00:05श्राद्ध विशेष किसका स्राद्ध कब करना चाहिए और कैसे करना चाहिए इसी विशेपे करेंगे चर्चा
00:13पित्र पक्ष एक प्रकार से पित्रों का सामुहिक मेला बताया गया है
00:19इस पक्ष में सभी पितर प्रत्री लोग पर आते हैं और अपने अपने सगे सम्मंधियों के यहां बिना आवाहन किये
00:27ही पहुँचते हैं
00:29तथा अपने सगे सम्मंदियों के द्वारा प्रदत्य किये हुए प्रसाद से तरप्त हो करके।
00:38पुना अपने पितर को प्रस्थान कर जाते हैं, जिसके फल्सवरूप स्राद्ध करता को अनेख प्रकारिक के सुखप्राप्त होते हैं।
00:48अता सभी को चाहिए कि स्राद्द पक्ष में पितरों की संतुष्टी है तू एवं अत्यंत त्रप्ती के लिए सुब आसिरबाद
00:58प्राप्त करने है तू
00:59मनुस्यों को अपने पित्रों का स्राद्ध अवस्य करना चाहिए
01:05जो लोग अपने पित्रों का स्राद्ध नहीं करते हैं
01:10उन्हें अनेक तरह की समस्याएं जीवन में आती हैं
01:14कई लोग स्राद्ध नहीं करते हैं
01:16और ऐसे लोग पितर जो होते हैं उनसे असंतुष्ट हो जाते हैं नाना प्रकार के दुखों का भाजन उस जीव
01:25को होना पड़ता है
01:27तो जिस म्रत पिता के एक से अधिक पुत्र हो उसमें पिता की संपत्ति का यदि बटवारा नहीं हुआ हो
01:36तो सभी संयुक्त रूपते एक जगह पर ही स्राद के काद को करना चाहिए और अगर पिता की संपत्ति का
01:46बटवारा हो चुका हो
01:48बड़े पुत्र को ही स्राद करना चाहिए अन्य भाईयों को स्राद नहीं करना चाहिए और अलग अलग स्राद यदि करना
01:58चाहते हैं
01:59यदि पिता की संपत्ती का बटवारा हो चुका है तो अलग-अलग सभी पुत्रों को स्राद्ध के कार्द को करना
02:08चाहिए
02:09इसके अतरिक्त गुरु का स्राद्ध शशुर, ताव, चाचा, मामा, भाई, बहनोई, भतीजा, सिस्स, जामाता, भांजा, फूफा, मौशा, पुत्र, मित्र, बिमाता,
02:26पिता के भाई एवं पत्नियों का स्राद्ध करने का सास्त्रों में निर्देश भी दिया गया है कि सभी
02:37इन सभी दिवंगत व्यक्तियों की पुण् तिति के दिन ही इनका स्राद्ध करना चाहिए मृत्त्ध याँ, अंतिम स्वास को उस
02:52जीव ने परित्याग किया है उसी के दिन उसका स्राद्ध कार्य शंपन्य करना चाहिए
03:01अगर तिठी घ्यात न हो तो सर्व पित्री अमावस्या के दिन स्राद्द करना चाहिए
03:07जिन व्यक्तियों की सामान एवं श्वाभाविक म्रत्तु चतुरदशी को हुई हो
03:14उनका स्राद्द चतुरदसी तिठी को कदापी नहीं करना चाहिए
03:19बल्कि पित्रपक्ष की त्रियोदशी या अमावस्या तिठी पर स्राद उनका करना चाहिए जिन व्यक्तियों की अल्पमृत्त हुई है अर्थात किसी
03:32प्रकार की दुरगटना में हुई है
03:35सर्प के द्वारा ड़तने से हुई है विश से हुई है सास्त्र के द्वारा हुई है आत्महत्या उसी व्यक्ति ने
03:45की है या अन्न किसी भी प्रकार से अस्वभाविक मृत्त हुई है तो उसका स्राद उसी तिथी पर कदाप नहीं
03:55करना चाहिए
03:56अप मृत्तु वाले व्यक्तियों को स्राद्य केवल जिनकी अकाल मृत्तु हुई है उनका स्राद्य केवल और केवल चतुरदशी तिथी पर
04:07करना चाहिए
04:08शौभाग्यवती इस्त्रियों के जिनके पती जीवित रहते हुए ही मरने वाली सौभाग्यवती जो इस्त्रियां हैं उनका स्राद केवल और केवल
04:19नौमी तिथी के दिन करना चाहिए
04:22सन्यासियों का स्राद केवल पित्रपक्ष की द्वादशी तिथी को करना चाहिए चाहे ही उनकी म्रत्व किसी भी तिथी पर हुई
04:32हो नाना तथा नानी का स्राद केवल आस्त्रिन शुक्ल प्रतिपदा को या चाहे उनकी जिस दिन म्रत्व की तिथी हुई
04:41हो उस दिन उनको स्
04:44जो आवाविक रूप से मरने वाले का स्राद्ध भाद्पद शुक्ल पोणिमा या आसिन कर्ष्ण अमावस्या के दिन करना चाहिए
04:53स्राद्ध कर्म अवश्य करना चाहिए स्राद्ध कर्म का लोप नहीं करना चाहिए
05:00चाहते हैं किसी भी तरह की कोई जानकारी या स्राद्ध के कार्य के विशय की जानकारी पिंडदान या मर्त्व के
05:08बाद के जो कार्य होते हैं आपने उन कार्यों को नहीं किया है वह व्यक्ति प्रेति योनी में चला गया
05:15है तो उसके निब्रति के लिए आप संपर्ग कर सकते ह
05:19मैं पुना मिलता हूँ नए वीडियो में तब तक के लिए आप तभी को जैजै स्रीशीता राम