00:00अचार जी वो फलाना मेरी जिंदगी में है मैं उसकी असलियत कैसे जानू अगर असलियत नहीं पता तो तुम्हारी जिंदगी
00:06में कैसे है जिंदगी में है तो इसका मतलब तुमने कुछ न कुछ तो कहानी बठाई रखी है तभी तो
00:11है तो यह पूछना होता है कि यह जो मैं स
00:28पता है कि आपने जूट बोला है.
00:30बस बुरा लगता है ये महनना
00:32कि मैने खुद से ही
00:34जूट बोला.
00:36मानने की बात है, जानने की भी नहीं
00:38इतनी जादा.
00:39आपकी गोद पर किताब रखी है, फोन रखा है.
00:43पहले ये आपने
00:44कुछ लाव है तभी तो रखा है यह ऐसे रख लिए है तब जानोगे आपको पहले ही पता है तो
00:51जानना क्या है पता तो है विच्चु रखा है गोद पे किताब रखी है अब जानना क्या है अब तो
00:59पूछना है कि क्या खाया था क्या नशा करा था हम यू प्रदर्शित करते ह
01:08सोधा नहीं है, तुम्हें पता नहीं होता तो रिष्टा क्यों होता, धोखा नहीं खा रहे हैंамен, सोधा खा रहे हैं,
01:18और सोधू में नुखसान हो तो उसको दोखा खाना नहीं कहते जाना कि बठाशा लगता है
01:26ये बोलने में कि मुझे तो धोखा हो गया, ब्रह्म हो गया, ज्ञान नहीं था, पता नहीं था, ऐसा कुछ
01:33नहीं है, बस सौधा उल्टा पड़ गया है.
Comments