00:00तो पहला तपका जो बाबा जी का है जो काला चोंगा पेनेंगे, माथे पे काला पट्टा बानेंगे, उनके हाथ में
00:07एक मोर पंक रहेगा, एक डंडा या चाबुक भी हो सकता है, धुआ चलता रहेगा, दूसरे तपके पे हम जाते
00:16हैं जो जोतिशों से आकरशित है, जो बा�
00:29उन बाबाओं को दो कोड़ी का गुशित किया होगा, लेकिन खुद अंदविश्वास में हैं, लेकिन हम उनके लिए बोलते कि
00:35हम अंदविश्वास में नहीं हैं, पंडित जी कुंडली खोलेंगे, जोतिशों से पत्रा खोलेंगे, फिर उन्होंने कहा कि 85,000 रुपे
00:43का गो
00:43मोद लाओ, पुखराज लाओ, वो पेनो, और उन्होंने जिसके पास में वो गए हैं, पत्रिका लेकर के, उन्होंने खुद में
00:51पूरी दस उंगलियों में 20 अंगूठियां पेहनी हुई हैं, और उन्होंने क्या एक वो बना करके रखा हुआ है, नीचे
01:04कुछ और बाबाब
01:13है, या पूरा पीला है, या पूरा सफेद कर रखा है, ऐसा उन्होंने वेशबूशा बना करके रखा हुआ, इनके पास
01:21जाते हैं, जो तिशो को देखें, तो इन लोगों ने ये अंगूठियां मोटे-मोटे, वो हीरे, वो हीरे, खुद भी
01:26पेहने हैं, दूसरों लोगों क
01:31के पास जाएंगे, तो वो इन दोनों को कॉम्बिनेशन ले करके चलते हैं, और जो इंग्लिश स्पीकिंग बाबा के पास
01:38में जा रहे हैं, जो लोग जो की highly qualified हैं समाज में, वो इन दोनों को ब्योकूफ बोल रहे
01:45हैं, और मैं तो इन तीनों को तबकों को अंदविश्वास
02:03हैं, तो यह बात बाबाओं को भी पता है, कि इनसान के भीतर जाकने की तो किसी की हैसियत ही
02:10नहीं, और हर आदमी बस छिलका देख करके निर्णाय कर लेगा, तो सबके लिए आसान है, फिर कपड़े एक तरह
02:16के पहन लो, और लोगों को बेवकूफ बनाओ, कपड़ा पहन ल
02:18पूटलो आपने घा धूआ कर लो, बाल एकथ रहे कर लो, दाडी एकथ रहे कर लो, माला कर लो, कुन्डल
02:27लटका लो, अंगूठी पहन लो, धागे बांद लो, और सो तरीके की छिलके वाले � کाम कर लो, यहां पर
02:33कुछ पोटलो, यहां पोतलो, पंक पकड़लो, कोई की चि
02:48किलके के पीछे जो इनसान है उस इनसान को देखने की शिक्षा कभी दी नहीं गई