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वीडियो जानकारी:

प्रसंग:


संगीत: मिलिंद दाते
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Category

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Transcript
00:00स्पोर्ट्स में जैसे मैं बैडमिंटन कोशिश करती हूँ और अभी जैसे जिम भी जा रही हूँ तो अब भी चीज
00:05समझा रही थी कि कहीं न कहीं खुद को बचा रही हूँ
00:09बॉडी तो अपने आपको थोड़ा बचाती ही है पर हम लोगों के मामले में बॉडी को जबरदस्ती प्रोटेक्ट और प्रिजर्व
00:19करने की कोशिश वाली बॉडी नहीं है और अहंकार देभाव में जीता है ना तो वो बॉडी को उतना ज्यादा
00:27बचाना चाहता जितना तो �
00:28बॉडी भी नहीं बचना चाहती बॉडी ने कभी कहा है क्या कि शरीर में 35%
00:33फैट होना चाहिए आप जंगल चले जाएए वहां पर सब जानवर फिट होते हैं
00:38वहां कोई जिम नहीं जाता पर सब फिट हैं क्योंकि बॉडी प्राक्रतिक रूप से वो
00:43चाहती है कि वह शेप में रहे फिट रहे यह बॉडी को खराब करने काम भी कौन कर रहा है
00:47इगो ही कर रही है
00:49फिट होने के लिए भी एक स्थर के बाद स्प्रिचूल होना जरूरी है जो इगो को नहीं समझता उसका शरीर
00:59खराब होना लगभग निष्चित है इसका मतलब यह नहीं है कि जितने लोग फिट बॉडी वाले हैं उस सब स्प्रिचूल
01:04हैं
01:06शरीर को जबरदस्ती की सुरक्षा मत दो, जितनी सुरक्षा शरीर को चाहिए, वो अपने आप मांग लेगा, और आपके पास
01:14वो अकल, वो विवेक होना चाहिए, कि आप पता कर पाओ, कि सुरक्षा की मांग शरीर से आ रही है,
01:19कि हंकार से आ रही है, अगर शरीर कह रहा है, क
01:34शरीर बोल रहा है कुछ खाना है तो सुन लो पर हंकार बोल रहा है कुछ चबाना है तो मत
01:38सुनो और आपके पास तो कान होना चाहिए जो इन दो आवाजों में फर्क कर पाए हंकार कह रहा है
01:44कि कुछ मिल जाए बढ़िया सा लजीज तो जिंदगी में थोड़ी रौना का जा�
02:00रहा है हंकार कर रहा है शरीर को ले करके दोनों दिशाओं से आवाज हो सकती हैं फर्क करना फर्क
02:06करना

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