00:00आपसे बहुत नाराध है सर
00:03हमारी तो सनरक्षना ही ऐसी होती है कि जब मुर्गा खा सकते हैं बकरा खा सकते हैं
00:07कैसे?
00:10जैसे मेरे दाथ, मेरे दाथ, किनाइन दाथ, नुकीले दाथ
00:15तो अगर मुझे सिर्फ फलाहार ही करना होता है
00:19तो मेरे दाथ लुकीले क्यों होते है।
00:49क्या करा जाना चाहिए।
00:52तो फिर इंसान ने अपने लिए शोचाले बनाया है।
00:54कुट्य नहीं जाते हैं शोचाले आम तोर पे।
00:57क्या तुम वो सब कुछ करोगे जो तुम अपने शरीर के किसी यंग से कर सकते हो।
01:02यह कैसा तरक हो। तुम दोनों यहीं पर थूकना शुरू कर दो।
01:04और बोलो मुझे उपर वाले ने मूह दिया है थूकने के लिए तो मैं थूकूंगा ना।
01:09यह क्या बात है। क्या सा तरक है यह।
01:12बुद्धी भी तो दिये। बुद्धी नहीं लगाओगे।
01:15जिस उपर वाले की दोहाई दे रहे हो उसने तुमको सिर्फ दात ही दिये गया और हाथ ही दिये यह
01:20किसलिए दिया है।
01:22इसके कब लगाओगे।