00:00लपटों की एक शान होती है और गिली लखड़ी का धुआ उससे सिर्फ आसू भैते कितनों ने गिली लखड़ी का
00:11धुआ महसूस किया कभी सिर्फ यह होता आखें खराब और हो जाती तहें धुआ मारना है शान से लपटों क्या
00:26लपटों
00:29कोई पूछे सत्र देखते हुए क्या कर रहे हो तो बोलो लपट रहे हैं और क्या कर रहे हो भी
00:37आइम फ्लिमिंग
00:40कहां चाहरी जी अब इतनी दूर कि हम सजन सुसील भदर लोग हैं और आपके पास आए हैं ये सब
00:48कुछ जलने फूकने की क्या बाते कर रहे हो
00:54गीता पढ़ने आए हैं भली मीठी बाते बताओ
01:03मधुर्बचन कैसे बोलने चाहिए उज्वल चरित्र कैसे बनाना चाहिए
01:09तो आप कैसी खतरनाक बाते करना शुरू कर देते हो
01:14इसी लिए फिर हम भग जाते हैं कुछ दूद जलेबी और बटवाओ
01:20रस बहना चाहिए यहां से बहता है रस यह बहना चाहिए
01:28वो जिसको तुम्हारे बाबा लोग रस बोलते हैं वो आयाशी है
01:33वो जो बुलते हैं न हम बड़े रसिक हैं आओ रस
01:37यहां बैठो हमारी वानी सुनो उसमें बड़ा मधौर रस है
01:42विलासिता है वो
01:44रस की कीमत चुकानी पड़ती है चखना है रस तो यहां से बहेगा उसको चखना
01:51वही होता है
01:53और वो दुख की बात नहीं होती
01:55वो दुख के बीच
01:58मौज की बात होती है
01:59वो मौज
02:01जिसमें दर्द शामिल नहो
02:03जान लेना आयाशी है
02:06शाहरी नहीं सुना रहा हो
02:07तर्ख है
02:10आनंद, सच्चिदानंद
02:12तो अहंकार के
02:14मिठने का ही नाम है न
02:20आनंद हो सकता है
02:22बस यही है इतनी सी बात है