00:00जन्जी बोलती है, वो बोलती है पैदा तो हम मासूम हुए थे वो सारी गल्ती समाज किया, उसने हमें खराब
00:06कर दिया
00:07गीता उससे उल्टा बता रही है, गीता कहा रही है नहीं भाई तुम पैदा ही मोह के साथ होए हो
00:17लोगधर्म कोई बस पुरानी चीज थोड़े ही होता है
00:19लोगधर्म जो जो
00:21जो मॉडरन सेकुलर एथीजम है
00:24वो भी जबरदस्त लोगधर्म है
00:27पुराना वाला मुक्ति चाहता था
00:29तो वो विद्रोह नहीं करता था
00:31वो क्या करता था?
00:33वो पूजा आर्चना करता था
00:35तमाम तरह की साधनाएं और ये सब लगाता था
00:38आज वाला जब मुक्ति चाहता है तो क्या करता है?
00:41वो करांति करता है, शोर मचाता है, जलूस जलसा निकालता है
00:47लेकिन दोनों ही जलूस तो पहले भी निकलता था
00:50वो धर्मिक जलूस होता था
00:53और आज वाले भी जलूस निकाल रहे होते, चलो रहे सब चलो चलो चलो जलूस निकालेंगे
00:57ना पुराने जलूस से तुम्हें मुक्ति मिलनी थी, ना आज के नए जलूस से तुम्हें मुक्ति मिलेगी
01:04जहां बंधन है और बंधन बाहर यदि है तो कारण भीतरी है मुक्ति भीतर मिलेगी भीतर से इंसान जब आजाद
01:15होने लगता है तो बाहर की बेडियां अपने आप गिरने लगती है बाहर की बेडियों की सही पहचान होने लगती
01:22है और जब आदमी भीतर से ही गुलाम है तो �
01:25बाहर वो क्या करेगा, वही करेगा जो खिस्यानी बिल्ली खंबा नोचे, खंबे ने क्या बिगाड़ा कि बिल्ली का, पर वो
01:31जाकर के खंबे को नोच रही है, सोच के कि कुछ हो जाएगा,
01:36मैं नहीं कहा रहा हूँ कि बाहर से कोई ताकत आपको दबाती नहीं
01:40आपका शोशन नहीं करती होती है बाहरी ताकते जो आपका शोशन करती है
01:44पर बाहरी ताकत भी जब आपका शोशन करती है
01:46तो आप ही के भीतर के अंधेरे का सहारा लेकर आपका शोशन करती है
01:51जब तक तुम पहले उस भीतरी अंधेरे से नहीं निप्टोगे, तब तक बाहरी ताकतों को दोश देना, उनके खिलाफ शोर
02:00मचाना काम नहीं आएगा, भूलना नहीं, अरजुन के युद्ध की शुरुआ तब तक नहीं हुई, जब तक उन्हें गीता ग्यान
02:08नहीं मिल गया
02:11बाहर का युद्ध भी तुम सार्थक तरीके से तब ही लड़ सकते हो, जब पहले भीतर कुछ उजी आ रहा
02:20हो