00:00एक मैंने कफन देखा, कफन पर लिखा था राम नाम सत्य, इस वाग के का, क्या मतलब बस जब कोई
00:08बेखती मृत्य होती है तो उसी समय बोलना है, या किसी के साट पर भी क्यों नहीं लिख सकते हैं?
00:14किसने मना करा है लिखने से?
00:15मतलब हम तु कभी देखे नहीं, मतलब ऐसा?
00:18तुम बताओ, तुम क्यों नहीं लिखते हो?
00:21तो सवाल ये होना चाहिए, कि राम और राम के नाम और सत्य, इन से ज्यादा बड़ा तुम्हारे लिए डर
00:31क्यों है?
00:31कि राम को भी तुम छोड़ने को तयार हो, सत्य को भी छोड़ने को तयार हो, राम नाम सत्य है,
00:37ये कह भी नहीं पा रहे हो क्योंकि समाज से डरते हो
00:39क्योंकि समाज ने बोला है कि राम नाम सत्य है तो सिर्फ मौत पर बोला जाता है
00:44और तुम डर गए
00:45और उस डर के मारे तुमने राम को भी छोड़ दिया
00:47सत्य को भी छोड़ दिया
00:49सवाल तो फिर ये है ना
00:51नहीं है असली सवाल तो ये हुआ
00:54नहीं तो ये कोई पूछने वाली बात है
00:55ये राम नाम राम नाम तो सत्य है ही
00:58और जो सत्य है
00:59है उसका सुमिरन करने में क्या बुराई हो सकती है तो फिर सवाल क्योंて पूछा सवाल इसलिए
01:04पूछा क्योंकि डरे हुए हैं क्योंकि राम से प्यार नहीं है समाद से प्यार
01:09है हमाई संस्था में तो हम राम नाम सत्य है जर्म दिन पर गाते हैं बिसच मुझ चलता है जो
01:15गीता प्रते भागे हैं उनमें चलता है कि एक दूसरे से मिलो और सामने आए कोई बोले राम राम तो
01:21बोलो राम नाम सत्य है जैसे यो बोले राम राम तुम बोलो सत्य है
01:27हम कैसे लोग हैं कि और कौन सा हमने धर्म बना दिया है तुम बताओ
01:31कि जिसमें राम का नाम भी हमारे लिए अशुग हो गया
01:34इसी को मैं लोकधर्म कहता हूँ
01:37विक्रत धर्म
01:38जो कि साधारन जनता में प्रचले थे और बाबाओं दौरा पहलाया जाता है
01:42जिसमें सत्य के लिए कोई स्थान नहीं
01:44जिसमें राम को भी बस सुईधाओं और संसकारों की सीमाओं में रखा जाता है