00:00लोग दिन भर दोड रहे होते हैं
00:03पार्क्स हमारे यहां भी हैं, दिल्ली में भी हैं, बंबई में भी हैं, कलकत्ता में भी हैं
00:07पार्क्स बाहर भी होते हैं
00:10और वहां बारा बारा बजे रात तक भी खुले हैं और लोग घूम रहे हैं, फिर रहे हैं
00:16महिलाएं भी फिर रही है और अबादी बहुत ज़्यादा नहीं है तो ऐसा नहीं बहुत ज़्यादा लोग है
00:20तूर दूर पे कोई एकाद आत्मी दिखाई दे रहा है बाकी पेड़ी पेड़ है पेड़ी पेड़ है
00:25और रात में 9 बजराय, 10 बजराय, 11 बजराय
00:30हमारे हाँ तो रात में 9-10 बज़े अगर कोई महिला किसी सुनसान पार्क में घुस गई
00:34तो हो गया पर
00:38वहाँ पर दौर लगा रही है
00:41रात में 2 बज़े, 4 बज़े जिसको जब समय मिला
00:45दौर लगाई जा रही है
00:47और पार्क में ही नहीं, सडकों पर
00:49सडकों में, गलियों में दौड रहे हैं
00:52कोई किसी को घूर नहीं रहा
00:55हमारे हाँ अप जॉग वियर या ट्रैक सूट में
01:00भरी सडक पर दौड जाईए
01:02पूरा शहर दौडेगा
01:04आप प्रिरणा बन जाएंगी
01:08जो लगवा गरस्त हो
01:10जिन्दगी में हिले नहों
01:11तीछे मुड़ के देखेंगी वो भी दौड रहे होंगे
01:17शम्शान से मुर्दे उठके दौड रहे है
01:20और हमें ये सब सामानने लगने लग जाता है
01:23हमें लगता ऐसा तो होता ही है
01:24आप कोई लड़की ऐसे
01:26इतने चुस्त कपड़े पहन करके
01:28दौड़ेगी सडक पर
01:30तो बोईज लभी बोईज
01:31मर्द जात है भई पीछा तो करेंगे न
01:36नहीं
01:37ऐसा नहीं है
01:38कोई नियम नहीं है
01:41ये बस बत्तमीजी है
01:44इसमें मर्द जात वाली कोई बात नहीं है
01:46जेनिटिक कंपल्जन नहीं है
01:48ये नाधिकार चेष्टा है
01:53ये सोशल सिविक वाइलेशन है
01:58जो कि बहुत जगहों पर नहीं भी होता है
02:01तो इसी सिद्ध होता है कि
02:04आवश्यक नहीं है
02:05अनिवार नहीं है
02:06माने आप कर रहे हो तो ये
02:08आपका चुनाव है
02:12चुनाव बदला जा सकता है
02:13चुनाव पर सवाल उठाए जा सकते है