00:00अचारा जी दोस्तों के बीच पार्टी मोज मस्ती सब होती है लेकिन अंदर ही अंदर एक गुटन सी मैसूद होती
00:06है
00:06संगत बदलने की कोशिश करिये उससे कुछ फर्क पड़ता है
00:12बहुत समय ऐसे ही लोगों के साथ रहोगे ना
00:17जिन्होंने सलाखों से यारी कर लियों तो यह धारण और द्रण हो जाती है
00:24कि आजादी जैसा तो कुछ होता ही नहीं और वैसे जानवरों में पक्षियों में भी यह देखा गया है
00:31उन्हें बहुत समय तक कैद और गयरा में रखो तो वो अपनी प्राकृतिक गति भूल जाते हैं
00:36उनको आप फिर रहा भी करो ना तो उनको समझ भी नहीं आता कि आप करें गया
00:40तो फिर यह देखा गया है कई बार कि जब उन्हें उन्हीं की प्रजाती के लोगों का संपर्क मिलता है
00:47संगत मिलती है तो फिर ओ धीरे धीरे अपना पुराना व्यवहार याद करने लगते हैं
00:55पुराना व्योहार मने जो भी उनका मौलिक व्योहार है
00:58आप भी अपनी मौलिकता को भूल गए हैं
01:01क्योंकि आपने बहुत हजीब लोगी संगति कर लिये
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