00:03दीपावली की शाम मा लक्षमी और भगवान गणेश की पूजा का वशेश महतो है।
00:30दोपहर एक बचकर 27 मिनट से शुरू होकर दोपहर दोबचकर 54 मिनट तक रहेगा।
00:35वही निशीद काल में पूजा के लिए 11 बचकर 38 मिनट से मधिरातरी 12 बचकर 31 मिनट का समय शुब
00:42रहेगा।
00:43आईए जानते हैं कि घर पर अब दिपावली में गणेश लक्षमी की पूजा कैसे करें।
00:48दिपावली वाले दिन सुब़ जल्दे उठकर घर की साफ सफाई कर लें पूजा अस्थान को अच्छे से सजा लें।
00:54शाम को उत्तर या पूर्वदशा में एक लकड़ी की चौकी रखें। उस पर लाल या पीला रेश्मी कपड़ा बिचाएं।
01:00चौकी पर माता लक्षमी को भगवान गनेश के दाहिनी और स्थापत करें।
01:04ध्यान रहें लक्षमी जी हमेशा गड़ेश जी के दाईयोर बैठते हैं।
01:08चौकी पर अक्षत की धेरी बनाकर जल से भरा तांबे का कलश लें।
01:12कलश पर आन के पत्ते और नारियल रखें।
01:15हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर पूजा का संकल पले।
01:18सबसे पहले प्रतम पूजे, श्री गड़ेश जी का ध्यान करते वें उन्हित्ते लग, दूरवा, मोदक और फूल अर्पत करें।
01:24मालक्षमी को रोली, यक्षत, कमलगटा, लाल, गुलाब, सिंदूर, खीर, खीर, पताशे, फल और मिठाई अर्पत करें।
01:31सरसो के तेल और देसी घी का चौमोखी दिपक जलाकर गड़ेश लक्षमी के समक्ष रखें।
01:36गड़ेशी और मालक्षमी की आर्थी गाएं, लेकिर उससे पहले उन्हें भोग जरूर अर्पत करें।
01:42भोग में मालक्षमी को दूद, चावल और केसर, मिश्रत, खीर चड़ाएं, उन्हें कमल गटा, सिंगाड़े और मखाने का भोग लगाएं।
01:50इसके अलावने मीठा पान भी जरूर अर्पत करें। तूजा के दौरान, खील बताश भी मा को जरूर अर्पत करने चाहिए।
01:58वहीं बात करें भगवान के नेश की तो उन्हें मोदग अतिप्रिय है, उसका भोग लगाएं।
02:03आप चाहे तो लड़ू में मोती चूर या बेशन के लड़ू भी उन्हें चड़ा सकते हैं।
02:08गुड और नारियल भी उन्हें अर्पत करें। इसके अलावा फलों का भोग भी उन्हें जरूर लगाएं।
02:13आप के लिए लाल या पीले रंग के फल भी उन्हें चड़ा सकते हैं।
02:18असके बाद आर्ती गाकर अंजाने में भूल भूल चूप के लिए शमायाचना करें।
02:23फिल हाल उस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक और शेयर करें।