00:00परतमान समय किसी भी एनने समय कि अपेक्षा इसलिए ज्यादा खातर ना आगए आप बिलकुल गलत जी सकते हो फिर
00:05भी ऐसा लग सकता है कि आप सही जी रहे हो यह पहले संभव नहीं था पहले पोल ज्यादा आसानी
00:13से खुल जाती थी अब पोल खुलना बड़ा मुश्किल है
00:16आप बिलकुल एक गलत जी रहे हो फिर भी आपको सोतरे के मुनरंजन के साधन मौजूद हैं सांतोनाई मौजूद हैं
00:26रिट्रीट्स मौजूद हैं डिस्ट्रेक्शन्स मौजूद हैं आपको जो चाहिए आपको मिल जाएगा मेडिकल कवर मौजूद है सोशल कवर मौजू
00:45है ये होने नहीं वाला और एक philosophy भी मौजूद है जो कहती है कि truth जैसा कुछ होता ही
00:51नहीं मामला post truth तक जा चुका है तुम कैसे कह रहा हो कि मैंने गलत जिंदगी जी जो तुम्हारे
00:58लिए गलत हो मेरे लिए सही है तुम्हारा सच अलग मेरा सच अलग तो तुम होते कौन हो ये
01:05कहने वाले कि मैंने गलत जिंदगी जी मैं कोई नहीं होता कहने वाला पर अपनी शक्ल से पूछो अपनी आखों
01:11से पूछो अपनी नियत से पूछो अपनी इमान से पूछो बात समझ रहे हैं