00:00भारत आजाद हुआ और उस समय पर कितनी ही फिल्में आई जो आदर्शवाद से भरी हुई थी
00:05उस दौर के तुम आदर्शवादी गीत सुनो सारे
00:08सब भविश्य की बात कर रहे हैं वो भविश्य आज तक नहीं आया
00:1575 साल बीट गए
00:161950 में पचपन में हमने जो गीत गाए थे
00:20वो आज तक फली भूत नहीं हुए क्योँ?
00:22क्योंकि किसी गीत ने वरत आई नहीं देखा था
00:25सब ने भविश्य के सपने संजो है वरतामान को किसी ने नहीं देखा
00:28ग्यानियों के हमने कद्र तो करी नहीं है
00:30लिए नहीं कहा है नहीं कहानीं कहां से आजाएगी पुरानी नहीं कहां से आजाएगी
00:57पुरानी मिटी है तो नहीं कहां से आएगी जो बात होती है ना कि हम अपने हाथों से नया भविष्य निर्मित करेंगे इन ही फॉलादी हाथों से नय भविष्य की रचना होगी निर्मान होगा स्रजन होगा मुर्खता की बाते हैं इन हाथों से नया भविष्य नहीं कड़ा