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वीडियो जानकारी: वेदान्त संहिता - 26.09.2026

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Transcript
00:00नमस्ते चरीए
00:01मैं भी इसे बाबाजी का जब पूस्ती थी तो इसे ही करती थी बड़ा-बड़ा बाद
00:0512 सल महीं बेपिताये हैं कुंडलेन जागरत के लिए आतना सखेत करने के लिए
00:10अघिक से मेरको लगते हैं कितना जुट में फसी थी व बात तो हुमें रिफिट नहीं कर पारी हो
00:15पड़् इन लोगों का इतनाuldade कैसा आता है सालों सालों से इतने इतने लोगों को यही फैला रही है
00:23और उसे में भी हम फस जा रही है
00:25किसे ने लोगोंने कभी न कभी अंडा वास मुर्गी कुछ खाया है
00:31कॉन्फिटेंस कहां से आ जाता है
00:33कि सामने एक जीव है उसको उठा के खा जाओगी
00:35कहां से आ जाता है
00:36कितने लोग अभी भी
00:38कम से कम यदा कदा
00:40दूध वाला माल
00:42साफ कर देते हैं
00:44कर दो नहीं देख रहा हूं
00:49कि कहां से आ जाता है
00:51सोचो एक भैस है
00:53भैस
00:54अपने आपको चितरित करो
00:56कल्पना करो कि तुमने भैस के थनों में मूझ अरख रख भग भग पी रहे हो
01:01करो जो जो लोग सब चायबाज यहां बैठे हुए
01:04करो भैस के मूँ लगाई फियो ठंज से उसके सीधे करो
01:07इतनी बड़ी मूरखता करने का कॉंफिडेमस कहां से आ जाता, बताऊ
01:11बताओ नो कहां से आता है
01:12अब पूरे कॉंफिडेंस से करते हो कि नहीं
01:15जल्दी बोलो यार
01:17जहां से वो confidence आता है न वहीं से ये confidence आता है कि मेरी कुंडलेनी उठ रही है
01:21और मेरी चेतना आप ऐसे मेरा भेजा फाड़ के बाहर निकल जाएगी
01:25दोनों एक ही जगे से आते हैं
01:27आपने जीवन में जो कुछ करा है वो आप करते हैं अगर दूसरे न कर रहे होते हैं
01:32उस यह जवाब हम अंधे पगले अग्यानी एकदम बेहोश लोग हैं
01:37दूसरे कुछ भी कर रहे हम साथ में करना शुरू कर देते हैं
01:39दूसरे कप में डालके खून पीते हूं आप खून पिना शुरू कर दोगे
01:44आज भी नजाने कितनी जगहों पर ऐसे वेंजन बनते हैं पता हैं उन्हें वने वेंजन के बोलते हैं
01:50जिसमें खून जमा करके उसका पकवान बनाते हैं
01:54और जब उसको खा रहा हूंगे वह खून को तो क्या किसी को कुछ भी अजीब आपत्यजनक विशेश लगेगा क्या
02:04कोई कहागा बट इस जॉस सू ओध कोई कहता है जहंगा कोई कहता है किया कोण करोग दिया पडूस अनकरा
02:13अब परोजी ने खर दिया
02:15हमने ये कर दिया
02:17हमारे सपने कभी टूटते नहीं है
02:19हम बस एक सपने से
02:20दूसरे सपने में प्रवेश कर जाते हैं
02:22तो इसलिए आपके बारा साल खत्म नहीं हुए है
02:25बारा साल तक
02:26आप विचित्र अतरंगी बातों में
02:28भरोसा करती रही आज आप किनी और बातों में भरोसा करती है वो सब बातें भी उतनी विचित्र है हमारा
02:35हर भरोसा विचित्र है क्योंकि हमारा हर भरोसा बस भीड के पिछवाड़े का नाम है वो रही भीड मुझे देख
02:44रहा है भीड का पिछवाड़ा इसी का नाम है भरोसा
02:50भरोसा
02:50हम सब बड़े भरोसे आले लोग है

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