00:00आचारे जी अभी आपने कहा कि भीतर से जो भी पहचान उठे उसकी नेति-नेति करनी चाहिए
00:05आज सुभे के अक्टिविटी में जब हम अपनी आइडेंटिटी लिख रहे थे इन रिलेशन टो सम्थिंग
00:11तो वहां पर मैंने लिका था कि I'm a good student of आचारे जी
00:16तो इन्हों ने मुझे कहा कि यह बहुत अच्छी आइडेंटिटी है इसको पकड़ कर रखिएगा
00:28और अभी आप कहे रहे हैं कि नेति-नेति करनी है जो भी पहचान उठे
00:33नाव छोड़ी जाती है पर मंजधार में नहीं
00:37नाव से उतरना पड़ता है नाव पर घर नहीं बना लिया जाता आपसे मैं अक्सर बोलता हूँ कि पुल पार
00:44कर जाओ दिन बंद अब्रिज सम्मान इसी में है कि उसको नमस्कार कर दो
00:50नाव पर घर बनाने लग जाओगे तो नाव भी डूप जाएगी कितने लोग घर बनाएंगे नाव पर तो नाव भी
00:56यही चाहती है नाविक भी यही चाहता है कि इधर से चलो शांति पुरुआ का नुशासन से बैठे रहो और
01:04जब उधर पहुँच जाओ तो उतर जाओ व
01:19हम खुद देख लेंगे
01:20और अगर नहीं पहुँचे हो दूसरे तट पर तो कृपा करके नाउसे कूद मत जाना
01:25आरही बात समझ मैं हाँ
01:27हाँ पुल जलाने होते हैं
01:29लेकिन सोचो जिस पुल पर खड़े हो उसी में डानेमाइट बांध रहे हो
01:35तो अपने लिए तो समस्या करी रहे हो
01:39औरों के लिए भी कर रहे हो