00:00बहुत सारे ऐसे होते हैं वो रसिक बताते हैं अपने आपको आपको पाइटी गला रखते हैं तो ऐसो को खासतोर
00:05पर बुलाए जाता है पैसे दे के बुलाए जाता है वो आते हैं दो पेक डाउन होते हैं और फिर
00:10समा बांध देते हैं उनका बड़ा मान रहता है उनको बुला
00:16बिना महफिल जमती ही नहीं, उनके पास आहम तोर पे 10-20 शेर होते हैं, रटे रटाए, कुछ अदाएं होती
00:28हैं, जेब में इतना सो, महौल बना देते हैं, छा जाते हैं बिल्कुर, साव आपकी बात पर एक एक शेर
00:43अर्ज फर्माता हूँ,
00:46कितने हैं जो मेले हो आइसो से, वाह वाह वाह, कहां से आप जॉनपुर से हैं, अजी साहब, वहाँ जो
00:58सड़क पर धूल उड़ा रही होती है, वो सड़क किनारे बनती, आलू चाट पर जब पड़ती है, तो धूल नहीं
01:08होती फिर, वो गर्म मसाला हो जाती है,
01:14अज़ वाह वाह, चट्खारा, स्वाद आगया, स्वाद आगया, जाइका दे दिया आपने, ये क्यों ये कर रहा है मुड़ता की
01:22बाते हैं, उसके हिसाब से ये मुड़ता की बात ही सरवोच्च है,
01:26तुम बजवा लो अपने लिए थोड़ी देर को तालियां, तुम चड़ जाओ थोड़ी देर के लिए सबकी नजरों में, तुम
01:35लुट्फ उठा लो थोड़ी देर के लिए बेहोशी का,
01:39समा बदल जाएगा, राट ढ़ल जाएगी, और सुबह उठो गे तो क्या मिलेगा,
01:47खाली बोतल, तूटा जाम, और सरदर्द,
01:56रात रंगीन हो गई थी, रात रंगीन हो गई थी,