00:00मैं दस्वी में था, तो हमारे यहां पे दस्वी का जो बोर्ड होता था, उससे पहले comparative exams होते थे, उसमें जो comparative हुए सब, उसमें हमारा नंबर पहला आ गया, तो लड़क पन के दिन आत्म विश्वास बहुत बढ़ गया होगा, अब बोर्ड आ गये हैं, मार्च का महीना है, हम
00:30इतनी समझ नहीं, एक दिन हीरो पुगले करके निकले, गिर गए, टांग छिल गई, घुटने में चोट आई, और जो यह अंगूठा है, पाउं का, मेरे एक अंगूठा अभी भी गड़बड है थोड़ा सा, नाकून से, तो वो जो अंगूठा है वो, एकदम ही टूट टा
01:00में पहली रैंक आ गई, और भारत में तीसरी, वो होता ही नहीं, अगर वो एक्सरेंट नहीं होता, और थोड़ा और जोर का हो जाता, तो भारत में भी पहली आ जाए, समझ रहे बात को?