00:00तो इन नौदुर्गा के दौरान आपको मा के दर्शन करने हूँ अगर सच मुछ
00:06तो मा को अपने भीतर देखिएगा दर्शन वही है
00:12आत्मग्यान ही नवरात्री में पूजन है
00:17एकदम आरंभ से ही बता दिया गया है कि मा कहां है
00:20मा आपके ही भीतर है
00:23ये देह मा से आती है और मा इसी देह में बैठी है
00:27और स्वयम को जानने का ही अर्थ होता है मा का दर्शन
00:33आत्मग्यान माने किसका ग्यान? माया का ग्यान
00:36माया माने मा
00:38मा का दर्शन मात्र आत्मग्यान के दौरा ही सम्भव है
00:41बहुत सीधी सी बात है न
00:43अपनी माया ही तो जानी जाती है, माया ही मा है
00:47वैसे बच्चे की देह में मा बैठी होती है न
00:50अब वैसे आपकी देह में मा बैठी हुई है
00:52मा का दर्शन करना है तो अपनी देह को समझो अच्छे से
00:56यही जो देह है
00:59या घट भीतर
01:02साथ समंदर, यही है, यही मा है, यही मा है, जानो इसको, नहीं जानोगे, तो इसमें से न जाने कैसे
01:13कैसे, शुम्बने शुम्ब और महिशासुर निकलेंगे, और जान जाओगे तो यहीं से, मुक्ति का रास्ता निकल आएगा, पुर से दोहरा
01:26रहे हैं, आत्म ज्यान ही मा का
01:29दरिशन है