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दुनिया में इतनी लड़ाइयाँ क्यों हो रही हैं? हज़ारों मौतें क्यों हो रही हैं? इन संघर्षों को केवल देशों, समुदायों या विचारधाराओं के बीच की लड़ाई समझना पर्याप्त नहीं है। इंसान के भीतर ही कुछ ऐसा है, जो उसे दूसरे इंसान से भिड़ने के लिए मजबूर करता है। इंसान के भीतर का संघर्ष ही बड़ा होकर राष्ट्रों और समुदायों के बीच का संघर्ष बन जाता है। हिंसा इंसान के मन से शुरू होती है और इंसान के मन में ही समाप्त की जा सकती है।
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वीडियो जानकारी: 25.10.23, साक्षात्कार सत्र, ग्रेटर नॉएडा

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Transcript
00:00साथी अरेबिया के एरपोर्ट पर हुए मिसाइल हमले जिन में कुल 13 लोगों की जान गई और 320 लोग घायल
00:06हो गए
00:06इन हमलों के पीछे यमन के हूती हमलावरों का हाथ बताया जा रहा है
00:10जानना चाहते हो कि यह लड़ाई क्यों हो रही है
00:14सब लड़ाई क्यों होते हैं यह हजारों मौते क्यों हो रही है
00:17तो सबसे पहले तो यह सोचना छोड़ना पड़ेगा
00:20कि संगठन, और्गनाईजेशन, देश या समुदाय आपस में भिड़े हुए हैं
00:26ये लड़ाई इनसान और इनसान की है, ये लड़ाई धर्म और धर्म की नहीं है, ये लड़ाई देश और देश
00:31की नहीं है, ये लड़ाई विचारधारा और विचारधारा की नहीं है, ये लड़ाई इनसान और इनसान की है, इनसान में
00:37कुछ ऐसा है जो उसे मजबूर करता ह
00:41दूसरे इनसान से हमेशा भिड़े रहने के लिए और जब तक आप इस संघर्ष को दुनिया के हर संघर्ष को
00:48इनसान और इनसान के बीच की रड़ाई की तरह नहीं देखोगे तब तक संघर्ष रुखने वाले नहीं हैं
00:53इंसान के भीतर जो है संघर्ष अपना वही बढ़ा हो करके राष्ट्रों के बीच का और समुदायों के बीच का
01:01संघर्ष बन जाता है।
01:02इंसान के मन से इंसा शुरू होती है, इंसान के मन में ही वो समाप्त की जा सकती है
01:06और किसी जगह और किसी तरीके से उसको समाप्त किया नहीं जा सकता

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