00:00फिर जो मरे हैं वो कौन है
00:04मैं एक टीवी चैनल चलाता हूँ
00:06और मैं ही होटेल्स की एक बड़ी चेन चलाता हूँ
00:09क्या मैं ये चाहूँगा कि ये ख़बर फैल जाए
00:12कि जहां मैंने सब होटल बना दियें ग्लेशियर के नीचे
00:15वो जगे तो समयाप्त होगी
00:19तो उसमें कस्टमर्स नहीं आएंगे
00:21और दूसरी बात वो जो होटल बनाया गया है
00:38वो प्रियोजनाई चल रही थी उनमें काम करने वाले
00:41साथारन मज़दूर हो गयरा थे मिस्तृ
00:43पहाड़ों के नीचे रहने वाले साधारण जो mountain communities होती है अब यह जो पहाड़ी समुदाएं हैं आम तोर पे
00:50इनके पास बहुत पैसा तो होता नहीं यह लोग थे नेपाल तिब्बत की सीमा थी तो वो लोग जो
00:58interborder trade की operations में मदद करते हैं वो लोग थे वो लोग भी कोई पैसे वाले तो होते नहीं
01:04वो मर भी गए तो हमें क्यों फरक पड़े हम उनकी मौत का जिम्मा अपने उपर क्यों सुईकार करें क्योंकि
01:10अगर सुईकार करेंगे तो फिर अपने आपको बदलना पड़ेगा और सबस
01:25हादिश करी है कि इस बात को बिलकुल छुपा दो जो नेपाल में हुआ नहीं लगातार हो रहा है क्योंगि
01:33हर साल दो बार तीन बार होता है
01:34सिर्फ निपाल में नहीं पूरा ये जो हिमाले नक्षे 23 में
01:38ये जो लगातार चली रहा है
01:41उसका जब्मेदार हर वो आदमी है
01:45जो अपनी हसरते पूरी करने के लिए
01:48और बड़ा आदमी बनने के लिए
01:49बेंतहा एमिशन्स करता ही जा रहा है
01:51हम वो बात चुपाना चाहते है
01:54और चुपाने के हमारे पास बहुत तरीके उपलब्ध है
01:57टीवी पर जो शोका कुल परिवार हैं उनको दिखा दो
02:02सहानुभूती के नीचे सत्य को दफन कर दो
02:06सबका ध्यान किस में चला जाए
02:08सहानुभूती में तागी सच्चाई कोई पूछे ही नहीं
02:10बस सहानुभूती अपनी अपनी आकर के हाजरी लगाते रहो
02:15सच्चाई मत पूछो कि यह हुआ कैसे और बार बार कैसे हो रहा है