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वीडियो जानकारी: 04.06.2026, श्रीमद्भगवद्गीता, Middlesex University, United Kingdom

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Transcript
00:00मुझे सचमुच ना पता हो, इसमें मक्खी पड़ी है, तो मैं पीवी लूँ
00:06अब धोके से यहां आ गए, यहां गीता सतर चल रहा था, तो यहां लाइट जल रही थी
00:10अब उसमें दिख भी गया कि मक्खी है, पर मक्खी के साथ कुछ है, किसी तरह का नाता
00:15तो जल्दी थे बहार निकल गए जहां लाइट नहीं है, अब लेकिन देख लिया है, पता तो ही, पता तो
00:21ही, पर दिखाना क्या है, कुछ नहीं है, अब बड़ा मुश्किल बढ़ेगा, लेकिन अब दुनिया में अपने रुतबे, अपने रसूख,
00:31अपनी जगह की बात है, स
00:45आइए, कुछ नया नहीं बताते धर्मगरंद, वो कहते हैं, जो तुम पहले से ही जानते हो, पहले तो उसको स्विकार
00:51कर लो, वास्तव में वो आपसे कहते हैं, कि जो जानने लायक है, तुम्हें तो छोड़ना है वो सब कुछ
00:59जो जानने लायक, नहीं है, सारी प्रक्रिया
01:03नकार की, निशेद की, निती-निती की है
01:05क्या नया पता देंगे
01:07आपकी जिन्दगी के बारे में
01:08आप से ज़्यादा किसको पता है
01:11आपकी भावना है, आपके केंद्र
01:13आपके विचार
01:14आपके संबंध, इनके बारे में
01:17कोई बाहर से आगा आपको पताने
01:18मैं कौन हूँ मुझे क्या पता, नाम भी नहीं पता, क्या पता मुझे, किसी को क्या पता, और गीता तो
01:24हजारों साल पहले आई थी आज, आप आज क्यों, उन्होंने आपकी विक्तिकत जीरों ने घुसके कभी नहीं देखा गी क्या
01:30चल रहा है, तो सिर्फ आप ही हो जिसको प
01:48तुम्हारा बिगड इस डर से रहा है कि तुमने मान लिया कि क्या चल रहा है तो हानी हो जाएगी,
01:53कोई हानी नहीं हो जाएगी, सबसे बड़ी हानी जूट से होती है, जूट ही हानी है, जिसे अंतरिक जूटों में
02:00जीना पड़ रहा है, उसने अपनी सबसे बड़ी हानी करही
02:03रखी है इससे बड़ी और कोई हानी नहीं होती

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