00:02चन्नाई के टाइडल पार्क में अचानक सड़क धस गए और ये कार सीधे गहरे गड़े में जागिरी धनीमत रही इपकार
00:09में बैठे दोनों लोगों को कुछ नहीं हुआ
00:11ये सड़क तो सिर्फ एक स्थूल अभिव्यक्ति है उस चीज की जो हमारे भीतर भरी हुई है
00:16हम गड़ों से भरे हुई है इसलिए मारी सड़के गड़ों से भरी हुई है और इसलिए अगर हमें कोई ठीक
00:20सड़क कभी दे भी दी जाती है तो हम उसमें गड़े खोद देते हैं
00:23क्योंकि ये सड़क नहीं है, ये जनता का मन है,
00:26ये आम आदमी की चेतना है गड़हों से भरी हुई,
00:29कोई एच्छी सड़क आपको दे भीच्ट,
00:30अच्छे पबलिक पार्क आइसा थोड़ी है कि बनते नहीं है,
00:32जो public park बनते हैं उनको तबहा कौन करता है, public
00:36सरकारी अस्पेटाल बन भी जाए तो सरकारी अस्पेटाल को पान की पीक से शरंगार कौन कराता है, public
00:42हम चाहते ही नहीं जबकि कोई चीज साफ रहे तो कोई साफ चीज चलेगी कहाँ से
00:46नेता होसे क्या उम्मीद कर रहे हैं
00:48किसका नेता हमारा आपका नेता
00:50नेता तो पबलिक के पीछे चलता है
00:52पबलिक के आगे थोड़ी चलता है
00:54तो एक ही तरीका है कुछ भी ठीक करने का जनजाग्रती
00:57झाल कर दो कर दो, कर्षंगे लिदेकान कर दो.