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Pitru Paksha 2026: पंचांग के अनुसार पितृपक्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन माह की अमावस्या तक चलते हैं। इन 15-16 दिनों के समय काल में तिथि के अनुसार पितरों का श्राद्ध किया जाता है। पितृ पक्ष के दौरान कब करें किसका श्राद्ध? अगर आपको भी श्राद्ध की तिथि लेकर कन्फ्यूजन है, तो यह वीडियो आपके लिए है। इस वीडियो में पंडित जी ने बताया है कि परिवार के किस सदस्य का श्राद्ध किस दिन किया जाता है.

Pitru Paksha 2026: According to the Hindu calendar, Pitru Paksha begins on the full moon of the Bhadrapada month and continues until the new moon of the Ashwin month. During this 15-16 day period, the *Shradha* rituals for ancestors are performed according to the specific lunar dates. When should the *Shraddha* for specific family members be performed during Pitru Paksha? If you are confused about the dates for these rituals, this video is for you. In this video, the Pandit explains which day is designated for performing the *Shraddha* of specific family members.

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~HT.318~ED.120~PR.114~VG.HM~
Transcript
00:05श्राद्ध विशेष किसका स्राद्ध कब करना चाहिए और कैसे करना चाहिए इसी विशेपे करेंगे चर्चा
00:13पित्र पक्ष एक प्रकार से पित्रों का सामुहिक मेला बताया गया है
00:19इस पक्ष में सभी पितर प्रत्री लोग पर आते हैं और अपने अपने सगे सम्मंधियों के यहां बिना आवाहन किये
00:27ही पहुँचते हैं
00:29तथा अपने सगे सम्मंदियों के द्वारा प्रदत्य किये हुए प्रसाद से तरप्त हो करके।
00:38पुना अपने पितर को प्रस्थान कर जाते हैं, जिसके फल्सवरूप स्राद्ध करता को अनेख प्रकारिक के सुखप्राप्त होते हैं।
00:48अता सभी को चाहिए कि स्राद्द पक्ष में पितरों की संतुष्टी है तू एवं अत्यंत त्रप्ती के लिए सुब आसिरबाद
00:58प्राप्त करने है तू
00:59मनुस्यों को अपने पित्रों का स्राद्ध अवस्य करना चाहिए
01:05जो लोग अपने पित्रों का स्राद्ध नहीं करते हैं
01:10उन्हें अनेक तरह की समस्याएं जीवन में आती हैं
01:14कई लोग स्राद्ध नहीं करते हैं
01:16और ऐसे लोग पितर जो होते हैं उनसे असंतुष्ट हो जाते हैं नाना प्रकार के दुखों का भाजन उस जीव
01:25को होना पड़ता है
01:27तो जिस म्रत पिता के एक से अधिक पुत्र हो उसमें पिता की संपत्ति का यदि बटवारा नहीं हुआ हो
01:36तो सभी संयुक्त रूपते एक जगह पर ही स्राद के काद को करना चाहिए और अगर पिता की संपत्ति का
01:46बटवारा हो चुका हो
01:48बड़े पुत्र को ही स्राद करना चाहिए अन्य भाईयों को स्राद नहीं करना चाहिए और अलग अलग स्राद यदि करना
01:58चाहते हैं
01:59यदि पिता की संपत्ती का बटवारा हो चुका है तो अलग-अलग सभी पुत्रों को स्राद्ध के कार्द को करना
02:08चाहिए
02:09इसके अतरिक्त गुरु का स्राद्ध शशुर, ताव, चाचा, मामा, भाई, बहनोई, भतीजा, सिस्स, जामाता, भांजा, फूफा, मौशा, पुत्र, मित्र, बिमाता,
02:26पिता के भाई एवं पत्नियों का स्राद्ध करने का सास्त्रों में निर्देश भी दिया गया है कि सभी
02:37इन सभी दिवंगत व्यक्तियों की पुण् तिति के दिन ही इनका स्राद्ध करना चाहिए मृत्त्ध याँ, अंतिम स्वास को उस
02:52जीव ने परित्याग किया है उसी के दिन उसका स्राद्ध कार्य शंपन्य करना चाहिए
03:01अगर तिठी घ्यात न हो तो सर्व पित्री अमावस्या के दिन स्राद्द करना चाहिए
03:07जिन व्यक्तियों की सामान एवं श्वाभाविक म्रत्तु चतुरदशी को हुई हो
03:14उनका स्राद्द चतुरदसी तिठी को कदापी नहीं करना चाहिए
03:19बल्कि पित्रपक्ष की त्रियोदशी या अमावस्या तिठी पर स्राद उनका करना चाहिए जिन व्यक्तियों की अल्पमृत्त हुई है अर्थात किसी
03:32प्रकार की दुरगटना में हुई है
03:35सर्प के द्वारा ड़तने से हुई है विश से हुई है सास्त्र के द्वारा हुई है आत्महत्या उसी व्यक्ति ने
03:45की है या अन्न किसी भी प्रकार से अस्वभाविक मृत्त हुई है तो उसका स्राद उसी तिथी पर कदाप नहीं
03:55करना चाहिए
03:56अप मृत्तु वाले व्यक्तियों को स्राद्य केवल जिनकी अकाल मृत्तु हुई है उनका स्राद्य केवल और केवल चतुरदशी तिथी पर
04:07करना चाहिए
04:08शौभाग्यवती इस्त्रियों के जिनके पती जीवित रहते हुए ही मरने वाली सौभाग्यवती जो इस्त्रियां हैं उनका स्राद केवल और केवल
04:19नौमी तिथी के दिन करना चाहिए
04:22सन्यासियों का स्राद केवल पित्रपक्ष की द्वादशी तिथी को करना चाहिए चाहे ही उनकी म्रत्व किसी भी तिथी पर हुई
04:32हो नाना तथा नानी का स्राद केवल आस्त्रिन शुक्ल प्रतिपदा को या चाहे उनकी जिस दिन म्रत्व की तिथी हुई
04:41हो उस दिन उनको स्
04:44जो आवाविक रूप से मरने वाले का स्राद्ध भाद्पद शुक्ल पोणिमा या आसिन कर्ष्ण अमावस्या के दिन करना चाहिए
04:53स्राद्ध कर्म अवश्य करना चाहिए स्राद्ध कर्म का लोप नहीं करना चाहिए
05:00चाहते हैं किसी भी तरह की कोई जानकारी या स्राद्ध के कार्य के विशय की जानकारी पिंडदान या मर्त्व के
05:08बाद के जो कार्य होते हैं आपने उन कार्यों को नहीं किया है वह व्यक्ति प्रेति योनी में चला गया
05:15है तो उसके निब्रति के लिए आप संपर्ग कर सकते ह
05:19मैं पुना मिलता हूँ नए वीडियो में तब तक के लिए आप तभी को जैजै स्रीशीता राम

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