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वीडियो जानकारी: वेदांत संहिता - 25.10.2026

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Transcript
00:00जो थोड़ा पारंपरिक किसम के लोग होते हैं उनका लोकधर्म उनका चलन ये हो जाता है कि अरे अरे अरे
00:07जो सब कर रहे हैं वही तुम भी करो
00:11और अक्सर जो तुम्हारी उम्र के होते हैं जेंजी
00:16ये अपना लोग धर्म बना लेते हैं कि जो कुछ भी दुनिया कर रही है मैं तो उसके
00:21अगेंस चलूँगा खिलाफ चलूँगा
00:23ये दोनों ही बातें गड़बड हैं क्योंकि इन दोनों ही बातों में आपने खुद को तो देखा ही नहीं
00:29एक ने कह दिया मैं समाज को देख रहा हूं इसलिए कि उसके पीछे चलना है
00:33दूसरे ने कह दिया मैं समाज को देख रहा हूं इसलिए कि मुझे उसके खिलाफ चलना है
00:38दोनों में एक बात साजा है यद्या पर दोनों की दिशाएं विपरीद प्रतीत होंगी
00:42लेकिन दोनों में साजी बात क्या है
00:45दोनों उधर ही देख रहे हैं
00:48और कई बार समाज के विपरीद चलने वाला हंकार समाज के पीछे चलने वाले हंकार से भी ज्यादा सघन होता
00:55है
00:55सघन मने ठिक फैट
00:57क्यों क्योंकि आप भीड का हिस्सा बन जाएं तो कौन आपको भाव देगा
01:04चली जा रही है और अन्युआई़ों फोलोवर्स की भीड चली जा रही है
01:09वो बड़ा भारी हुजूम है उसमें किसी का कुछ पता नहीं चलता न
01:14किसी के उसमें कोई वयक्तिकता नहीं है कोई इंडिजुईलिटी नहीं है
01:17उससे ज्यादा भारी अहंकार तब संभवे जब आप कहें नहीं, नहीं, मैं डूड़ू, मैं स्पेशल हूँ, तुम सब उधर जाता
01:26तो अपन को इधर जाना मांगता, और अब मैं यहाँ पर जा गर के ऐसे खड़ा हो गया,
01:37देखा मैं कितना स्पेशल हूँ, मैं स्पेशल क्यों हूँ, क्योंकि सब उधर जा रहे थे, अब मुन इधर आगे यहाँ
01:43कॉर्णर में स्टॉल मारके घड़ा हो गया है, तुम सब पागल हो, यह देखो, मुझे देखो मैं कितना स्पेशल हूँ,
01:49इंडिविज्वालिटी,

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