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पूरा वीडियो: दिखावे पर ही जिओगे भाई? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
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पैसा होता है स्थूल शरीर के लिए और प्रतिष्ठा होती है सूक्ष्म शरीर के लिए। पैसे से बढ़िया कपड़े मिलते हैं, खाने-पीने को मिलता है और शरीर को मज़ा आता है। लेकिन प्रतिष्ठा से मज़ा शरीर को नहीं, भीतर के मन को आता है। यही दो हैं जिनमें नहीं फँसना। यही आध्यात्मिक आदमी की निशानी है कि न वो पैसे में फँसता है, न प्रतिष्ठा में।

वीडियो जानकारी: 29.10.22, वेदांत महोत्सव, ग्रेटर नॉएडा

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Transcript
00:00ना किसी से पैसा लो ना किसी से इज़त लो बहुत आजाज जी होगे इत्दम सरल सूतर ना ना किसी
00:06से पैसा लेना है ना किसी से प्रतिष्ठा लेनी है पैसा होता है स्थूल शरीर के लिए प्रतिष्ठा होती है
00:12सूख्ष्म शरीर के लिए पैसा मिल जाता है तो इसको बहुत
00:27फसना यही आध्यात्मिक आदमी के निशानी हैं ना वो पैसे में फसता है ना प्रतिष्ठा में फसता है

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