर संसद में
02:12हंगामा और आराजकता करके ऐसा साते हैं कि हम लोग
02:15तंत्र को बंधी बना लेंगे लोग तंत्र को हम कैद कर लेंगे चुनाव
02:21लड़कर के प्रधान मंतरी बन सकते हो सबने सभी देख सकते हैं देश के
02:40लोग तंत्र करिशा सपत्र लोग तंत्र के विविध घटकों में वशकता है और उसके
02:46लिए भी सरकार भी काम कर रही है आगे भी काम होते रहेंगे लेकिन
02:51कुछ लोगों का ऐसा लगता है कि देश में कुछ हचा काम होी नहीं
02:54रहा है इसलिए झोट झोटे बच्चों को भी पास साथ 10 सान के उंकर कर रहे हुई कि को आगे
03:11आने
03:11चाहिए कोई भी आपको लगता है कि कि किसी के साथ शातरों के साथ हो रहा
03:23अन्याय चाहिए एक SESC के साथ हो रहा है और अन्याय चाहिए एक प्रहमन के साथ हो रहा है आज
03:29SESC का कोई अपमान करें तो सब
03:31लोग तंत्र की समीधान की दोहाई देने लगते हैं कि यह तो समीधान की खिलाप है
03:34S.E.S.T. का अपमान यदी समिधान के खिलाप है
03:37तो एक ब्रहमन का अपमान भी समिधान के खिलाप है
03:39कुछ लोग ब्रहमन को गाली देने मिले गए कि देश में तो लोग तंतर चली नहीं रहा
03:43ब्रहमन तंतर चल रहा है बनियां तंतर चल रहा है
03:45ऐसी बातें बोलना भी है समिधान और देश के लोग तंत्र के खिलाप है और ऐसा नहीं होना जी ने
03:52तो ऐसी स्टी को गाली दो ना क्षत्रिये को ना वैश्ये को ना शूत्र को ना प्रहमन को और ना
03:58सन्यासी को
03:59सन्यासी को गाली देना आजकली एक नाय फैशन हो गया और आपस में समाज में ऐसे भेद की दिवारे खड़ी
04:07कर दी हैं एक दूसरी के साथ लड़ाने चाहते हैं ऐसा नहीं होने देंगे हम भारत को दुनिया का स्रेश्टतम
04:15भारत देश बनाएंगे भारत की करेंसी को दुनि
04:21दुनिया की स्रेश्टतम शिक्षा चिकित्सा वेसा इसले मैंने का वन नेशन वन है इलेक्षन वन नेशन वन एजुकेशन सिस्टम धामीजी
04:28ने अच्छा किया यहां पर समान नागरिक सहिता यहां पर रागू करवाई मदर्चा बोड बंद कराया एक जैसी शिक्षा एक
04:34�
04:34चिकित्सा एक जैसे समयदाने का अधिकार देश के समनागरिकों के हैं इसे शाम में बड़ा कारियों हुआ तो ऐसे कारियों
04:40के अंसंसा होने चीए और मैं कह रहाता जब देश आगे बढ़ेगा तो देश की करेंसी दुनिया की स्रेश्टम करेंसी
04:46होगी भारत का पासपोर्
05:00से प्रेम करते हैं वो इस विशे का विरोध नहीं कर सकते हैं एक बात वंद्यमात्रम के भी संदर में
05:07मैं भी बोल रहा था कुछ लोग संस्कृत पढ़े नहीं है वो कहते हैं यह वंद्यमात्रम में तो कोई दुर्गा
05:13की कोई और किसी मंदिर की कोई मठ की पूजा कर रहा ह
05:17हम भारत माता कोई कहरें वही दुर्गा है वही लक्ष्मिय है वही हमारे लिए धर्म है वही विद्या है वही
05:24हमारा मंदिर है वही हमारे दश प्रहारू को धारण करने वाली है वही हमारे लिए अप्रतिम है वही हमारी इष्ट
05:34है अभिष्ट है तो जो लोग इस वंद्य मात
05:38मात्रम में देवी देवता माठ मंदिर इसको देख रहे हैं मुझे लगता वो संस्कृत से और संस्कृती से अनभिग्य है
05:45उनको थोड़ी संस्कृत पढ़ लेनी चाहिए और थोड़ा उनको बहुत होना चाहिए कि हमने भारत माता को सारी उपए
05:51मेरा मत्र मेरा मंदिर मेरा मात्रम अर्थ
06:20अबला के नुमा एटो बोले, अरे कौन कहता है मा तुम अबलाओ, तो मा की उपासना को मठ मंदिरों से
06:27देवी देवताओं से जोड़ करके, फिर ये कहना कि ये तो इस धर्मी संस्कृति की वरोध में, ये सब बोधिक
06:32दिवालिया पन है, ये ठीक नहीं.
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