00:00सब मेरे एक क्वेश्चन है कि अगर कोई वीक है और वो अपने लिए स्टांड नहीं ले पा रहे हैं
00:04तो उसे तो मजबूरन समाज का इससा बनना ही पड़ेगा और जैसा लोग जाहेंगे वैसे करना पड़ेगा
00:09वीक कोई नहीं होता है नलायक होते हैं
00:19मज़ा आता है दूसरों पर आश्रित रहने में तो इदा मिलती है स्वार्थ होता है चिडिया कह रही है सोने
00:27की सलाखे हैं खाने को भी अच्छा मिल जाता है
00:31और कोई गिद्ध बाज चील आकर के हमला भी नहीं कर सकते
00:34पिंजड़ा बढ़िया चीज है
00:37पिंजड़ा बढ़िया चीज है
00:40और फिर बोलती है मैं क्या करूँ
00:43मैं तो मजबूर हूँ
00:44तु मजबूर नहीं है तुने सौदा करा है
00:48दर्शन में विवश्टा जैसा कोई शब्द नहीं होता
00:52चुनाओ का शब्द होता है चुनाओ
00:56जिस दिन भीतर से आग उठेगी कि ऐसी जिन्दगी नहीं जीनी
01:00सारी मजबूरियां जल जाएंगी
01:04और जिनको मौज आ रही है मजबूरी का जीवन जीने में
01:08वही उम्र भर मजबूर पड़े रहते हैं
01:11ताकत आपके ही पास है आप भूल गए हो क्योंकि आपने कभी उसका इस्तिमाल करा ही नहीं है
01:17तो उसका अहवान करना पड़ता है
01:19इन्वोकेशन करना पड़ता है
01:21और कैसे करा जाता है
01:23किसी सार्थक उद्यम में जूज करके
01:27ओ ये काम सही है
01:29अब मैं इससे पीछे इसलिए नहीं हट सकता
01:30कि मैं तो कमजोर हूँ अभी मेरे पास ताकत नहीं है
01:33संसाधन नहीं है
01:34मैं पीछे नहीं हट सकता
01:35काम सही है तो डूबूँगा
01:37और जब डूबो
01:39तो एक जादूई चमतकारिक तरीके से
01:42पाते हो कि ताकत कहीं से आ गई
01:44तुम भी हैरान रह जाते हो
01:46कि मुझे में इतनी ताकत आ गई
01:47मैं स्टेंड ले पा रही हूँ
01:49मैं तो अपने आपको टिमिड टाइनी फीबल
01:52समझती थी
01:54अबला नारी
01:56इतनी भारी
02:00ये कैसे हुआ मेरे साथ
02:02मुझे में इतना दम कहां से आ गया
02:04वो तुम्हारा दम नहीं है
02:06वो तुम्हारे सार्थक लक्षे का दम है
02:09जंदगी में सही लक्षे बनाओगे
02:11अपने भीतर बहुत ताकत पाओगे
02:13वो लक्षे तुम्हें ताकत दे देगा