00:00इश्क है अपने ही खून में नहाना और मुस्कुराना
00:04यह जैसे गालिब एक आग का दरिया है और डूब के जाना है
00:08यह इश्क नहीं आसा बस इतना समझ लीजे
00:12सुर काटे भूई धरे
00:15मरो है जोगी मरो मरो मरण है मीठा
00:19कैसी मरनी मरो जिस मरनी गोरख मर जीठा
00:24एश्क के सब दुनिया वाले बेकार की बाते करते है यह चाहिए वो चाहिए