00:00प्रकृति ने कोई नियम बनाया है कि अगर लड़की दस बजे बारे बजे बाहर है तो वो करेक्टर खराब कर
00:04रही है।
00:07जितने जानवरे सब रात में घुस जाते हैं अपनी अपनी घुफा में तो सबसे चरित्रवान तो वही हुए।
00:13रात में जाके अपनी घुफा में कि अपने घुसले में घुसना यही चरित्र की निशानी है।
00:19तो जो मादा सुवर है उससे चरित्रवान और कौन है। कि है।
00:24और कवी। रात में नहीं सुनोगे उसे काउं काउं करते।
00:29उधर सूरज ढला वह उधर दुबग गई। तो क्या उसका केरेक्टर है।
00:34जबरदस्त। यह सब बातें उस समय की हैं।
00:39जब आपको पराश्रित रहना ही रहना था। और जब आप पराश्रित हो।
00:45तो आपकी फिर समाज के लिए एक ही एकनॉमिक वैल्यू होती है।
00:51चाइड।
00:51एक ही आपके पास फिर प्रोड़क्टिव रिसोर्स होता है।
00:54वूम।
00:55और कुछ हद तक आपके हाथ पाऊं जिनसे आप पदी की सेवा करते हो।
00:59खाना बनाते हो, सफाई करते हो।
01:01पर सेवा सफाई का काम कोई और भी कर देता।
01:03एक मात्र जो आपके पास प्रोड़क्टिव रिसोर्स हुआ करता था वो था गर्म।
01:08और वो प्रोड़क्टिव रिसोर्स इंशूर्ड रहे, अनुबंधित रहे।
01:15इसके लिए ये चरितर का सिधांत कल्पित किया गया।
01:19आपको समझ में नहीं आ रही है बात।
01:21ये स्त्री के लिए नहीं, मानव मात्र के लिए बहुत अपमान की बात है
01:25कि किसी मनुश्य की देह का क्या होना है, ये कोई दूसरा मनुश्य तै करे।
01:31अगर आपकी मुक्ति की कीमत ये है कि आप चरितरहीन कहलाएं, तो सर उठा के कहिए, हाँ मैं हूँ चरितरहीन।
01:49समाज से आगे निकलना हो तो समाज से इज़त मांगना तो बिलकुली बंद कर दो।
01:55क्या हुआ हुआ हुआ हुआ है