00:00पूछिएगा फिर कि आध्यात्मिक दिवाली का अर्थ क्या हुआ
00:03शायद ये अर्थ होगा
00:05कि राम के थोड़े निकट आया जाए कि नहीं
00:09राम चरित मानस पड़ी भी है हमने
00:12वालमी की रामायन हमारे घर में भी है एक प्रतिके तौर पर
00:18योगवाशिष्ठ क्या योगवाशिष्ठ सार भी हमने पढ़ा है
00:22ये बात लेकिन पाठन के तल पर हुई
00:27विवहार और आचरन के तल पर वास्तविक दिवाली का क्या आर्थ होगा
00:30यह होगा वैसा कुछ भी नहीं करना
00:34जो शायद राम न करते
00:39राम को सोने से लगाव था
00:44दुनिया का जो बड़े से बड़ा
00:48सोने का गड़ हो सकता था उसको छोड़ कर आ गए
00:52एक ही बार नहीं त्याग किया है राम ने
00:54कि पिता ने कहा कि अयुद्ध्या छोड़ दो तो अयुद्ध्या छोड़ दी बस
01:00अयोध्या तो चलो पिता की थी पिता कहेंगे छोड़ दो तो छोड़नी पड़ेगी
01:04लंका तो खुद जीती थी और जीती हुई लंका सोने की लंका और लंका के पास अयोध्या की पेक्षा बहुत
01:11ज्यादा सोना था
01:12लंका अपने इस समय का अमेरिका था
01:15और दबदबा भी
01:18राण अक था नहीं दब-बाई
01:19सब सारे राजाओं को अधीन कर लिया था
01:21देजोताओं को नीचे जा करके गात्खाने में डाल दिया था
01:24वो सब कुछ राण को उपलब था रामने का चाहिए ही नि
01:31जिसको मारा उसी के छोटे भाई को सौप कर आ गए
01:34तुम रखो नहीं चाहिए
01:37अगर अयुद्धा छोड़ के 14 वर्ष तक वन में भटक सकते हैं
01:40तो लंका क्या इसको भी छोड़ देंगे
01:42और फिर वापस जाएंगे
01:44अगर दो चार चीज़े उनको लोगों ने भेट कर दी उसको लेकर उद्धा चले गए थे
01:51बाकी कुछ चाहिए ही नहीं
01:54ये राम थे
02:00त्याग और राम
02:03समानार्थी शब्द हैं
02:06तो बोल ये दिवाली फिर कैसी होगी
02:08क्यों न वो सब कुछ त्यागें अपने घर से जिसकी आवश्यक्ता नहीं है
02:14और फिर त्यागें अपने मन से वो सब कुछ जो वेर्था ही बैठा हुआ है
02:19ऐसी दिवाली क्यों न मनाएं