00:00आपको अगर खुशी मनाने में बहुत रुची हो तो मैं आपको विशेश रूप से आमंतरित करता हूँ आत्मग्यान की तरफ
00:10उसमें जैसा अहलाद उठता है वो किसी भी छोटी-मोटी खुशी से बहुत उपर का है बिलकुल जमीन की भाशा
00:22में काएं तो मज़ा आ जाता है
00:23वाह वाह यह सब अपनी से ठीक है नए कपड़े खरीद लिए और मिठाईया और डबे इधर से उधर देना
00:34करना यह जो भी होता है ठीक यह आपको करना है आप करिये मुझे इसका कोई विरोध नहीं लेकिन अगर
00:40असली मौज चाहिए तो वो दिया जलाईए वो दिया जला
00:47का मतलब यही है कि जरा इनसान बनकर जरा दिलेर बनकर होसले के साथ अपने अंधेरे से आखें चार करो
00:57अपने ही जिस चेहरे को देखने से अपने ही जिस रूप को देखने से अपने ही बारे में वो जो
01:07सब बाते हैं जिनको स्वीकार करने से कतराते रहो कहो कि बहुत हो ग
01:17यह अल्मारी है छुप तो सकती निच्छे-साड़े-च्छे-फिट की अल्मारी जैसी होती है और इस अल्मारी में कुछ
01:23बहुत पुराना है जो सडरा है जो बद्बू दे रहा है इस बार प्रेरणा राम जी की
01:33अल्मारी को क्या खोली देते दिवाली पर घर साफ करने का ये अर्थ हुआ
01:44दिवाली पर घर साफ करने का मतलब यह नहीं है कि हम पुताई करवाया करते हैं हर साल बहार के
01:49पुताई ये बुलवा बुलवा के
01:51वो बहुत बाहरी बात है
01:53असली बात क्या है
01:55हम सब के अस्तित्व में एक अल्मारी है
02:00जिसमें अतीत सड रहा है दुरगंध दे रहा है
02:04उसको खोलना है
02:06और खोलना ही सफाई है उसके बागे कुछ नहीं चाहिए
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