00:00मेरा दोस्त, जाते आते मुझसे बोल कर गया कि मेरी मा से मिलते रहना, बीच बीच में जाता हूँ उनके
00:07पास, कल गया था गुडगा हूँ, यहाँ पहुंचने में तीन घंटे लग गए, आम तोर पर जिसे आम जीवन कहते
00:15हैं, उससे मेरा वास्ता होता नहीं, मुलागात होत
00:20ही नहीं, पर यह तीन घंटे, यहाँ साड़े-चार बुए शाम को निकला था, वहाँ पहुंचा हूँ, बाबर एक, यही
00:27पूछ रहा था, लोग बचा क्या रहे हैं, मैं लोगों की शकलें देख रहा था, और क्या रहा था, तो
00:33क्या बचा रहे हो, वो इनसान है, वो पिछ
00:50हुए जाम में, एक के बाद एक जाम, एक के बाद एक जाम, और गंदगी, गंदगी, गंदगी, यह है वो
00:57जिन्दगी जिसको आप बचाना चाहते हो, इस जिन्दगी की खातिर आप मुक्तिक का अमंत्रन ठुकराते हो, क्या है आपकी जिन्दगी
01:08में जो बचाए पड़े ह
01:09तो क्या है? है क्या?
01:14और वो जब बाइक भी है वो स्वासो सीसी की है
01:18उस सच पूछो तो वो मोटर साइकल कहलाने लायक भी नहीं है
01:21और मैं किसी की गरीबी का मजाग नहीं उड़ा रहा हूँ
01:24हमारी गरीबी भी है हमारे साइकलोजिकल केंदर की रक्षा के लिए
01:31क्योंकि जिंदगी बदल सकती है
01:34जिंदगी में पैसा भी बढ़ सकता है
01:36पर अहंकार अकड़ हुए बहुत बड़ा
01:39आप यह मत सोचिएगा कि अमीरी से अकड़ आती है
01:46मेरा अनुभविय है अमीरों से ज़्यादा अकड़
01:50मध्यमवर्ग निम्न मध्यमवर्ग और गरीबों में होती है
01:53बहुत अकड़ होती है
01:55दुर्दशा पूरी है पर अकड़ दुर्दशा से भी ज़्यादा गहरी है
01:59हम ऐसे हैं पर ऐसे ही रहेंगे
02:01बरबाद हो जाएंगे मर जाएगा आदमी सड़ सड़ के मर रहा है
02:05पर वो अपने धर्रे बदलने को तैयार नहीं है
02:09किसकी रक्षा कर रहा है, क्या बचाना चाह रहा है
02:12आप में इसे कितने लोग ऐसो को जानते हैं
02:14जो बरबाद एंगदम दुर्गति में है
02:17लेकिन फिर भी सुधरने को तैयार नहीं है
02:20यही है आत्मरक्षा