00:15पिछड़े अभी तो हम बस कर पर सौ जियोंगी मैं कहा
00:33पिछड़े अभी तो हम बस कर पर सौ जियोंगी मैं कहा है
01:00गुलुकारा रेश्मा ये कहानी सिर्फ एक गुलुकारा की नहीं है
01:03बलकि एक ऐसी खनक्ती और पुरदर्द आवाज की है
01:06जिसने सरहदों और जुबानों की कैद से आजाद होकर
01:09पूरी दुनिया को अपना दिवाना बना लिया था
01:11एक ऐसी साथगी जिसने मौसीकी की तारीख में अपना नाम हमेशा के लिए अमर कर दिया
01:16चलें इस सफर का आगास करते है
01:19जरा मशूर भारती सहाफी फरजाना वर्सी के एन अलफास पर गोर करें
01:22एक ऐसी गायल आवाज जिसमें दर्द ही कीट पन गया
01:26ये कोई मामूली खराजय तैसीन नहीं है
01:28ये रेशमा की गायकी की बिलकुल सची और गहरी अकासी है
01:31जब मुगाती थी ना तो ऐसा लगता था जैसे उस सिर्फ गान ही रही
01:35बलकि अपने दिल का सारा दर्द और जिंदगी का पूरा निचोड सुनने वालों के सामने रख रही है
01:40तो फिर यहां ये सवाल पैदा होता है
01:43कि आखिर ये बुलबले सहरा दरसल थी कौन
01:45मतलब ये सोचकर ही हरानी होती है कि किस तरह एक खाना बदोश कबीले से तालुग रखने वाली बच्ची
01:51जिसने कभी कोई रस्मी तालीम हासल नहीं की और नहीं किसी उस्ताज से मौसीखी सीखी
01:55वो आगे चल कर एक ऐसा ग्लोबल आइकन बन गई जिसकी इज़त दुनिया भर में होती है
02:01ये नामुम्किन सा सफर शुरू कैसे हुआ
02:03हमारा पहला हिस्सा है सहरा की छूपी हुई आवाज और उनकी सादा खाना बदोशाना शुरूआत
02:10इस लेजिन को समझने के लिए हमें बिल्कुल शुरू में जाना होगा
02:13साल उनीस सो सिन्टालेस वरै सकीर की तक्सीम का वो हंगामा खेज़ वक्त
02:17जब राजस्तान के इलाके बीका नेर में रेश्मा की पैदाईश हुई
02:20वो बमश्किल एक महीने की होंगी जब उनका खांदान हिज़त करके कराची आ गया
02:24अब उनका बच्चपन आम बच्चों जैसा तो था नहीं
02:27साठ की दाही के आगाज में वो अपना अजादतर वक्त सूफी बुजर्गों के मजारात पर धमाल काते हुए गुजारती थी
02:32वहीं से उनकी आवाज में वो रुहानियत और कहराई पैदा हुई
02:35अब यहां एक बहुत दिल्चस्प बात है
02:38इनका तालोक एक बंजारा कबीले से था
02:40यह बंजारे बुनियादी तोर पर राजिस्थान के इलाके की एक तारीखी खाना बदोश बरादरी है
02:45और कमाल की बात यह है कि इतनी शोहरत मिलने के बाद भी
02:48रेश्मा ने कभी अपनी इन जड़ों को नहीं चुपाया
02:50बलके हमेशा बड़े फखर से अपना तारूफ करवाया
02:53इसी बंजारा पसमंजर और सहराई जड़ों की वज़ा से ही तो उन्हें प्यार से बुलबुले सहरा का आ जाता था
02:58आगे बढ़ते हैं दूसरे हिस्से की तरफ
03:01मजार परूं की दर्याफ़त
03:02जो कि बस एक खुशगवार इतफाक था
03:05हर कहानी में एक टर्निंग पॉइंट होता है
03:07और रेश्मा की जिंदिगी में ये मोरता बाया
03:09जब उनकी उम्र सिर्फ बारा साल थी
03:11जी हाँ, सिर्फ बारा साल
03:13जरा तसवर करें
03:15इस उम्र में जब बच्चों की आवाज बिलकुल कच्ची होती है
03:17रेश्मा की आवाज में एक ऐसी कड़क
03:19एक ऐसा कच्चा बन
03:21और इतनी हैरत अंगेस ताकत थी
03:23जो सीधा दिल चीर कर गुजर जाती थी
03:25और ये मोर्जा दर्याफ़त कैसे हुआ
03:27पिलकुल लितफाक से
03:28मशूर टीवी और रेडियो प्रोड्यूसर सलीम गिलानी साब
03:31लाल शवास कलंदर के मजार पर गए हुए थे
03:33वहाँ उन्होंने इस नौजवान लड़की को
03:35पूरी लगन से गाते सुना
03:36और फॉरन समझ गए
03:38कि ये कोई आम आवाज नहीं है
03:39वो उस बच्ची को रेडियो पाकिस्तान की स्टूडियो ले आए
03:42एक ऐसी बच्ची जिसने कभी स्टूडियो देखा तक नहीं था
03:45उसने वहाँ अपनी जिंदगी की पहली रिकॉर्डिंग करवाई
03:47लाल मेरी पत
03:49और बस रातों रात पूरे मुल्क में इनकी आवाज का जादू चल गया
03:53तीसरा हिस्सा है उनका बेमिसाल लोक अंदाज
03:56जहां फितरी सलाहियत ने रस्मी तरभियत को मात दे दी
03:59ये एक बहुत ही जबरदस दजाद है
04:01एक तरफ रेश्मा थी जिनके पास ना स्कूल की टीगरी थी
04:04और ना ही मौसीकी के किसी उस्ताद की कोई क्लासी की तरभियत
04:07और दूसरी तरफ
04:08उनका कमाल ये था कि उन्हें अकूस्टेक्स यानि सौतियात की मुकमल समझ थी
04:14मजारों की खुली हवा में गाने की वजह से
04:16उनकी आवाज में इतनी भरपूर और कुदरती ताकत आ गई थी
04:19कि उसने हर किसम की अकैडमिक और रस्मी तरभियत को बहुत पीछे छोड़ दिया
04:23इसे कहते हैं खालिस कच्चा टालेंट
04:26और उनके गाने मतलब एक से बढ़कर एक शाहकार
04:30उन्होंने पंजाबी, सिंधी और राजिस्तानी में ऐसे गीद गाए
04:34जो आज हमारी सिकाफत का लाजमी हिस्सा बन चुके है
04:36लाल मेरी पत्छो, दमादम मसकल अंदर, हाई और अरभा
04:40या फिर वो सदा बहार गीद अक्यानु रहन दे और लंबी जुदाई
04:44ये सिर्फ गाने नहीं हैं, ये वो तराने हैं जो नसल दर नसल सफर कर रहे हैं
04:48और आज भी हमारे दिलों में बसते हैं
04:50चौता हिस्सा, दोनों से सरहदें पार करना
04:53कैसे उनकी आवाज ने दो मुख्तलिफ सकाफतों को जोड़ दिया
04:56आपको मालूम है उनकी आवाज सिर्फ पाकिस्तान तक मैदूद नहीं रही
04:59शुरू में पाइरेटेड आडियो कैसेट्स के जरीए उनकी आवाज सरहत पार पहुंची
05:03और फिर भारत में भी तहलका मचा दिया
05:051973 में राज कपूर ने अपनी फिल्म बॉबी में उनका गाना अखियानू रहन देशामिल किया
05:10फिर तरासी में सुभाश कई कि फिल्म हीरो का वो आइकॉनिक गाना लंबी जुदाई
05:14उसने तो रिकॉर्ड्स ही तोड़ दिये
05:16यहां तक के 1980 की दहाई में उस वक्की भारती वजीर याजम इंदरा गान्दी की खसूसी दावत पर रेश्मा ने
05:22भारत जाकर लाइफ पर फॉर्फॉर्म भी किया
05:24यह होता है सच्चा फन जो सरदों की कैद नहीं मानता
05:27लेकिन इतनी बेपना शोहरत और पैसा मिलने के बावजूद क्या वो बदल गई बिलकुल नहीं
05:33और इस बात का सुबूत हमें इस एक छोटे से वाके से मिलता है जो बहुत कमाल का है
05:382006 की बात है रेश्मा एक ग्लोबल सूपरस्टार बन चुकी थी
05:41वो चातीन तो चार्टर तयारों में सफर कर सकती थी लेकिन जब उन्हें अपने खांदान को अपने आबाई गाउं इंडिया
05:47लेकर जाना था
05:47तो उन्होंने क्या किया उन्होंने इंतहाई सादगी से लाहौर से अमरिसर जाने वाली आम पैसंजर बस की बिलकुल साथ सीटें
05:54बुक करवाई और बस में सफर किया
05:56ये वाकिया साबित करता है कि दहाईयों की शोरत ने भी उनके अंदर की उस सादा दर्वेश सिफ्थ औरत को
06:01कभी मरने नहीं दिया
06:03और अब हम अपने आखरी हिस्से की तराफ आते हैं एक अमर विरसा लेजन को याद करते हुए
06:09उनकी अजीम खिद्मात को सराते हुए 1982 में उन्हें Pride of Performance और 2008 में बावकार सितारा इम्तियास से नवाजा
06:16गया
06:16लेकिन उनकी जिंदगी का आखरी हिस सब बड़ा कठन था
06:19असी की दहाई में ही उन्हें गले का कैंसर हो गया था
06:22जरा सोचें एक गलू कारा जिसकी पहचान ही उसका गला है उसे गले का कैंसर हो जाए
06:27लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दहायों तक गाती रही
06:30बिलाखिर एक तवील और बहादराना जंग लडने के बाद
06:343 नवेंबर 2013 को ये अजीम आवाज लाहूर में हमेशा के लिए खामोश हो गई
06:40उनके साथी फंकारों के दिलों में उनके लिए जो इज़त ही वो कमाल थी
06:43जुनून बैंड के साबिक गिटारिस्ट सल्मान एमद ने उनके बारे में बजजा तोर पर कहा था
06:48कि एक ऐसी पुर्जोश आवाज थी जिसका तालोक इस दुनिया से महसूस ही नहीं होता था
06:52और वाकई वो एक ऐसी रूपरवर आवाज थी जिसका नेमल बदल शायद हमें फिर कभी देखने या सुनने को ना
06:58मिले
06:59तो आखिर में एक सवाल जो हमें अपने आप से पूछना चाहिए वो ये के ब्रेश्मा की मौसीकी की वो
07:04खालिस, कच्ची और बेसाखता रूप हमारी आने वाली नसलों के फनकारों को कैसे मतासिर करेगी
07:10बेशक वाज हमारे दर्मयान नहीं है
07:11लेकिन बुलबले सहरा के गायवे गीत हमेशा फिजाओं में जिन्दा रहेंगे और दिलों के तार छेड़ते रहेंगे
07:17क्या हम इस वरसे को उसी महबबत से संभौल पाएंगे
07:20इस बारे में जरूर सोचिएगा
07:21आज के इस मालूमादी सेशन में हमारे साथ चामिल होने का बहुत बहुत चुक्रिया
07:27अक्खिया नुरेन दे
07:33अक्खिया दे को लिको
07:42चैन्ने परे देशिया
07:52बोल भॉने नुरू
08:10अक्खिया नुरू
08:13झाल
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