00:00जिन लोगों को न धर्म से सरोकार, न अध्यात्म से मतलब, न देवी से कोई ले ना देना, वो भी
00:05पहुच जा रहे हैं।
00:07डंडियां बजाने से बोध थोड़ी जागरत हो जाएगा। पहले मन और नियत तो साफ होनी चाहिए न।
00:14इरादा ही गलत है, उदेश ही दूशित है, तो ये नाचगा करके क्या मिलेगा, वो तो फिर रंगरेलियां हो गई।
00:44उससे कुछ अलग होने की जलक पापाओ। मा कहती है, तुम मुझसे जो मांगोगी मिलेगा, तुम्हें मुक्ते चाहिए, मैं मुक्ते
00:50दे दूँगी।
00:52और तुमको उपद्रव और मनुरंजन और भोग यही चाहिए, तो मैं तुम्हें ये दे दूँगी।