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वीडियो जानकारी: संत सरिता - 11.10.2026

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Transcript
00:0016 साल के करियर में मेरा तीसरा एशन गेम्स था
00:05तीनों एशन गेम्स में हमेशा मैं क्वार्टर फाइनल तक जा के हरो
00:10जिसके चलते मेरा शरीर और मेरा मस्दिश चाहा कर भी रिस्क के के लिए नहीं जा पारा है क्योंकि मैं
00:15अलाव ही नहीं कर रहो
00:17एक बात बताओ, soft tennis खेलते हो, तुम्हें तो जब भी court पर उतरना है तो तुम्हारे लिए तो match
00:24है
00:24तुम्हारे लिए तो match है, match ही है न, तुम हो, तुम्हारा racket है, ball है और सामने opponent है,
00:31इधर referee बैठा होगा
00:32कभी audience होती होगी, कभी नहीं होती होगी, ठीक है, यही है न, अगर आप यह बोल रहे हो, कि
00:38tournament का एक match तुम्हारे लिए खास हो गया
00:41तो इसका मतलब बाकी सब matchों में क्या कुछ कमी रखी थी, कमी तो नहीं रखी थी न, पर एक
00:48को खास बनाओगे, तो दूसरे अपने आप कम खास हो गए न, एक को खास बनाने का मतलब ही है,
00:54अगर कुछ एक है, जो extraordinary है, तो बाकियों को तुमने क्या बना दिया, just two ordinary, जो आ�
01:11संभवी नहीं रह जाएगा, ये कहना कि मेरे लिए कोई खास match ज्यादा जरूरी है, क्योंकि मेरे सामने तो जब
01:17भी कोई opponent आया, कोई court आया, कोई tournament आया, मैंने तो अपना शत प्रतिशत ही दिया है, और एक
01:24सौ से आगे है, कुछ होता नहीं, मैंने अपना कितना दिया है, ए
01:41कोई भी कितना दूँगा, तो अब कोई extra pressure आयेगा ही नहीं, क्योंकि मुझे कुछ extra achieve करना ही नहीं
01:46है, मैं पहले भी वही करता था, आज भी वही कर रहा हूँ, कोई पहले opponent आता था, मैं उसको
01:51भी देता था 100%, और आज ये opponent आया है, middle का सवाल है, ठीक है, लेकिन इसको भी 100
01:56%
01:57तो दूँगो, इस 100% से अधिक देने के लिए मेरे पास कुछ है ही नहीं, लेकिन अगर, मैंने पहले
02:03कुछ छुपा के रखा था, 85, 90 तक अपने को रोक कर रखा था, तो सिर्फ तब अब सवाल उठेगा,
02:10कि अब extra pressure है, अब कुछ और निकालो, ज्यादा करते हैं, वरना ज्
02:15सवाल तुम्हारे सामने बताव आता कहां से, आई नहीं सकता ना?

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