00:00कौन कहता है कि खामोशियां बुला नहीं करती हैं?
00:06चुप तुम रहो, चुप हम रहें खामोशी को खामोशी से बात करने दो
00:16ये गुम होने का लक्षन होता है कि खामोशियों को खामोशी से एतराज नहीं रह जाता
00:25और जब दो हंकार बात कर रहे होते हैं
00:29तब खामोशी का एक पल भी
00:34मिचित्रसा लगता है
00:35असहज लगता है
00:37आक्वर्ड लगता है
00:38जुन्नू पुदिना
00:41किसी बहाने से जाकर के बैठ गए हैं
00:44डेट पर
00:45और बोल यही रहे हैं कि
00:46नहीं नहीं हम तो यहां पर
00:48शास्तर की बात करने आये हैं
00:50अचारी जी की किताबे लेकर आये हैं
00:52इन्हीं पर चर्चा होगी
00:54और पता दोनों को है
00:58गिद्ध की तरह
01:00नजर तो मास पर यह
01:03अब खामोशीयां
01:04बरदाश्ट नहीं होगी
01:05अब जरूरी होगा कि लगातार
01:08शब्दों का परदा बना रहे
01:10ताकि असलियत दिखाई न दे
01:12वहां अगर एक दो सेकेंड के लिए
01:14भी कोई चुप हो गया
01:15तो एंबेरसिंग हो जाता है
01:18असहज सा लगता है
01:22कितने लोग गुजरे हैं
01:26तो कि शब्द वहां थे ही किसलिये
01:29कुछ बताने के लिए नहीं
01:31कुछ ढखने के लिए
01:34शब्द अगर दो पल को भी नहीं रहते
01:36तो ऐसा लगता है कि दो पल को
01:39जिस आवरण ने
01:43आपकी बतसूरती ढख रखी थी
01:44वो गिर गया
01:45आप नंगे हो गए
01:46और दो पल के लिए भी नंगे होना
01:50शर्मिन्दा तो करी जाता है
01:54यहां पर खेल
01:55खामोशी सीखने का है
02:00सिर्फ
02:02मुठों वाली नहीं
02:05अनुपस्थिते वाली
02:07खामोश इसलिए नहीं है
02:08कि होट से लिए है
02:10खामोश इसलिए है कि बोलने वाला कोई है नहीं
02:14जो बोलता रहता था क्योंकि उसे अपने जूट छुपाने थे
02:21उसने जूटों से कुछ पल को ही सही तौबा कर ली
02:27अब छुप रहना
02:31ना बुरा लग रहा है ना अजीब ना सहज