00:002000 की शुरुआत बिलकुल, 1999 का अंत
00:04मैं software में था, वहां मुझे कुछ नहीं जम रहा था
00:07software में मुझे होना नहीं था
00:09civil services की और जाना था, उसका result नहीं आया था
00:14software मेरी engineering का field नहीं था
00:16civil services की नाकाफियां, कमजोरियां, दिखाई देने लग गई थी
00:24तो कुछ नहीं पता था क्या कैसे करना है टेटोलते टेटोलते खुद ही आगे बढ़ा जाता है
00:28और ये बात समझो बहुत निजी होती है ये तुम्हें खुद ही फैसला करना पड़ेगा
00:33और इसमें उहापोह के कशमकश के अंतरदवंद के एक लंबे दौर से घुजरना पड़ता है नई चीज़ें इस पश्ट होती
00:43है
00:43ये लगभग प्यार जैसी बात है इसको आउटसोर्स नहीं कर सकते ये फैसला खुद लेना पड़ता है
00:48हाँ इतना मैं कर सकता हूँ कि उस फैसले को लेने के लिए जो आवश्यक रोशनी है मैं तुमको देता
00:56रहा हूँ
00:56वो तुम्हें मेरी और से मिलती रहेगी ये वादा रहा लेकिन उस फैसला क्या होगा कब होगा ये तो तुम्हें
01:03ही तै करना है
01:05तुम्हारे लिए
01:05मैं ले नहीं सकता
01:07ले सकता भी हूँ तो लूँगा नहीं
01:12मेरा काम है तुम्हे रोशनी देना
01:14उस रोशनी में तुम अपनी जिन्दगी को
01:16साफ देखो और सही फैसले ले पाओ
01:18ये तुम्हारा काम है