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Anant Chaturdashi Puja Vidhi 2026: पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट से आरंभ होती है जो 25 सितंबर की रात 11 बजकर 06 मिनट पर खत्म हो जाएगी। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर अनंत चतुर्दशी का व्रत 25 सितंबर को रखा जाएगा।अनंत चतुर्दशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर साफ-सुथरे कपड़े पहनें। फिर इसके बाद भगवान विष्णु जी की पूजा और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु के मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें। इसके बाद पंचामृत, गंगाजल से स्न्नान करें और आभूषण अर्ति करें। फिर पीला चंदन, अक्षत, फल-फूल, तुलसी दल और भोग अर्पित करें। इसके बाद 14 गांठ सूती या फिर रेशम के धागे से अनंतसूत्र बांधे। इसके बाद घी का दीपक, धूप जलाकर भगवान विष्णु मंत्र, विष्णु चालीसा और व्रत का पाठ करते हुए आरती उतारें। भगवान विष्णु को अर्पित किए अनंत धागा को हाथ में बांधे।Anant Chaturdashi Puja Vidhi 2026: Puja Samagri,Muhurat,Bhog In Hindi...

Panchang calendar, the Chaturdashi Tithi of the Shukla Paksha (bright fortnight) of the Bhadrapada month begins at 11:18 pm on September 24th and ends at 11:06 pm on September 25th. Therefore, based on the Udaya Tithi, the Anant Chaturdashi fast will be observed on September 25th.On the day of Anant Chaturdashi, wake up early in the morning, take a bath and then wear clean clothes. After this, take a vow to worship Lord Vishnu and observe the fast. After this, install the idol or picture of Lord Vishnu. After this, take a bath with Panchamrit, Ganga water and offer ornaments. Then offer yellow sandalwood, Akshat, fruits, flowers, Tulsi leaves and Bhog. After this, tie the Anant Sutra with 14 knots of cotton or silk thread. After this, light a ghee lamp, incense and perform Aarti while reciting Lord Vishnu Mantra, Vishnu Chalisa and the fast. Tie the Anant thread offered to Lord Vishnu on the hand.

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~HT.318~PR.480~ED.484~VG.HM~
Transcript
00:03साल दोहजार चबिस में अनंत चतुरदशी का पर्व 25 सितंबर दिन शुक्रवार को मनाया जा रहा है।
00:30का दिन गणेश भक्तों के लिए भी खास है क्योंकि इसी दिन कई जगहों परगन पती बप्पा का मुख्य विसर्जन
00:36भी करते हैं।
01:00बचकर 6 मिनट तक रहेगा।
01:01ब्रमु मुहूर्थ सुबह 4 बचकर 35 मिनट से शाम 5 बचकर 23 मिनट तक अभीजीत मुहूर्थ सुबह 11 बचकर 48
01:09मिनट से दोपहर 12 बचकर 37 मिनट तक रहेगा।
01:19बात करें पूजा सामगरी की।
01:25तो इसमें भगवान विष्णु की मूर्ती या तस्वीर 14 गांठो वाला नंत सूत्र पीला कपड़ा कलश आम के पत्ते नारियल
01:32रोली अक्षर चंदन पीले फूल पंचामरत तुलसी फल पान सुपारी घीका दीपक धूप कपूर और गंगाजल शामल किया जाता है।
01:40इसके अलावा भोग के लिए 14 पूडियां और 14 पूए भी रखे जाते हैं। इसके अलावा आप मौसमे फल और
01:48अन्य प्रसाद भी भगवान को अर्पित कर सकती हैं।
02:10भी घी शहद और शक्कर का इस्तमाल करें। इसमें तुलसी दल भी जरूर रखें। भगवान विश्नु की पूजा में तुलसी
02:16दल को विश्रेश महत्व दिया गया है।
02:18ध्यान रहें अनंत चतुरदशी की पूजा अगर आप करें तो सूर्योदे से पहले नानादी से निवरत्त होकर व्रत या पूजा
02:25का संकल्प जरूर ले लें।
02:27इसके बाद शुब मुहरत में लकडी की चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिचा कर पूजा कलश की
02:32स्थापना करें।
02:33श्री लक्ष्मी नारायन या भगवान विश्नु की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें। कलश पर अश्ट दल और फूल रखें।
02:40अनन्त सूत्र का बड़ महत्व है इसलिए व्रति को कुशा सूतिय रेश्मी सूत्र में कुम-कुम हल्दी लगाकर चौदे गाठे
02:47लगानी है।
02:48इसे भी भगवान के समीप ही रख दें। भगवान विश्नु को अनन्त सूत्र अर्पित करें। व्रति को दूपदी पादी से
02:55विदिविधान से पूजा करें।
02:57पूजा में घी का दीपक जलाएं, भोग लगाएं और अनन्त चतुरदशी वरत का थाका पाठ करें।
03:27तो दान दक्षणा ज़रुतमंदों को ज़रूर करें।
03:29फिलाल इस विडियो में इतना ही विडियो को लाइक और शेयर करें। साथी चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें।

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