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Pitru Paksha 2026:हिंदू धर्म में कई संस्कारों के बारे में बताया जाता है और उनका पालन करने की सलाह दी जाती है। इन्हीं में से एक है श्राद्ध कर्म। गरुड़ पुराण में मृतक के लिए कई संस्कारों के बारे में बात की गई है जिसमें श्राद्ध को जरूरी बताया गया है। मुख्य रूप से पितृ पक्ष के 16 दिनों में पूर्वजों के निमित्त तर्पण कार्य किया जाता है। ऐसे में चलिए बताते हैं पितृपक्ष में पितरों का श्राद्ध न करने से क्या होता है?

Pitru Paksha 2026:Hinduism prescribes various rituals and advises their observance; one such ritual is Shraddha. The Garuda Purana outlines several rites for the deceased, emphasizing the importance of Shraddha. Specifically, the ritual of Tarpan is performed for ancestors during the 16-day period of Pitru Paksha. Let us now explore the consequences of failing to perform Shraddha for one's ancestors during Pitru Paksha.

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00:00कृष्णाय वाशुदेवाय हरे परमात्मने रनता क्लेशन आशाय गोविन्दाय नमुनमाद।
00:06प्यार मित्रों जैश्यारं जैमाताद।
00:08मित्रों आज आज आप से चर्चा करते हैं, पित्र पक्ष के पामन परवे चालू होने वाले हैं।
00:13पूर्वजों का स्राद्य यदि नहीं किया जाता है, तो क्या होता है? पित्र देवता रुष्ट होते हैं, और क्या-क्या
00:20हमें समस्याय हो सकती हैं, इसी विशेफे करेंगी चर्चा।
00:24गरुण पूराण के अनुशार, पूर्वजों का स्राद्य कर्म न करने से पित्र दोष जैसी स्थितियां बनने लगती हैं।
00:34स्राद्य ना करने से घर में पित्र दोष लग जाता है, पूर्वज नाराज होते हैं, और बंसजों के काद्मियों में
00:43बाधाय आती हैं।
00:45म्रतक की आत्मा को शांती और मुक्ष प्राप्त नहीं होता है
00:50हिंदु धर्म में कई संस्कारों के बारे में बताया गया
00:55और इनका पालन करने की भी सलाह दी जाती है
00:58इनी में एक कर्म होता है जिसको हम लोग स्राध्य कर्म कहते
01:03जो सूला दिन का ये पावन पर्व मनाया जाता है
01:0726 सितंबर से प्रारंब हो करके 10 अक्तूबर 2026 तक ये स्राध्य का पावन पर्व रहेगा
01:16गरुल पुरान के अनुशार म्रतक के संसकार को न करने से कई तरह की बाधाया आती है
01:25जिसमें स्राध्य कर्म बहुत जरूरी है पिंडदान, स्राध्य कर्म, पित्र तरपण इत्यादी के कारण इन पित्र पक्षों में किये जाते
01:36है
01:36पूर्वजों के निमित तरपण करना अत्यदिक जरूरी बताया गया है
01:41यह वो पवित्र समय होता है जिसमें स्राद्ध, पिंददान और तरपण जैसे रीतियों का पूर्वजों का सम्मान किया जाता है
01:53कई लोग मृतक का स्राद्य करना जरूरी नहीं समझते हैं
01:59और उनसे जुड़े हुए जो रीती रिवाज हैं
02:01उनको करना भी जरूरी नहीं समझते हैं
02:04पुर्वजों का स्राद्य दी नहीं करते हैं
02:06तो समस्याएं क्या होती हैं
02:08पित्र देवता नाराज हो जाते हैं
02:24जिसमें कैरियर में रुकावट आने लगती हैं, हम बहुत चाह करके भी कादर करते, परंतु कादर संपन्य नहीं हो पाते
02:31हैं.
02:32स्वास्ट का खराब होना, घर में किसी ने किसी विक्ति का बीमारी का बनागी रहना, स्वास्ट अच्छा ना रहना.
02:39मेहनत के बाद भी सफलता हैं प्राप्त नहीं होना, मेहनत तो बहुत करते हैं, परंतु उसका जो लाब है, उसकी
02:44जो सफलता हैं, वो हमको प्राप्त नहीं होती हैं.
02:48बिवाह इत्यादी की समस्याएं, बालक और बालिका ब्याहक की योग्यों हो जाते हैं, परंतु उनके संबंद नहीं हो पाते हैं,
02:55संबंद होते हैं तो तलाग जैसी स्थितियां बन जाती हैं, घर में बिवाद जैसी स्थितियां बनी रहती हैं, परिवार में
03:02शंतान का श�
03:16अच्छा चलते चलते अचानक रुकावटें आ जाती हैं। भूमी का सुख भी आपको प्राप्त नहीं होता। बाहन का सुख आपको
03:23प्राप्त नहीं होगा। इस तरह की बहुत सी समस्याइं पित्रों से जुड़ी होती है। इसलिए हमें चाहिए पित्रपक्ष में पित्र�
03:31पित्रों का तरपण, पित्रों के लिए फिंड़ान अवस्याइब करना चाहिए। जिस दिन उनकी इम्रत्त हुली है, उसी दिन उनका स्राद्ध
03:40कर्म करना चाहिए। अगर आप चाहते हैं पित्र तरपण करना, पित्रों का पूजन करना, आप देश में रहते हैं, विदे
03:48इसमें रहते हैं, कहीं पर भी रहते हैं, आप शंपर करिएगा, मैं पुना मिलूँगा नए वीडियो में, तब तक के
03:54लिए आप सभी को, जैस्त्री कृष्णा

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