00:00मजबूर तो पूरा हिंदुस्तान था भगत सिंग मजबूर थे क्या मजबूर है हम क्या कले मनमी ने मलागी है रोते
00:08रो मजबूरी का रोना जिनने करना है वो कर लेते हैं मैं क्या कलती मुझे वो जबलदत्ती मेली था दी
00:14तल दी
00:17अरे जवानों मजबूतों उठो भाग जाओ अपने आपको यह सांतों ना देना बंद कर दीजिए कि आप मजबूर हैं कोई
00:29मजबूर नहीं होता
00:32बुरे से बुरा क्या होगा आजादी के लिए पर फैलाओगे फड़़ड़ा के उड़ जाओगे तो मरना पड़ेगा तो ठीक है
00:40अगर यही आखरी मजबूरी है तो यह भी ठीक है कोई बात नहीं लेकिन गुलामी नहीं वंजूर है
00:49नजाने कितने थे जो शान से मरे तब आज हमें राजनातिक आजादी भी मिली है
00:57मजबूरी का रोना रोने लग जाते तो कुछ भी ज़रूरी नहीं था ना गांधी का सत्यागर ना लाजपतराय को सर
01:03पे लाठी खानी ज़रूरी थी
01:05कुछ भी ज़रूरी नहीं था बगास सिंग सुख्दे और राजगुरू ज़रूरी था चंदर शेखर आज़ाद ना जाने कितने आप थोड़ा
01:14इतिहास पढ़िए आप भौचक के रह जाएंगे
01:16कितने ही युवा सुत्मृता से नानी थे जिनको अंग्रेजों ने ये तक कहा कि हम तुम्हारा सम्मान करते हैं तुम
01:23युवा हो हम तुमको लंडन में पढ़ने के लिए भेजेंगे अपने खर्चे पर और हम तुम पर कोई दबाव नहीं
01:32बना रहे तुम्हें जैसे जीना ह
01:34तुम्हें जो वितारधारा रखनी है रखो बस सशस्त्र क्रांति मत करना तुम मुझ से कुछ बोलना भी चाहते हो तो
01:39बोल लेना तुम मखबार में लिखना चाहते हो लिख लेना बस यह मत करना कि तवच चला रहे हो उन्हों
01:45ने का नई अंग्रेजों ने का फिर जान जा�
01:52होती है बोलो मजबूरी क्या होती है बोलो तो क्या मजबूरी का रोना रो रहे हैं