00:00हर जीव के साथ जो हो रहा है वो तुम्हारे साथ भी हो रहा है क्योंकि एक ही वृत्ति है
00:05जो सब जीवों में मैं बोलती है
00:08देखो कि कैसे मकड़ी जाल सजा कर प्रतीक्षा करती है
00:12देखो कैसे छिपकली शिकार के पीछे धीरत के साथ बैठ जाती है
00:19देखो कैसे मगरमच अचानक जपट्टा मार करके
00:22पानी पीने वाले पशो को पानी के भीतर खीच लेता है
00:26देखो कि यही सब तुम्हारे साथ भी हो रहा है
00:28और यही सब तुम स्वेम भी कर रहे हो
00:32कुछ नया नहीं कर रहे तुम
00:34और जब तुम कर कुछ नया नहीं रहे
00:37तो तुम्हें परिणाम कैसे नया मिलेगा
00:42जिहवा से
00:45करमेंद्रियों से
00:47और मन से
00:52कर्म वही सब कर रहे हो जो बाकी लोग भी करते हैं
00:56वही सब तुम करे जा रहे हो जो हर कोई करता था और कर रहा है
01:00लेकिन तुम परिणाम की अकांशा रखते हो नई
01:05नया परिणाम कैसे मिल जाएगा
01:08यही समझाने के लिए पुनर जन्म का सिधान्त ग्यानियों ने हमको दिया
01:12पुरानी राहों पर चलते हुए नई मन्जिल तक कैसे पहुँच जाओगे
01:18वही जो पुरानी रहा है उस पर बार-बार चलने को कहते हैं पुनर जन्म और पुनर मरण
01:26एक ही रहा पर चल दिये तो पुनर जन्म हो गया
01:29वही रहा थी यो खत्म हो गई तुम्हा लिए पुनर मरण हो गया
01:32वही कामना फिर लौट करके आ गई
01:34तो क्या बोलो अपने आपको तुम फिर पैदा हो गए
01:37और फिर निराश हो गए
01:42उदासीन दिल तूट गया
01:43तो क्या हो गए? मौत हो गई
01:46फिर मर गए
01:47दिन में छे बार मरते हैं
01:49और साथ बार पैदा हो जाते हैं
01:52यही पुनर जन्र
01:53और हर बार इस उम्मीद के साथ पैदा होते हैं
01:56कि जो पिछली बार नहीं हुआ वो इस बार हो जाएगा
02:00कैसे हो जाएगा?
02:05करता वही कर्म वही
02:07तो कर्म फल अलग कहां से आ जाएगा?
02:08पागल!